Bengal Pesticides are damaging farmers' memory and mental health.

बंगाल : कीटनाशकों की वजह से किसानों का मानसिक स्वास्थ्य हो रहा खराब

कोलकाता | 27 नवंबर 2025 : पश्चिम बंगाल के बुजुर्ग किसानों पर कीटनाशकों का दीर्घकालिक असर अब गंभीर रूप से सामने आ रहा है। इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित एक अध्ययन बताता है कि लगातार रसायनों के संपर्क में रहने से उनकी याददाश्त कमजोर हो रही है, अवसाद और न्यूरोलॉजिकल समस्याएँ बढ़ रही हैं

🌟 अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष

  • अध्ययन कोलकाता स्थित ICMR–Centre for Ageing and Mental Health, बंगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज, सागर दत्ता अस्पताल और इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर** के विशेषज्ञों ने किया।
  • शोध पूर्वी बर्धमान जिले के गलसी II ब्लॉक में हुआ, जो बंगाल की ग्रामीण जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करता है।
  • प्रदेश में लगभग 69% लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं और कृषि आजीविका का मुख्य स्रोत है।
  • 50 वर्ष और उससे अधिक आयु के 808 निवासियों की स्क्रीनिंग की गई।
  • 180 प्रतिभागियों में संज्ञानात्मक समस्याएँ, अवसाद या संभावित गति संबंधी विकारों के लक्षण पाए गए।

West Bengal Farmers Pesticide Mental Health  
ICMR Study Elderly Farmers Bengal  
Indian Journal Medical Research Pesticide Exposure  
Bengal Farmers Memory Loss Depression  
Purba Bardhaman Farmers Health Study  
Rural India Pesticide Cognitive Impairment  
West Bengal Agriculture Mental Health Crisis  
ICMR Centre Ageing Mental Health Study  
Pesticide Neurological Disorders Rural India  
Bengal Farmers Organic Farming Solutions

यह अध्ययन कोलकाता स्थित आईसीएमआर-सेंटर फॉर एजिंग एंड मेंटल हेल्थ, बंगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज, सागर दत्ता अस्पताल और इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर के विशेषज्ञों द्वारा किया गया।

चूंकि रासायनिक-गहन खेती अभी भी सामान्य है, इसलिए अध्ययन के लेखकों ने चेतावनी दी है कि तत्काल निवारक कार्रवाई के बिना, तंत्रिका संबंधी (neurological) और मानसिक स्वास्थ्य विकारों का छिपा हुआ बोझ तेजी से बढ़ सकता है।

🧠 याददाश्त और सोचने की क्षमता पर असर

  • संज्ञानात्मक दुर्बलता में याददाश्त, तर्क, ध्यान और सोचने की क्षमता में कठिनाइयाँ शामिल थीं।
  • 12.5% प्रतिभागियों में केवल संज्ञानात्मक दुर्बलता पाई गई।
  • यह आंकड़ा दक्षिणी और उत्तरी भारत के शहरी बुजुर्गों पर किए गए अध्ययनों से अधिक है।
  • पूर्वी भारत के शहरी वयस्कों पर किए गए अध्ययन में हल्की संज्ञानात्मक दुर्बलता 14.9% बताई गई थी, जो दर्शाता है कि ग्रामीण आबादी भी समान रूप से, या शायद अधिक, असुरक्षित है।

West Bengal Farmers Pesticide Mental Health  
ICMR Study Elderly Farmers Bengal  
Indian Journal Medical Research Pesticide Exposure  
Bengal Farmers Memory Loss Depression  
Purba Bardhaman Farmers Health Study  
Rural India Pesticide Cognitive Impairment  
West Bengal Agriculture Mental Health Crisis  
ICMR Centre Ageing Mental Health Study  
Pesticide Neurological Disorders Rural India  
Bengal Farmers Organic Farming Solutions

 

संज्ञानात्मक दुर्बलता में याददाश्त, तर्क, ध्यान और समग्र सोचने की क्षमता में कठिनाइयाँ शामिल थीं। खासतौर से, 12.5% प्रतिभागियों में केवल संज्ञानात्मक दुर्बलता थी। यह आंकड़ा दक्षिणी और उत्तरी भारत के शहरी बुजुर्गों पर किए गए कई अध्ययनों की तुलना में अधिक है।

पूर्वी भारत के शहरी वयस्कों पर इसी उपकरण का उपयोग करके किए गए एक अध्ययन में हल्की संज्ञानात्मक दुर्बलता 14.9% बताई गई थी, जो दर्शाता है कि ग्रामीण आबादी भी समान रूप से, या शायद अधिक, असुरक्षित हो सकती है।

⚖️ शोधकर्ताओं की चेतावनी

  • रासायनिक-गहन खेती अभी भी सामान्य है।
  • सुरक्षा उपायों की कमी से तंत्रिका संबंधी और मानसिक स्वास्थ्य विकारों का छिपा हुआ बोझ तेजी से बढ़ सकता है।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि तत्काल निवारक कार्रवाई जरूरी है, वरना आने वाले वर्षों में ग्रामीण समाज में मानसिक रोगों का बोझ और बढ़ेगा।

West Bengal Farmers Pesticide Mental Health  
ICMR Study Elderly Farmers Bengal  
Indian Journal Medical Research Pesticide Exposure  
Bengal Farmers Memory Loss Depression  
Purba Bardhaman Farmers Health Study  
Rural India Pesticide Cognitive Impairment  
West Bengal Agriculture Mental Health Crisis  
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अध्ययन में पाया गया कि कीटनाशकों के संपर्क का जोखिम पर महत्वपूर्ण असर पड़ता है। नियमित रूप से कीटनाशकों का उपयोग करने वाले लोगों में तंत्रिका संबंधी या मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ विकसित होने की संभावना लगभग तीन गुना अधिक थी।

जोखिम उन लोगों में और भी बढ़ गया जो 30 साल से अधिक समय तक इन रसायनों के संपर्क में रहे थे या जो सप्ताह में कम से कम एक बार कीटनाशकों का छिड़काव करते थे।

केवल कृषि कार्य में लगे किसानों में याददाश्त के स्कोर सबसे खराब थे, उन्हें रोजमर्रा की गतिविधियों में अधिक कठिनाई होती थी और उनमें अवसाद का स्तर भी अधिक था।

🟥 निष्कर्ष

यह अध्ययन ग्रामीण भारत के लिए एक चेतावनी है। बुजुर्ग किसानों में कीटनाशकों का असर सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा पड़ रहा है।अगर अभी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में स्मृति ह्रास और मानसिक रोगों का संकट ग्रामीण समाज को और कमजोर कर देगा।

एम्स (AIIMS) के न्यूरोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. मंजरी त्रिपाठी ने कहा कि निष्कर्ष स्थापित वैज्ञानिक साक्ष्यों के अनुरूप हैं।

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ICMR Study Elderly Farmers Bengal  
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Bengal Farmers Memory Loss Depression  
Purba Bardhaman Farmers Health Study  
Rural India Pesticide Cognitive Impairment  
West Bengal Agriculture Mental Health Crisis  
ICMR Centre Ageing Mental Health Study  
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उन्होंने बताया कि कीटनाशकों का संबंध लंबे समय से पार्किंसंस रोग (Parkinson’s disease), अल्जाइमर डिमेंशिया (Alzheimer’s dementia) और संबंधित विकारों जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव स्थितियों से रहा है।

उन्होंने कहा, “जोखिम के लिए संपर्क की मात्रा और अवधि दोनों ही महत्वपूर्ण कारक हैं। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि तत्काल नीतिगत ध्यान के बिना, भारत के ग्रामीण बुजुर्गों को दशकों से अनियंत्रित कीटनाशक उपयोग से जुड़ी याददाश्त कम होने, अवसाद और विकलांगता के बढ़ते बोझ का सामना करना पड़ सकता है।

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