कोलकाता/तमलुक, 18 मार्च 2026: पश्चिम बंगाल के वैज्ञानिकों ने रुपनारायण नदी के पास तमलुक क्षेत्र में एक नई मुहाना-निवासी (एस्टुअराइन) मछली प्रजाति “बुटिस बर्गभीमे” की पहचान की है।
यह खोज भारत की जलीय जैवविविधता में महत्वपूर्ण जोड़ है और मुहाना क्षेत्रों की समृद्ध पारिस्थितिकी को रेखांकित करती है।
रुपनारायण नदी में खोज का महत्व
यह नई प्रजाति रुपनारायण नदी (हुगली नदी की प्रमुख सहायक) के मुहाना क्षेत्र में मिली है। मुहाना क्षेत्र मीठे और खारे पानी के मिलन से बने गतिशील पारिस्थितिकी तंत्र हैं, जहां लवणता लगातार बदलती रहती है।
ऐसे वातावरण में केवल विशेष अनुकूलित जीव ही जीवित रह पाते हैं। यह खोज दर्शाती है कि भारत के एस्टुअराइन क्षेत्र अभी भी कई अनदेखी प्रजातियों का घर हैं और इनका वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है।
GK तथ्य – एक नजर में
- “बुटिस बर्गभीमे” – भारत की नई एस्टुअराइन मछली प्रजाति
- खोज स्थल: रुपनारायण नदी, तमलुक (पश्चिम बंगाल)
- परिवार: बुटिड (Butidae) – गजियन गोबी
- खास लक्षण: आंखों के बीच स्केल्स, धारियों वाले पंख
- महत्व: मुहाना पारिस्थितिकी तंत्र की समृद्धि और संरक्षण की जरूरत
वर्गीकरण और पारिवारिक विशेषताएं
“बुटिस बर्गभीमे” बुटिड (Butidae) परिवार से संबंधित है, जिसे सामान्यतः “गजियन गोबी” कहा जाता है। इस परिवार की मछलियां मुख्य रूप से खारे या अर्ध-खारे जल (मुहाने और मैंग्रोव) में पाई जाती हैं। इनकी सबसे बड़ी विशेषता बदलती लवणता के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता है।
विशिष्ट शारीरिक लक्षण
इस प्रजाति में कुछ खास लक्षण हैं जो इसे अन्य बुटिड मछलियों से अलग करते हैं:
- आंखों के बीच इंटरऑर्बिटल स्केल्स मौजूद
- शरीर पर अतिरिक्त सहायक स्केल्स
- पेक्टोरल फिन्स (छाती के पंख) पर हल्की-गहरी धारियां
नामकरण और सांस्कृतिक महत्व
प्रजाति का नाम “बर्गभीमे” स्थानीय देवी बर्गभीमा के नाम पर रखा गया है, जो तमलुक क्षेत्र में धार्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। यह नामकरण वैज्ञानिक खोज और स्थानीय सांस्कृतिक परंपरा के बीच गहरा संबंध दर्शाता है।
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