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पूजा से पहले 3719 कंप्यूटर शिक्षकों पर नौकरी का संकट, टर्मिनेशन लेटर लेकर विकास भवन पहुंचे शिक्षक

कोलकाता हिन्दी न्यूज | 28 सितम्बर 2026: दुर्गापूजा से ठीक पहले पश्चिम बंगाल के हजारों च契ावधि कंप्यूटर शिक्षकों के सामने नौकरी का संकट खड़ा हो गया है। ICT प्रोजेक्ट के छठे और सातवें चरण में काम कर रहे कंप्यूटर शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सोमवार को करुणामयी से विकाश भवन तक मार्च निकाला।

विकाश भवन के पास पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बैठकर और लेटकर विरोध जताया तथा अधिकारियों से बातचीत की मांग की।

रिपोर्टों के मुताबिक छठे और सातवें चरण में कुल 3,719 ICT कंप्यूटर शिक्षक नियुक्त किए गए थे।

इनमें से बड़ी संख्या में शिक्षकों को एजेंसियों के माध्यम से अनुबंध पर स्कूलों में काम दिया गया था। हाल में कई शिक्षकों को अनुबंध की अवधि समाप्त होने और नवीनीकरण नहीं किए जाने की सूचना दी गई है।

पूजा से पहले मिला टर्मिनेशन लेटर

प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि जब पूजा के समय दूसरे कर्मचारी बोनस और छुट्टियों की तैयारी कर रहे हैं, तब उन्हें नौकरी खत्म होने का पत्र मिल रहा है। उनके अनुसार, संबंधित एजेंसी के साथ उनका मौजूदा अनुबंध 30 सितंबर 2026 को समाप्त हो रहा है और नए टेंडर की प्रक्रिया के बाद उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हुई है।

हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में टर्मिनेशन या अनुबंध नवीनीकरण नहीं होने वाले शिक्षकों की संख्या अलग बताई गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 1,400 कंप्यूटर शिक्षकों को काम की अवधि समाप्त होने की सूचना मिली है, जबकि छठे और सातवें चरण में कुल 3,719 शिक्षक नियुक्त हुए थे।

करुणामयी से शुरू हुआ मार्च

सोमवार को बड़ी संख्या में कंप्यूटर शिक्षक करुणामयी इलाके में जमा हुए। इसके बाद उन्होंने विकाश भवन की ओर मार्च शुरू किया। जैसे ही मार्च विकाश भवन के करीब पहुंचा, पुलिस ने बैरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया।

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इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। शिक्षकों ने वहीं बैठकर विरोध शुरू कर दिया। पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों से संयम बरतने और कानून अपने हाथ में नहीं लेने की अपील की गई। इलाके में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई।

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि सरकारी अधिकारी मौके पर आकर उनसे बातचीत करें।

क्या है शिक्षकों की मांग?

ICT शिक्षकों का कहना है कि उन्हें निजी एजेंसियों के माध्यम से नियुक्त करने की व्यवस्था खत्म की जानी चाहिए। उनकी मांग है कि उन्हें सीधे सरकारी संविदा कर्मचारी के रूप में नियुक्त किया जाए।

शिक्षकों के मुताबिक ICT प्रोजेक्ट के पहले से पांचवें चरण तक नियुक्त शिक्षकों को सरकारी संविदा व्यवस्था के तहत लाया गया है और उन्हें अपेक्षाकृत अधिक पारिश्रमिक तथा अन्य सुविधाएं मिल रही हैं। छठे और सातवें चरण के शिक्षक अब भी एजेंसी के माध्यम से काम कर रहे हैं।

उनका कहना है कि वर्षों तक स्कूलों में काम करने के बाद भी नौकरी की स्थिरता नहीं है।

पांच साल काम करने के बाद भी भविष्य अनिश्चित

प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने करीब पांच वर्षों तक स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा से जुड़े काम किए हैं। इसके बावजूद अनुबंध समाप्त होने के बाद उनके रोजगार को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है।

एक शिक्षक के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि छठे और सातवें चरण के शिक्षकों को लंबे समय से करीब 8,000 रुपये मासिक पारिश्रमिक पर काम करना पड़ रहा है। उनकी मांग है कि पहले पांच चरणों की तरह उन्हें भी सरकारी व्यवस्था के तहत लाया जाए।

स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा पर भी उठे सवाल

इन शिक्षकों की सेवा समाप्त होने की स्थिति में स्कूलों में कंप्यूटर प्रशिक्षण पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। ये शिक्षक विभिन्न सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में विद्यार्थियों को कंप्यूटर प्रशिक्षण देने का काम करते हैं।

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हाल की रिपोर्टों में भी शिक्षकों के अनुबंध नवीनीकरण को लेकर अनिश्चितता और विद्यार्थियों की कंप्यूटर शिक्षा पर संभावित असर का मुद्दा उठाया गया है।

एजेंसी व्यवस्था खत्म करने की मांग

ICT शिक्षकों का संगठन ICT ऐक्य मंच लंबे समय से एजेंसी आधारित नियुक्ति के बजाय सीधे सरकारी संविदा व्यवस्था की मांग कर रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांग केवल अनुबंध बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें सरकारी स्तर पर मान्यता और रोजगार सुरक्षा देने की भी है।

फिलहाल शिक्षकों की नजर सरकार की ओर से होने वाली बातचीत और अनुबंध को लेकर अगले फैसले पर है। 30 सितंबर की मौजूदा अनुबंध अवधि करीब आने के साथ इस मुद्दे पर आंदोलन और तेज होने की संभावना बनी हुई है।

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