कोलकाता, 7 जनवरी 2026: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग ने अब राज्य सरकार के कर्मचारियों पर सख्ती बरती है।
भारत निर्वाचन आयोग (EIC) ने सभी 10 लाख राज्य सरकारी कर्मचारियों से यह घोषणा मांगी है कि वे डबल वोटर (दो स्थानों पर पंजीकृत मतदाता) नहीं हैं।
क्या मांगा गया है?
चुनाव आयोग द्वारा जारी निर्धारित प्रपत्र में प्रत्येक कर्मचारी को निम्नलिखित जानकारी देनी होगी:

- वे पश्चिम बंगाल में मतदाता के रूप में अपनी वर्तमान स्थिति का विवरण
- क्या उनका नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज है?
- यदि निवास स्थान में बदलाव हुआ है, तो मतदान स्थल में बदलाव की जानकारी
- यदि एक ही स्थान पर नाम दो बार दर्ज है, तो क्या उन्होंने पहले किसी एक स्थान से नाम हटवाने के लिए आवेदन किया था?
आयोग का उद्देश्य
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के एक सूत्र ने बताया: “इस घोषणापत्र को मांगकर आयोग राज्य सरकार के कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना चाहता है ताकि कोई भी कर्मचारी दो बार मतदाता न बने। यदि कोई कर्मचारी गलत जानकारी देता है, तो आयोग संबंधित कर्मचारी के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई कर सकता है।”
कर्मचारियों की जिम्मेदारी
यदि किसी कर्मचारी का नाम दो स्थानों पर दर्ज है, तो यह उनकी जिम्मेदारी होगी कि वे संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से संपर्क करें और अपना नाम एक स्थान से हटवाएं। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह कदम चुनावी शुचिता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
- TMC: इसे “सरकारी कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव” बताया। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि यह “राजनीतिक प्रतिशोध” का हिस्सा है।
- BJP: इसे “चुनावी पारदर्शिता” की दिशा में जरूरी कदम बताया। सुकांत मजूमदार ने कहा कि “डबल वोटर रोकना लोकतंत्र की रक्षा है।”
SIR की ताजा स्थिति
- ड्राफ्ट रोल में 58.20 लाख नाम हटाए गए।
- फाइनल मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित होगी।
- कर्मचारियों के अलावा कई अन्य वर्गों (बुजुर्ग, दिव्यांग) को भी नोटिस मिले हैं।
यह कदम SIR विवाद को और गहरा कर सकता है, क्योंकि 2026 विधानसभा चुनाव नजदीक हैं।
मतदाता सूची की शुचिता पर आयोग का फोकस
चुनाव आयोग का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब देशभर में मतदाता सूची को लेकर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) चल रहा है। पश्चिम बंगाल में भी आयोग मतदाता सूची को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है, ताकि डुप्लीकेट वोटिंग, फर्जी नाम और अनियमितताओं पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।
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