विश्वभारती मामले को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था

प्रतीकात्मक फोटो, साभार : गूगल

कोलकाता : विश्वभारती विश्वविद्यालय के पौष मेला में चारदीवारी के निर्माण को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्रीय विश्वविद्यालय के दो पूर्व कुलपतियों ने परिसर में हिंसा एवं तोड़फोड़ की घटना की निंदा की।

उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि वर्तमान कुलपति परिस्थितियों को बेहतर ढंग से संभाल सकते थे। पूर्व कुलपति रजत कांता रे और सुजीत कुमार बसु ने कहा कि यह घटना नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित ‘‘विश्वविद्यालय के आदर्शों एवं मूल्यों पर हमला था।’

बसु ने कहा कि बाड़ लगाने का काम शुरू करने से पहले संस्थान के अधिकारियों को स्थानीय लोगों को विश्वास में लेना चाहिए था। जानेमाने इतिहासकार रे ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘यह विश्वभारती पर हमला था, एक आक्रमण जो अक्षम्य है। टैगोर के नोबेल पुरस्कार की चोरी और एक छात्रा की हत्या जैसी बड़ी घटनाएं यहां पहले हो चुकी हैं लेकिन हालिया घटना बेहद खतरनाक थी, यह विश्वभारती पर हमला था।’’ बसु ने कहा कि एक सदी से भी अधिक समय पहले शुरू हुए सालाना सांस्कृतिक कार्यक्रम पौष मेला के स्थल पर चारदीवारी बनाना टैगौर की विचारधारा का विरोधाभासी है जो इंसान और प्रकृति को जोड़ने में विश्वास रखते थे, दीवारें खड़ी करके उन्हें अलग करने में नहीं। रे

ने कहा कि वर्तमान कुलपति विद्युत चक्रवर्ती यदि ऐसा मानते हैं कि दिन छिपने के बाद इलाके में गैरकानूनी गतिविधियों के आरोपों को देखते हुए बाड़ लगाना वक्त की जरूरत है तो उन्हें इस परियोजना पर आगे तो बढ़ना चाहिए था लेकिन बहुत ही सतर्कता के साथ। वर्ष 2006 से लेकर कई वर्षों तक संस्थान के कुलपति रह चुके रे ने कहा कि 17 अगस्त को परिसर में हिंसा की घटना के पीछे बाहरी तत्वों या स्थानीय व्यापारियों के एक वर्ग का हाथ हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘दीवार बनाने के बजाए एक पारदर्शी बाड़ लगाई जा सकती है, ऐसा मैंने विदेशों में और भारत में भी कहीं-कहीं देखा है। इससे नजारा बाधित नहीं होता, मेरे खयाल से तकनीकी तौर पर यह संभव है।’’ विश्व भारती विश्वविद्यालय में अधिकारियों द्वारा पौष मेला मैदान में चारदीवारी के निर्माण के खिलाफ 17 अगस्त को करीब चार हजार लोगों की भीड़ ने परिसर में घुसकर हिंसा और तोड़फोड़ की थी।

वर्ष 2001 से 2006 तक संस्थान के कुलपति रहे बसु ने कहा, ‘‘यह सोचकर भी तकलीफ होती है कि कुछ बाहरी तत्व गुरुदेव द्वारा स्थापित संस्थान को नुकसान पहुचाएंगे। मुझे याद है कि वह द्वार जानेमाने वास्तुविद अरूनेंदु बंदोपाध्याय ने बनाया था। यह नहीं होना चाहिए था।’’ वह हिंसा के दौरान विश्वभारती का एक द्वार गिराए जाने के बारे में कह रहे थे। बसु ने कहा, ‘‘वर्तमान कुलपति इस मुद्दे को ठीक से संभाल नहीं पाए तथा चारदीवारी का निर्माण शुरू करने से पहले लोगों को उन्होंने भरोसे में नहीं लिया। उनकी योजना गुरुदेव के विचार से विपरीत थी जो मानते थे कि स्थान खुले होने चाहिए ताकि मस्तिष्क के लिए कोई बंधन न हो।’’

विश्वविद्यालय ने हिंसा की सीबीआई जांच की मांग की है और कहा है कि विश्वविद्यालय तब तक बंद रहेगा जब तक कि आरोपियों को दंडित नहीं किया जाता। इसके साथ ही परिसर सोमवार से अनिश्चितकाल के लिए बंद हो गया। विश्वभारती ने परिसार में केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग की है तथा इस हिंसा के लिए तृणमूल कांग्रेस के एक विधायक और पार्टी के कुछ स्थानीय नेताओं पर आरोप लगाए हैं

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