कोलकाता न्यूज डेस्क | 07 अप्रैल 2026: पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत घर-घर LPG कनेक्शन पहुंचाने वाली केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अब चुनावी मुद्दा बन गई है।
राज्य में इस योजना के कम से कम 1 करोड़ 24 लाख लाभार्थी हैं, जिसके चलते बंगाल देश में दूसरे नंबर पर है। लेकिन पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में चल रहे संघर्ष (अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध) के कारण LPG सप्लाई प्रभावित होने से सिलेंडर की कमी और ब्लैक मार्केटिंग की शिकायतें बढ़ गई हैं।
23 और 29 अप्रैल 2026 को दो चरणों में होने वाले विधानसभा चुनावों के दौरान यह मुद्दा गरमा गया है। मतदाता, खासकर महिलाएं, बीजेपी उम्मीदवारों से LPG सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। वहीं सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) केंद्र सरकार और बीजेपी पर हमला बोल रही है।
उज्ज्वला योजना: महिलाओं का बड़ा वोट बैंक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2016 में शुरू की गई उज्ज्वला योजना के तहत गरीब परिवारों की महिलाओं को मुफ्त LPG कनेक्शन दिए जाते हैं। बंगाल में इस योजना ने लाखों महिलाओं को लकड़ी-कोयले से मुक्ति दिलाई।
लेकिन मौजूदा संकट में कई उज्ज्वला लाभार्थी सिलेंडर रिफिल नहीं करवा पा रही हैं और पुरानी प्रथा — लकड़ी पर खाना पकाना — की ओर लौट रही हैं।
महिलाएं बंगाल चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाती हैं। 2011 से हर विधानसभा चुनाव में महिलाओं का वोटर टर्नआउट पुरुषों से बराबर या ज्यादा रहा है। 2021 में महिला टर्नआउट 81.74% रहा, जबकि पुरुषों का 81.41%।
चुनाव प्रचार में LPG संकट छाया
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव प्रचार के दौरान वोटर गैस सिलेंडर की कमी को लेकर सवाल उठा रहे हैं। बीजेपी उम्मीदवार सफाई दे रहे हैं कि समस्या पश्चिम एशिया के युद्ध से उत्पन्न हुई है, न कि केंद्र सरकार की कोई कमी से।
- शीतलकुची (कूच बिहार): अनुसूचित जाति आरक्षित सीट से बीजेपी उम्मीदवार सबित्री बर्मन ने बताया कि सभा में लोगों ने सिलेंडर रिफिल की परेशानी बताई। उन्होंने वोटरों को समझाया कि यह युद्ध का असर है। सबित्री का दावा है कि जनता बीजेपी के प्रति पॉजिटिव है और पार्टी को सत्ता में लाना चाहती है।
- कुमारग्राम (अलीपुरदुआर): बीजेपी उम्मीदवार मनोज उरांव ने TMC पर आरोप लगाया कि वे इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रही हैं। उनके अनुसार, जमीनी स्तर पर LPG कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। लेकिन TMC उम्मीदवार राजीव तिर्की ने कहा कि लोग खुद LPG की कमी की शिकायत कर रहे हैं। वे वोटरों को बताते हैं कि सप्लाई केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है।
- तूफानगंज: बीजेपी उम्मीदवार मालती रावा रॉय ने माना कि उनके क्षेत्र में LPG कमी एक मुद्दा है। TMC के शिबशंकर पॉल (पूर्व क्रिकेटर) ने कहा कि गांवों में महिलाएं महंगे सिलेंडर नहीं खरीद पा रही हैं और लकड़ी पर खाना बना रही हैं। इसका चुनाव परिणाम पर असर पड़ेगा।
सीपीआई(M) भी दोनों पार्टियों पर हमला बोल रही है। नटाबारी से उनके उम्मीदवार हाइक हसन ने कालाबाजारी का आरोप लगाया और पुराने CPI(M) शासन की याद दिलाई।
TMC का हमला, ममता का विरोध मार्च
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने LPG संकट को लपक लिया। कोलकाता में विरोध मार्च निकाला और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के पास स्थिति से निपटने की कोई योजना नहीं है। TMC इसे केंद्र की “विफल विदेश नीति” और खराब प्लानिंग से जोड़ रही है।
बीजेपी उम्मीदवारों का कहना है कि वोटर समस्या समझ रहे हैं और बीजेपी के अन्य वादों (विकास, कल्याण योजनाएं) पर फोकस कर रहे हैं।
संकट की पृष्ठभूमि
- पिछले महीने से LPG सिलेंडर सप्लाई में कमी की खबरें आ रही हैं।
- भारत LPG का बड़ा आयातक है और अधिकांश आयात मध्य पूर्व से, खासकर हORMुज स्ट्रेट के रास्ते होता है।
- युद्ध के कारण आयात प्रभावित हुआ, जिससे घरेलू सप्लाई पर दबाव बढ़ा।
- सरकार ने घरेलू LPG को प्राथमिकता दी है, लेकिन व्यावसायिक उपयोग पर पाबंदी और कुछ क्षेत्रों में देरी की शिकायतें हैं।
- कुछ जगहों पर ब्लैक मार्केटिंग और ऊंची कीमतों की रिपोर्ट्स आई हैं।
नोट: केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू LPG की सप्लाई में कोई बड़ा संकट नहीं है और स्थिति सुधर रही है। लेकिन चुनावी मौसम में यह मुद्दा स्थानीय स्तर पर गूंज रहा है, खासकर उज्ज्वला लाभार्थी महिलाओं के बीच।
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