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विश्व जनसंख्या दिवस: बंगाल में तेजी से घट रहा प्रजनन दर, ‘बुजुर्ग राज्य’ बनने का मंडरा रहा खतरा?

कोलकाता हिन्दी न्यूज | 11 जुलाई 2026: विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल की घटती प्रजनन दर (Fertility Rate) को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई।

ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हाइजीन एंड पब्लिक हेल्थ (AIIHPH) के विशेषज्ञों ने दावा किया कि राज्य में युवा दंपतियों के बीच संतान पैदा करने की इच्छा लगातार कम होती जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यही रुझान जारी रहा तो आने वाले वर्षों में पश्चिम बंगाल में बुजुर्ग आबादी का अनुपात तेजी से बढ़ सकता है।

 अधिकांश दंपति एक से अधिक संतान नहीं चाहते

कार्यक्रम में संस्थान के डीन डॉ. देवाशीष दत्त ने बताया कि कभी बंगाल के अधिकांश परिवारों में दो या उससे अधिक बच्चे होना सामान्य बात थी, लेकिन अब शहर ही नहीं, ग्रामीण इलाकों में भी अधिकांश दंपति एक से अधिक संतान नहीं चाहते। वहीं नई पीढ़ी के कई दंपति तो संतान पैदा करने से भी बच रहे हैं।

World Population Day: Fertility rate falling rapidly in Bengal; risk of becoming an 'aging state'?

विशेषज्ञों ने बताया कि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) के आंकड़ों के अनुसार देश के कई हिस्सों की तुलना में पश्चिम बंगाल की प्रजनन दर काफी कम है। इससे राज्य में भविष्य में वृद्ध आबादी बढ़ने और कार्यशील आयु वर्ग के घटने की आशंका जताई जा रही है।

आर्थिक असुरक्षा सबसे बड़ी वजह

विशेषज्ञों के मुताबिक, संतान न पैदा करने के पीछे सबसे बड़ा कारण आर्थिक असुरक्षा है। अध्ययन में सामने आया कि करीब 88% दंपतियों ने बढ़ती महंगाई, रोजगार की अनिश्चितता और बच्चों की परवरिश पर बढ़ते खर्च को परिवार बढ़ाने से पीछे हटने का प्रमुख कारण बताया।

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वैश्विक स्तर पर भी संयुक्त राष्ट्र और अन्य संस्थाओं की रिपोर्टों में बढ़ती जीवन-यापन लागत और आर्थिक दबाव को घटती जन्मदर का अहम कारण माना गया है।

World Population Day: Fertility rate falling rapidly in Bengal; risk of becoming an 'aging state'?

रोजगार और पलायन भी चिंता का विषय

प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग की विशेषज्ञ प्रो. सुहृता साहा के अनुसार, पश्चिम बंगाल से युवाओं का रोजगार और उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों तथा विदेशों की ओर पलायन भी जनसंख्या संरचना को प्रभावित कर रहा है।

इससे राज्य में युवा आबादी का अनुपात घटने और वृद्ध आबादी बढ़ने की संभावना मजबूत हो रही है।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि बच्चे की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य पर बढ़ता खर्च आज के युवा दंपतियों को माता-पिता बनने के फैसले पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर रहा है।

वैश्विक स्तर पर भी घट रही जन्मदर

विशेषज्ञों ने बताया कि केवल पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि यूरोप और अमेरिका के कई देशों में भी प्रजनन दर लगातार गिर रही है।

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नॉर्वे, स्वीडन और डेनमार्क जैसे देशों में भी जन्मदर लंबे समय से प्रतिस्थापन स्तर (Replacement Level) से नीचे बनी हुई है।

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