हाशिए के प्रश्न को केंद्र में लाने वाले लेखक हैं प्रेमचंद

प्रतीकात्मक फोटो, साभार : गूगल

कोलकाता : खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज के हिंदी विभाग द्वारा ‘प्रेमचंद स्मृति व्याख्यानमाला’ का आयोजन 30 जुलाई को किया गया। प्रेमचंद के जयंती पर केंद्रित यह व्याख्यानमाला पिछले कई वर्षों से आयोजित हो रहा है। 140वीं जयंती के अवसर पर ‘हाशिए के प्रश्न और प्रेमचंद’ विषय पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया ।इस अवसर पर आमंत्रित वक्ता डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि प्रेमचंद का रचना संसार मानव जीवन का आख्यान है।

प्रेमचंद ने दबे हुए संदर्भों को केंद्र में लाया ।औपनिवेशिक सत्ता की साम्राज्यवादी चालाकियों को प्रेमचंद ने बेनक़ाब करते हुए सामंतवाद के साथ उनके गठबंधन पर जमकर प्रहार किया है।वे हाशिए पर चले गए किसानों -मजदूरों, स्त्री, राष्ट्र, दलित और भाषा के प्रश्न को राष्ट्रीयता की परियोजना और सामाजिक क्रांति से जोड़कर केंद्र में स्थापित किया। उन्होंने किसानों को राष्ट्रीय चरित्र के रूप में गढ़ने का महत्वपूर्ण काम किया। कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुबीर कुमार दत्ता के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने हिंदी विभाग की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह विभाग निरंतर साहित्यिक और सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए विद्यार्थियों को मंच प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि हमें प्रेमचंद से बहुत कुछ सीखना है।

विभागाध्यक्ष डॉ. शुभ्रा उपाध्याय ने व्याख्यानमाला की प्रयोजनीयता को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह आयोजन प्रेमचंद को श्रद्धांजलि अर्पित करने का मंच है।इस मंच से हम प्रेमचंद के मूल्यों को विद्यार्थियों तक प्रेषित करते हैं ।विद्यार्थी प्रेमचंद के साहित्य पर विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां करते हैं ।इस अवसर पर विभाग के विद्यार्थियों ने ‘प्रेमचंद के पात्र बोलते हैं ‘ कार्यक्रम के अंतर्गत प्रेमचंद के साहित्य के प्रमुख पात्रों के जरिए संवाद शैली में अभिनयात्मक पाठ किया।

विद्यार्थियों ने प्रेमचंद के कफ़न, सवा सेर गेंहू, सद्गति, बूढ़ी काकी, बड़े घर की बेटी आदि कहानियों के किरदारों के प्रमुख संवादों पर प्रभावी प्रस्तुति की। प्रस्तुति के दौरान श्रोताओं को कहानी एवं पात्रों का नाम बताना था। श्रोताओं ने भी इसमें जमकर हिस्सा लिया ।इसमें सौरभ केशरी, ज्योति मिश्रा, उजाला यादव, निशा साव, प्रीति साव, प्रीति गुप्ता, नंदनी साव, सिमरन जैसवारा, साक्षी झा, सीमा प्रजापति, अभिनव प्रसाद, बिन्दी चौधरी और विशाल दास ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में कोलकाता और अन्य शहरों के शिक्षक, साहित्यप्रेमी एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया । कार्यक्रम का संयोजन एवं सफल संचालन ककरते हुए प्रो. मधु सिंह ने कहा कि भारत की आत्मा के लेखक थे प्रेमचंद । धन्यवाद ज्ञापन प्रो. राहुल गौड़ ने दिया ।

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