कोलकाता | 5 दिसंबर 2025 : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान करीब 50 लाख संदिग्ध वोटरों की पहचान होने के भाजपा के दावे ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। भाजपा नेताओं ने इसे “डेमोग्राफिक हेरफेर” और “मतदाता सूची में संगठित गड़बड़ी” बताते हुए राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला है।
🔥 भाजपा का आरोप: ‘फर्जी वोटरों से भरी है मतदाता सूची’
राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य ने बेहद तीखे शब्दों में राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि—
- मतदाता सूची में बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्या के नाम शामिल किए गए।
- SIR में ऐसे 50 लाख लोग पाए गए जो “राज्य में रहते ही नहीं।”
- मृत लोगों के नाम भी सूची में जोड़े गए।
- खाली प्लॉट और जमीनों को फर्जी मतदाताओं के पते के रूप में दर्ज कराया गया।
भट्टाचार्य ने कहा: “मतदाता सूची का शुद्धिकरण होकर रहेगा। जो बाधा डालेंगे, उन्हें संविधान के अनुसार सोचना चाहिए कि उन्हें क्या करना है।”

🗳️ अन्य भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया
प्रवीण खंडेलवाल (भाजपा सांसद) ने SIR को “बहुत आवश्यक” बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए फर्जी वोटरों को हटाना जरूरी है। यह प्रक्रिया उन लोगों के लिए “करारा जवाब” है जिन्होंने SIR पर सवाल उठाए थे।
नितिन नबीन (बिहार मंत्री) ने दावा किया कि यह खुलासा “डेमोग्राफिक हेरफेर” का प्रमाण है। कहा कि ममता सरकार की “चालें” सामने आ रही हैं। उम्मीद जताई कि चुनाव आयोग कार्रवाई करेगा।
शशांक मणि त्रिपाठी (भाजपा सांसद) ने SIR को “डेमोक्रेटिक सिस्टम की नींव मजबूत करने वाली प्रक्रिया” बताया। उन्होंने जनता से इसे गंभीरता से लेने की अपील की।
⚖️ राजनीतिक संदर्भ: क्यों बढ़ा विवाद?
- 2026 विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं।
- भाजपा लगातार मतदाता सूची में “अनियमितताओं” का मुद्दा उठा रही है।
- टीएमसी का कहना है कि भाजपा “राजनीतिक नैरेटिव” गढ़ रही है।
- SIR प्रक्रिया को लेकर राज्य में पहले भी तनाव रहा है।
📌 SIR क्या है?
विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision)—
- मतदाता सूची की सफाई और अपडेट की प्रक्रिया।
- मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट वोटरों को हटाने का उद्देश्य।
- नए योग्य मतदाताओं को जोड़ने का भी प्रावधान।
भाजपा का दावा है कि इसी प्रक्रिया में 50 लाख संदिग्ध नाम सामने आए।
✅ चुनावी मौसम में बढ़ी सियासी तल्खी
भाजपा के आरोपों ने बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। भाजपा इसे “लोकतंत्र की रक्षा” का मुद्दा बता रही है। टीएमसी इसे “राजनीतिक हमला” कहकर खारिज कर रही है। चुनाव आयोग पर अब सबकी निगाहें हैं कि वह इस विवाद पर क्या कदम उठाता है।
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