कोलकाता हिन्दी न्यूज | 20 जुलाई 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा में जनहित के मुद्दों के समाधान को तेज़ और जवाबदेह बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक घोषणा की है।
सोमवार को सदन में उन्होंने कहा कि अब विधायक जिस भी जनसमस्या या विकास कार्य का मुद्दा विधानसभा में उठाएंगे, उस पर संबंधित विभाग को निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्रवाई करनी होगी या कारण सहित जवाब देना होगा।
मुख्यमंत्री के इस फैसले को विधानसभा की कार्यप्रणाली में बड़ा सुधार माना जा रहा है। खास बात यह रही कि सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेदों के बावजूद इस पहल की सराहना तृणमूल विधायक फिरहाद हाकिम ने भी की।
मुख्यमंत्री ने क्या घोषणा की?
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में कहा कि ‘उल्लेख काल’ (Mention Period) के दौरान विधायकों द्वारा उठाई गई सभी मांगों और समस्याओं को विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश पर 7 दिनों के भीतर संबंधित विभागों को भेजा जाएगा।
इसके बाद संबंधित विभाग को भी अगले 7 दिनों के भीतर निम्न में से कोई एक कदम उठाना होगा—
- विधायक द्वारा उठाई गई मांग पर कार्रवाई करना।
- यदि तत्काल कार्रवाई संभव नहीं है तो उसका स्पष्ट कारण बताना।
- यदि परियोजना में देरी होगी तो देरी की वजह और संभावित समयसीमा की जानकारी देना।
- संबंधित विधायक या विधानसभा सचिवालय को लिखित रूप से पूरी स्थिति से अवगत कराना।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसके परिणाम भी सामने आने चाहिए।
CMO भी करेगा निगरानी
मुख्यमंत्री ने विधानसभा सचिवालय को निर्देश दिया कि विधायकों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों की सूची मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को भी भेजी जाए।
मुख्यमंत्री के निजी सचिव इन मामलों की नियमित समीक्षा करेंगे और हर तीन महीने में अनुपालन (Compliance Report) प्रस्तुत करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा, “विधानसभा जनता की समस्याओं के समाधान का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक मंच है। यहां उठने वाले हर मुद्दे पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।”
फिरहाद हाकिम ने बताया ‘ऐतिहासिक फैसला’
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद तृणमूल विधायक फिरहाद हाकिम ने इस पहल की खुलकर प्रशंसा की।
उन्होंने कहा, “मैं पहले भी विधायक रह चुका हूं, लेकिन आज तक ऐसा नहीं हुआ कि विधायकों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी व्यवस्थित तरीके से दी जाए। यदि यह व्यवस्था पूरी तरह लागू होती है तो यह पश्चिम बंगाल विधानसभा के इतिहास में एक नया अध्याय होगा।”
उन्होंने मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह कदम सभी विधायकों के सम्मान के साथ-साथ लोकतांत्रिक जवाबदेही को भी मजबूत करेगा।
जनता को क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई व्यवस्था से—
- जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई समस्याएं लंबित नहीं रहेंगी।
- विभागों की जवाबदेही तय होगी।
- विकास परियोजनाओं की प्रगति पर नियमित निगरानी होगी।
- आम नागरिकों की शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया तेज होगी।
- विधानसभा की कार्यवाही अधिक परिणाममुखी बनेगी।
यदि इस व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो यह प्रशासनिक पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
क्या बदलेगा अब?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद विधानसभा में उठाए गए किसी भी जनहित के मुद्दे को महीनों तक लंबित रखने की गुंजाइश कम होगी। संबंधित विभागों को तय समयसीमा के भीतर कार्रवाई या स्पष्टीकरण देना अनिवार्य होगा।
इससे विधायकों को भी अपने क्षेत्र की समस्याओं पर समयबद्ध जवाब मिलेगा और जनता का भरोसा शासन-प्रशासन पर मजबूत होने की उम्मीद है।
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