कोलकाता | 13 नवंबर 2025 — पश्चिम बंगाल सरकार ने आगामी 1 दिसंबर 2025 से राज्य में शराब की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की है। यह फैसला नई एक्साइज ड्यूटी दरों के तहत लिया गया है, जो इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) और देशी शराब दोनों पर लागू होगा।
बीयर और वाइन को इस बढ़ोतरी से फिलहाल छूट दी गई है।
📜 क्या है बदलाव?
- एक्साइज ड्यूटी में संशोधन के कारण
- शराब की कीमतों में ₹10 से ₹40 तक की वृद्धि
- राज्य एक्साइज विभाग ने सभी निर्माताओं, वितरकों और थोक विक्रेताओं को निर्देश दिया है:
- 30 नवंबर तक पुरानी दरों पर स्टॉक बेचें
- 1 दिसंबर से सभी बोतलों पर नई कीमतों के स्टिकर अनिवार्य
- बिना संशोधित लेबल वाली बिक्री पर कार्रवाई संभव
राज्य आबकारी विभाग विभाग के हाल ही में अधिसूचित इस फैसले से बीयर को छोड़कर, भारत में निर्मित विदेशी शराब (आईएमएफएल) और देशी शराब की सभी श्रेणियों की शराब कीमतों में बढ़ोत्तरी हो जायेगी।

🛒 उपभोक्ताओं के लिए क्या बदलेगा?
- 1 दिसंबर से शराब खरीदना महंगा होगा
- हर ब्रांड की कीमत में बदलाव, नई दरें पहले ही वितरकों को भेजी जा चुकी हैं
- फेस्टिव सीजन और न्यू ईयर सेल्स से पहले यह बढ़ोतरी लागू की जा रही है
अधिसूचना के अनुसार सभी निर्माताओं, वितरकों और थोक व्यापारियों को 30 नवंबर तक मौजूदा स्टॉक को पुरानी दरों पर बेचने का निर्देश दिया गया है। इस अवधि के बाद कोई भी शराब, संशोधन-पूर्व कीमतों पर नहीं बेची जा सकेगी।
कोई भी “नहीं बिका” (अनसोल्ड) स्टॉक” स्वतः ही नए कर ढांचे के अंतर्गत आ जाएगा और विक्रेताओं को उपभोक्ताओं के लिए पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए संशोधित मूल्य स्टिकर के साथ बोतलों पर पुनः लेबल लगाने का निर्देश दिया गया है।
🧾 पिछली बढ़ोतरी कब हुई थी?
- अगस्त 2024 में आखिरी बार शराब की कीमतों में संशोधन हुआ था
- इस बार की बढ़ोतरी को ‘मॉडरेट’ माना जा रहा है, लेकिन त्योहारी मांग के चलते असर ज्यादा महसूस होगा
आबकारी विभाग के अधिकारियों ने कहा कि परिवर्तित दरें सभी संबंधित हितधारकों को पहले ही भेज दी गई हैं। नई नीति लागू होने से पहले प्रत्येक ब्रांड मालिक और वितरक को आवश्यक पंजीकरण और लेबल संशोधन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
आबकारी अधिकारियों को दिसंबर की शुरुआत में बाज़ार में अस्थायी उतार-चढ़ाव की आशंका है लेकिन कोई बड़ा व्यवधान होने की उम्मीद नहीं है। उनका कहना है कि व्यापारियों को समायोजन के लिए पर्याप्त समय दिया गया है।
प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि संशोधित आबकारी शुल्क से राज्य के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि होगी लेकिन वास्तविक वृद्धि का आकलन नई दरें लागू होने के कुछ हफ़्तों बाद ही किया जा सकेगा।
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