कोलकाता | 27 नवंबर 2025 : पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के दौरान चुनाव आयोग ने बड़ा खुलासा किया है। आयोग ने बताया कि अब तक 28 लाख वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।
🌟 चुनाव आयोग की वजहें
- हटाए गए नामों में शामिल हैं:
- मृत मतदाता
- डुप्लीकेट नाम
- स्थायी रूप से स्थानांतरित लोग
- अनुपस्थित मतदाता
- आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए की जा रही है।
इसको लेकर विवाद भी देखने को मिल रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ इस काम करने वाले BLO की मौत के मामले भी सामने आ रहे हैं. बीते दिन इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी हुई. अब पश्चिम बंगाल में चल रही एसआईआर में 28 लाख लोगों के नाम काट दिए गए हैं.
⚖️ राजनीतिक विवाद
- विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।
- मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में कहा था कि SIR अभियान से 35 लोगों की मौत हो चुकी है।
- भाजपा का दावा है कि यह कदम फर्जी वोटरों को हटाने के लिए जरूरी है।
पश्चिम बंगाल (West Bengal) में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का काम जारी है. वोटर फॉर्म के 78% डिजिटाइज़ेशन हो चुका है. अभी भी 22 प्रतिशत डिजिटाइज़ेशन बचा हुआ है.

इसके बाद अब तक 28 लाख लोगों के नाम काट दिए गए हैं. इन 28 लाख में से 9 लाख वोटर मर चुके हैं. इसके अलावा बाकी बचे हुए लोगों लापता हैं. यही वजह है कि इनके नाम काट दिए गए हैं.
🌍 प्रशासनिक स्थिति
- राज्य में 80,600 BLOs और हजारों सुपरवाइजर्स इस अभियान में लगे हैं।
- आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को 2026 विधानसभा चुनाव से पहले पूरी तरह अपडेट कर लिया जाएगा।
चुनाव आयोग के अधिकारी की तरफ से बताया गया कि पश्चिम बंगाल की मौजूदा वोटर लिस्ट में करीब 26 लाख वोटर्स के नाम 2002 की वोटर लिस्ट से मैच नहीं कर रहे हैं.
यह अंतर तब सामने आया जब राज्य की लेटेस्ट वोटर लिस्ट की तुलना पिछले SIR एक्सरसाइज के दौरान 2002 और 2006 के बीच अलग-अलग राज्यों में तैयार की गई लिस्ट से की गई.
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