कोलकाता हिन्दी न्यूज | 31 जुलाई 2026: पश्चिम बंगाल की जमीन और भू-राजस्व विभाग ने पुराने तृणमूल कांग्रेस शासन के दौरान निजी लोगों और कंपनियों को लीज पर दी गई जमीन की पूरी समीक्षा करने का फैसला किया है।
विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, यह जांच दो बड़े कारणों से की जा रही है।
पहला उद्देश्य: जमीन का सही इस्तेमाल हुआ या नहीं
सबसे पहले यह देखा जाएगा कि जिस काम के लिए जमीन लीज पर दी गई थी, उस काम में उसका इस्तेमाल हुआ या नहीं। अगर जमीन लंबे समय से खाली पड़ी है और उस पर कोई प्रोजेक्ट शुरू ही नहीं हुआ, तो सरकार उस जमीन को वापस ले सकती है।
इसके बाद उस जमीन को किसी दूसरे व्यक्ति या कंपनी को औद्योगिक प्रोजेक्ट के लिए दिया जा सकता है।
वहीं अगर जमीन का कुछ हिस्सा ही इस्तेमाल हुआ है, तो सरकार संबंधित व्यक्ति से पूछेगी कि बाकी काम कब तक पूरा होगा। जरूरत पड़ी तो सरकार इसके लिए एक तय समय सीमा भी तय कर सकती है।
दूसरा उद्देश्य: गलत इस्तेमाल की जांच
दूसरा मकसद यह जांचना है कि जमीन का इस्तेमाल उसी काम के लिए हुआ है जिसके लिए लीज दी गई थी या नहीं। अक्सर ऐसा देखा गया है कि उद्योग के लिए ली गई जमीन को बिना इजाजत किसी दूसरे काम में इस्तेमाल कर लिया जाता है।
अगर ऐसा हुआ है तो सरकार संबंधित व्यक्ति से सफाई मांगेगी। इसके बाद मामले की समीक्षा कर जुर्माना लगाया जा सकता है या लीज भी रद्द की जा सकती है।
शिकायतें और नई नीति
सरकार को पहले ही कई शिकायतें मिली हैं कि लीज वाली कई जमीनें या तो पूरी तरह खाली हैं, या आधी-अधूरी पड़ी हैं, या फिर गलत कामों में इस्तेमाल हो रही हैं।
इसी के साथ राज्य सरकार ने ‘सीधी जमीन खरीद’ वाली नई नीति भी अपनाई है।
इसके तहत सरकार सीधे जमीन मालिकों से जमीन खरीदेगी और फिर उसे इंफ्रास्ट्रक्चर या उद्योग के लिए इस्तेमाल करेगी।
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