कोलकाता हिन्दी न्यूज | 29 सितम्बर 2026: दुर्गापूजा से पहले पश्चिम बंगाल में डेंगू के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में इस साल अब तक डेंगू संक्रमितों की संख्या 7,320 तक पहुंच गई है।
इनमें से 2,500 से अधिक मामले पिछले दो सप्ताह में सामने आए हैं। राज्य में सबसे अधिक संक्रमण मुर्शिदाबाद जिले में दर्ज किया गया है। इसके बाद कोलकाता, नदिया और उत्तर 24 परगना का स्थान है।
दक्षिण बंगाल के जिलों में रोजाना औसतन सौ से अधिक नए संक्रमित मिलने की खबर है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, कोलकाता समेत दक्षिण बंगाल में अगले कुछ दिनों में भारी बारिश की संभावना नहीं है। ऐसे में प्रशासन को आशंका है कि पहले से जमा पानी मच्छरों के प्रजनन का कारण बन सकता है।
अक्टूबर-नवंबर को उच्च जोखिम अवधि मानकर सतर्कता
लगातार बारिश के बाद निर्माणाधीन दुर्गापूजा पंडालों और उनके आसपास जमा पानी को लेकर स्वास्थ्य विभाग चिंतित है। आशंका है कि पंडालों के बांस के ढांचे, गड्ढों और आसपास रखी सामग्री में जमा पानी मच्छरों के पनपने की जगह बन सकता है।
इसी स्थिति को देखते हुए सोमवार को नवान्न में मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल ने जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक की।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, उन्होंने डेंगू नियंत्रण में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करने की बात कही। अक्टूबर और नवंबर को ‘हाई-रिस्क पीरियड’ मानते हुए जिलों को निगरानी और रोकथाम के उपाय तेज करने को कहा गया है।
सरकारी अस्पतालों के लिए अतिरिक्त राशि
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखोपाध्याय ने लोगों से अपील की है कि डेंगू जैसे लक्षण दिखाई देने पर सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में जांच और उपचार के लिए पहुंचें। उन्होंने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त उपचार उपलब्ध है।
समाचार स्रोतों के मुताबिक, डेंगू से निपटने के लिए सरकारी अस्पतालों को अतिरिक्त 1 करोड़ 23 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं।
पंडालों की निगरानी के लिए विशेष मॉनिटरिंग सेल
कोलकाता नगर निगम ने दुर्गापूजा पंडालों और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी के लिए विशेष मॉनिटरिंग सेल बनाया है। नगर आयुक्त स्मिता पांडे के नेतृत्व में यह सेल शहर के पंडालों का नियमित निरीक्षण करेगा।
नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की चिंता है कि कई जगह पंडाल निर्माण का काम तेजी से चल रहा है और कुछ पंडालों या उनके आसपास पानी जमा होने लगा है। निगम सफाई, जन-जागरूकता और मच्छरों के लार्वा नष्ट करने के काम पर अतिरिक्त ध्यान दे रहा है।
पंडालों में जलजमाव की आशंका को लेकर पहले भी चिंता जताई गई है। हालिया रिपोर्टों में बांस की संरचनाओं, गड्ढों और फेंके गए कप-प्लेट जैसे सामान में पानी जमा होने की बात सामने आई है।
पूजा की भीड़ में सफाई पर भी जोर
जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ अभिदीप्त हाजरा के मुताबिक, बरसात के बाद डेंगू संक्रमण बढ़ने की आशंका रहती है। दुर्गापूजा के दौरान पंडालों और खाद्य स्टॉलों पर भीड़ बढ़ने के साथ इस्तेमाल किए गए थर्मोकोल के प्लेट, गिलास और चाय के कप सड़कों पर जमा हो सकते हैं।
उन्होंने ऐसे सामान को शीघ्र हटाने और कहीं भी पानी जमा न होने देने पर जोर दिया।
प्रशासन का कहना है कि पिछले वर्ष की तुलना में संक्रमण कम होने के बावजूद लापरवाही की गुंजाइश नहीं है। स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम पंडालों की सफाई, जलजमाव रोकने और मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करने के लिए निगरानी बढ़ा रहे हैं।
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