कोलकाता न्यूज डेस्क | 09 जून 2026: पश्चिम बंगाल में महंगाई भत्ता (DA) बकाया भुगतान को लेकर आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकारी कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों के एक हिस्से को बकाया डीए की राशि मिल चुकी है, लेकिन सरकार-पोषित संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों और उनके सेवानिवृत्त साथियों को अब तक कोई भुगतान नहीं मिला है।
इसी मुद्दे पर संग्रामी संयुक्त मंच (Sangrami Joutha Mancha) ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल को पत्र भेजकर तत्काल बकाया डीए जारी करने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं मिला लाभ
केंद्र के समान दर पर डीए की मांग को लेकर राज्य सरकारी कर्मचारी लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था, जहां अदालत ने बकाया डीए भुगतान का निर्देश दिया था।
हालांकि तत्कालीन राज्य सरकार ने अदालत में राज्य की वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए समय मांगा था। बाद में वर्ष 2016 से 2029 तक के बकाया डीए का 25 प्रतिशत दो किस्तों में भुगतान करने का प्रस्ताव सामने आया।
इस फैसले के तहत कई सरकारी कर्मचारियों और कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारियों के खातों में राशि पहुंच चुकी है। लेकिन स्कूलों, कॉलेजों, नगरपालिकाओं और अन्य सरकार-पोषित संस्थानों के वर्तमान एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अब तक भुगतान नहीं मिला है।
मुख्यमंत्री के साथ हुई थी महत्वपूर्ण बैठक
पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने संघर्षामी संयुक्त मंच के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। बैठक के बाद मंच के संयोजक भास्कर घोष ने कहा था कि संगठन मुख्यमंत्री के रुख से संतुष्ट है।
उनके अनुसार मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरी तरह पालन करने और बकाया डीए के 25 प्रतिशत भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया था। साथ ही उन्होंने मुख्य सचिव और वित्त सचिव को इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश भी दिए थे।
भास्कर घोष ने यह भी बताया था कि एरियर भुगतान के प्रतिशत को लेकर कुछ मतभेद बने हुए हैं, जिन पर आगे और चर्चा करने का आश्वासन दिया गया था।
तत्काल कार्रवाई की मांग
मुख्यमंत्री के साथ बैठक के लगभग एक सप्ताह बाद संघर्षामी संयुक्त मंच ने फिर से पत्र भेजकर अपनी मांग दोहराई है।
मंच का कहना है कि जिन कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को अभी तक बकाया डीए नहीं मिला है, उन्हें शीघ्र भुगतान करने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दी है।
संगठन ने सरकार से आग्रह किया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और मुख्यमंत्री के आश्वासन के अनुरूप सरकार-पोषित संस्थानों के सभी पात्र कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों का बकाया डीए बिना किसी और देरी के जारी किया जाए।
कर्मचारियों की निगाहें सरकार पर
डीए आंदोलन लंबे समय से पश्चिम बंगाल की प्रशासनिक और राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय रहा है। ऐसे में संघर्षामी संयुक्त मंच के इस नए पत्र के बाद अब कर्मचारियों की निगाहें राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
यदि शीघ्र भुगतान नहीं होता है, तो आंदोलन और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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