कोलकाता हिन्दी न्यूज | 15 सितम्बर 2026: पश्चिम बंगाल में दुर्गापूजा के बाद बस यात्रियों को अधिक किराया देना पड़ सकता है। राज्य सरकार सरकारी, निजी और लंबी दूरी की बसों समेत विभिन्न श्रेणियों के बस किराये में बढ़ोतरी पर विचार कर रही है।
सोमवार को निजी बस मालिकों के साथ बैठक के बाद परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह ने संकेत दिया कि पूजा से पहले किराया बढ़ाने का कोई फैसला नहीं होगा, लेकिन पूजा के बाद इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी।
बैठक के बाद मंत्री ने कहा कि बस किराया बढ़ना चाहिए, क्योंकि वर्ष 2018 से किराये में कोई आधिकारिक बदलाव नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि हमेशा किराया स्थिर रखना व्यावहारिक नहीं है। सरकार का उद्देश्य यात्रियों पर अचानक बोझ डालना नहीं, बल्कि बस मालिकों की समस्याओं और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की जरूरतों को ध्यान में रखकर निर्णय लेना है।
निजी बस किराया बढ़ाने पर पूजा के बाद होगी चर्चा
परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा, “पूजा से पहले इस संबंध में कुछ नहीं होगा। हालांकि पूजा के बाद निजी बसों के किराये में बढ़ोतरी को लेकर फैसला हो सकता है। इस विषय पर हम चर्चा करेंगे।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किराया बढ़ाने के साथ निजी बसों की सेवा गुणवत्ता में सुधार करना होगा। यात्रियों को बेहतर सुविधा, नियमित सेवा और उचित व्यवहार सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जाएगा।
वाम सरकार पर अर्जुन सिंह का निशाना
बस किराये के मुद्दे पर मंत्री ने पूर्ववर्ती वाम मोर्चा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय नेता निजी वाहनों से यात्रा करते थे, लेकिन बस किराये में बढ़ोतरी नहीं की जाती थी। इसके कारण बसों की संख्या और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई।
अर्जुन सिंह ने कहा कि वर्तमान सरकार का उद्देश्य आम लोगों के लिए अधिक बसें उपलब्ध कराना है। उन्होंने संकेत दिया कि किराये और संचालन व्यवस्था में बदलाव का मकसद सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना होगा।
बस मालिकों ने बैठक को बताया सकारात्मक
परिवहन मंत्री के साथ हुई बैठक से निजी बस मालिक भी संतुष्ट नजर आए। सारा बंगाल बस-मिनिबस समन्वय समिति के महासचिव राहुल चट्टोपाध्याय ने कहा कि मंत्री के साथ सकारात्मक बातचीत हुई और बस मालिक बैठक के परिणाम से खुश हैं।
बस मालिक लंबे समय से बढ़ती परिचालन लागत, कर, टोल और रखरखाव खर्च का हवाला देते हुए किराया संशोधन की मांग करते रहे हैं।
2018 में आखिरी बार आधिकारिक रूप से बढ़ा था किराया
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में राज्य में आखिरी बार बस किराये की आधिकारिक सूची में संशोधन किया गया था। उस समय न्यूनतम बस किराया 7 रुपये निर्धारित था। हालांकि, कोविड महामारी के बाद कई मार्गों पर न्यूनतम किराया बढ़ाकर 10 रुपये वसूला जाने लगा।
बताया जा रहा है कि इस बढ़ोतरी को लेकर कोई स्पष्ट सरकारी अधिसूचना जारी नहीं हुई थी। ऐसे में यदि नया किराया तय किया जाता है तो सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि न्यूनतम बस किराया कितना निर्धारित किया जाएगा।
सभी टोल प्लाजा के लिए समान दर तय करने की तैयारी
बैठक में बस मालिकों की टोल संबंधी शिकायतों पर भी चर्चा हुई। बस मालिकों का आरोप था कि एक ही जिले में अलग-अलग टोल प्लाजा पर अलग-अलग दरें वसूली जा रही हैं।
परिवहन मंत्री ने राज्य में सभी टोल प्लाजा के लिए एक समान दर निर्धारित करने की इच्छा जताई है। इस संबंध में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को छह दिनों के भीतर आवश्यक जानकारी और कार्रवाई की दिशा स्पष्ट करने को कहा गया है। मंत्री ने संकेत दिया कि टोल व्यवस्था में ओडिशा की तरह एकरूपता लाने पर विचार किया जा रहा है।
मुख्य सड़कों पर टोटो परिचालन बंद करने की तैयारी
अर्जुन सिंह ने मुख्य सड़कों पर टोटो के परिचालन को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बड़े और प्रमुख मार्गों पर टोटो चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
मंत्री के अनुसार, टोटो परिचालन को लेकर लगातार समस्याएं सामने आ रही हैं और इसके लिए एक समान नियम तथा व्यवस्थित नीति बनाना जरूरी है। इससे बसों के संचालन और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
नाइट पार्किंग की समस्या का समाधान
बस मालिकों की लंबे समय से चली आ रही नाइट पार्किंग संबंधी समस्या पर भी बैठक में समाधान निकाले जाने की जानकारी दी गई। बस मालिकों ने रात में बस खड़ी करने के लिए पर्याप्त स्थान और स्थानीय स्तर पर अनुमति की समस्या उठाई थी।
सरकार की ओर से इस मुद्दे पर आवश्यक सहयोग देने का आश्वासन दिया गया है।
पुराने टैक्स बकाये पर पेनल्टी में राहत का संकेत
जिन बस मालिकों पर लंबे समय से टैक्स बकाया है, उन्हें भी राहत मिल सकती है। परिवहन मंत्री ने संकेत दिया कि निर्धारित टैक्स के साथ जमा की जाने वाली पेनल्टी में कुछ छूट या आंशिक माफी पर विचार किया जा सकता है।
हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय और शर्तें अभी स्पष्ट नहीं की गई हैं। यदि सरकार यह राहत देती है तो लंबे समय से वित्तीय दबाव झेल रहे बस मालिकों को बड़ी मदद मिल सकती है।
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