कोलकाता | 21 नवंबर 2025 : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियों के बीच निर्वाचन आयोग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए घोषणा की है कि 21 नवंबर 2025 से राज्यभर में EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) की फ़र्स्ट लेवल चेकिंग (FLC) शुरू कर दी जाएगी।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस पूरी प्रक्रिया में सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की उपस्थिति अनिवार्य होगी, ताकि पारदर्शिता और भरोसे को मजबूत किया जा सके।
क्या है FLC?
निर्वाचन आयोग हर चुनाव से पहले EVM और VVPAT की तकनीकी जांच करता है। इसे फ़र्स्ट लेवल चेकिंग (First Level Checking – FLC) कहा जाता है। इसमें—

- बैलट यूनिट और कंट्रोल यूनिट की टेक्निकल टेस्टिंग
- VVPAT की स्लिप प्रिंटिंग की जांच
- किसी भी खराब मशीन का तुरंत रिप्लेसमेंट
- सभी यूनिट्स का सील और सुरक्षित भंडारण
- जांच प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग शामिल होती है।
इस बार आयोग ने विशेष रूप से राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को जांच स्थल पर मौजूद रहने का निर्देश दिया है।
क्यों ज़रूरी है राजनीतिक दलों की मौजूदगी?
EVM की विश्वसनीयता को लेकर उठने वाली शंकाओं को कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आयोग ने कहा है कि—
- प्रतिनिधि लाइव टेस्टिंग देख सकेंगे
- मशीनों में डाले गए मॉक वोट का मिलान करेंगे
- किसी गड़बड़ी पर तुरंत आपत्ति दर्ज कर सकेंगे
- वीडियो रिकॉर्डिंग से प्रक्रिया पूरी तरह ऑडिटेबल रहेगी
चुनाव आयोग की सख़्ती: सुरक्षा और मॉनिटरिंग बढ़ी
निर्वाचन आयोग ने मशीनों की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए हैं—
- EVM मूवमेंट की GPS ट्रैकिंग
- वेयरहाउस में 24×7 CCTV मॉनिटरिंग
- हर जिले में स्पेशल ऑब्जर्वर
- मशीनों के पास अनधिकृत प्रवेश पर सख़्त रोक
जांच पूरा होने के बाद ही मशीनों को Strong Room में सील कर रखा जाएगा।
राज्य में कुल कितनी मशीनें जांची जाएंगी?
पश्चिम बंगाल में चुनाव के लिए हजारों EVM और VVPAT तैयार की जा रही हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह जांच प्रक्रिया 2–3 सप्ताह तक चलेगी और सभी जिलों में चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी।
- Quick Info Box
घोषणा: 21 नवंबर 2025 से EVM जांच शुरू
प्रक्रिया: First Level Checking (FLC)
निगरानी: CCTV + GPS + Political Parties
जिम्मेदार प्राधिकरण: निर्वाचन आयोग
उद्देश्य: पारदर्शिता और तकनीकी सुरक्षा सुनिश्चित करना
जनता के लिए इसका क्या अर्थ है?
EVM जांच से यह सुनिश्चित होता है कि—
- चुनाव निष्पक्ष और तकनीकी रूप से सुरक्षित हों
- मशीनों में त्रुटि की संभावना लगभग शून्य रहे
- मतदाताओं का विश्वास बढ़े
- चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे
आयोग का दावा है कि इस बार पिछले चुनावों की तुलना में सुरक्षा और मॉनिटरिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
⚖️ पृष्ठभूमि
- बंगाल में EVM को लेकर पहले भी राजनीतिक विवाद रहे हैं।
- विपक्षी दलों ने कई बार EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं।
- इस बार आयोग ने सभी दलों को शामिल कर सहमति और भरोसा बढ़ाने की कोशिश की है।
ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च कर, फॉलो करें।




