कोलकाता हिन्दी न्यूज | 04 अगस्त 2026: पश्चिम बंगाल में रक्तदान शिविरों से एकत्र किए गए रक्त के प्लाज्मा की कथित अवैध बिक्री को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखोपाध्याय ने दावा किया कि 11 ब्लड बैंकों ने लगभग 4 करोड़ रुपये मूल्य का प्लाज्मा दूसरे राज्यों में बेचा। अब यह जांच की जा रही है कि इसके लिए आवश्यक वैधानिक अनुमति ली गई थी या नहीं।
स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा?
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि शुरुआती जांच में पता चला है कि कई ब्लड बैंकों ने बड़ी मात्रा में प्लाज्मा पश्चिम बंगाल से बाहर भेजा।
इस पूरे मामले में यह जांच की जा रही है कि संबंधित संस्थानों ने स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल या नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल से आवश्यक अनुमति प्राप्त की थी या नहीं।
उन्होंने संकेत दिया कि जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा तथा यदि अनियमितताएं पाई गईं तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
हाजरा के पीपुल्स ब्लड बैंक में छापेमारी
मामले की जांच के तहत सोमवार को हाजरा स्थित पीपुल्स ब्लड बैंक में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने निरीक्षण किया। अधिकारियों ने दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में अन्य ब्लड बैंकों में भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी।
प्लाज्मा की इतनी मांग क्यों?
विशेषज्ञों के अनुसार, प्लाज्मा रक्त का तरल हिस्सा होता है, जो कुल रक्त का लगभग 55 प्रतिशत होता है। इसमें पानी के अलावा प्रोटीन, क्लॉटिंग फैक्टर और एंटीबॉडी मौजूद रहते हैं।
प्लाज्मा का उपयोग मुख्य रूप से इन स्थितियों में किया जाता है:
- गंभीर दुर्घटना के बाद अत्यधिक रक्तस्राव
- प्रसव के दौरान अधिक रक्त बहने की स्थिति
- लिवर संबंधी गंभीर बीमारियां
- कुछ दुर्लभ ऑटोइम्यून रोगों के उपचार में
इसी वजह से देशभर में प्लाज्मा की मांग लगातार बनी रहती है।
झारखंड भेजे जाने का संदेह
सूत्रों के अनुसार, कथित तौर पर सबसे अधिक प्लाज्मा झारखंड भेजा गया। हालांकि स्वास्थ्य विभाग अभी दस्तावेजों की जांच कर रहा है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
क्या रक्त का बाकी हिस्सा बर्बाद हुआ?
स्वास्थ्य विभाग को यह भी आशंका है कि प्लाज्मा निकालने के बाद रक्त के अन्य हिस्से, विशेषकर रेड ब्लड सेल (RBC), का पर्याप्त उपयोग नहीं हुआ और कुछ मामलों में उनके नष्ट होने की संभावना भी है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, “हमारी सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं रक्त व्यर्थ न जाए। जो लोग रक्तदान करते हैं, उनका रक्त केवल जरूरतमंद मरीजों के इलाज में ही इस्तेमाल होना चाहिए।”
उन्होंने रक्तदाताओं से अपील की कि वे रक्तदान के बदले किसी प्रकार का उपहार लेने से बचें और सुनिश्चित करें कि उनका रक्त सही और पारदर्शी तरीके से उपयोग हो।
नोट: फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है। स्वास्थ्य मंत्री द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच जारी है और संबंधित ब्लड बैंकों की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
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