कोलकाता हिन्दी न्यूज | 25 सितम्बर 2026: महान शिक्षाविद, समाज सुधारक और मानवतावादी विचारक पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर की 207वीं जयंती विद्यासागर विश्वविद्यालय में गरिमा और सम्मान के साथ मनाई गई।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी के बीच मानवतावाद, शिक्षा-सुधार, महिला-शिक्षा, समाज-सुधार और तार्किक सोच के क्षेत्र में विद्यासागर के विचार एवं चिंतन की विरासत को विस्तार देना है।
मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि
इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल के माननीय उच्च शिक्षा मंत्री श्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय उपस्थित थे।
इसके अलावा इंडियन म्यूज़ियम, कोलकाता के निदेशक डॉ. सायन भट्टाचार्य और मेदिनीपुर के विधायक डॉ. शंकर कुमार गुच्छैत विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
विद्यासागर पुरस्कार और मेमोरियल व्याख्यान
इस अवसर पर प्रतिष्ठित ‘विद्यासागर पुरस्कार’ समारोह का आयोजन किया गया। इस वर्ष प्रतिष्ठित ‘विद्यासागर पुरस्कार’ श्री विनायक बंद्योपाध्याय और प्रो. गोपालचंद्र मिश्र को तथा ‘अन्नपूर्णा चट्टोपाध्याय पुरस्कार’ प्रो. चित्त पांडा को प्रदान किया गया।
इस मौके पर आयोजित ‘विद्यासागर मेमोरियल व्याख्यान’ नीति आयोग के माननीय सदस्य प्रो. गोवर्धन दास ने दिया।
पुस्तकों का विमोचन
इस अवसर पर ‘विद्यासागर रचना समग्र’ के चौथे खंड और ईश्वरचंद्र विद्यासागर द्वारा रचित ‘शकुंतला उपाख्यान’ का विद्यासागर विश्वविद्यालय की ओर से चार अलग-अलग भाषाओं (हिंदी, अंग्रेजी, संताली एवं बांग्ला) में अनूदित ‘शकुंतला’ का भी विमोचन किया गया।
यह विद्यासागर की साहित्यिक और बौद्धिक विरासत को संरक्षित और प्रसारित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
म्यूजियम और रीडर्स पार्क का उद्घाटन
विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. दीपक कुमार कर ने अपने संबोधन में कहा कि आज का दिन अविस्मरणीय है क्योंकि आज विद्यासागर विश्वविद्यालय में विद्यासागर म्यूजियम एवं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रीडर्स पार्क का उद्घाटन किया गया।
ईश्वरचंद्र विद्यासागर राजा राममोहन राय के उत्तराधिकारी थे। उन्होंने स्त्री शिक्षा को सामाजिक बदलाव के लिए जरूरी माना।
उच्च शिक्षा मंत्री का संबोधन
उच्च शिक्षा मंत्री श्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने उद्घाटन संबोधन में कहा, “विद्यासागर जी के नाम पर निर्मित विद्यासागर विश्वविद्यालय शिक्षा और सामाजिक सुधार का एक बड़ा केंद्र है।”
उन्होंने बंगाल के गौरवशाली अतीत को स्मरण करते हुए नई पीढ़ी से आह्वान किया कि आने वाले समय में बंगाल की ऐतिहासिक उपलब्धि को पुनर्स्थापित करने की जरूरत है। हमें विद्यासागर जी के दिखाए मार्ग पर चलते हुए आधुनिक शिक्षा और स्त्री शिक्षा के लिए काम करना चाहिए।
अन्य वक्ताओं के विचार
नीति आयोग के सदस्य प्रो. गोवर्धन दास ने विद्यासागर मेमोरियल लेक्चर देते हुए कहा कि विद्यासागर सामाजिक सुधार के प्रेणता थे। उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी का श्रेय विद्यासागर को जाता है।
विशेष व्याख्यान देते हुए डॉ. सायन भट्टाचार्य ने कहा कि म्यूजियम के जरिए भी शिक्षा को विस्तार दिया जा सकता है। विद्यासागर म्यूजियम की स्थापना का अर्थ है आम लोगों तक विद्यासागर के विचारों को पहुंचाना। विद्यासागर का हिंदी के प्रसिद्ध लेखक भारतेंदु हरिश्चंद्र से गहरा संबंध था।
मिदनापुर के विधायक डॉ. शंकर गुच्छाइत ने कहा कि मिदनापुर ज्ञान और स्वतंत्रता संग्राम की भूमि है। विद्यासागर विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा, ज्ञान और प्रगति का बड़ा केंद्र है।
उपस्थिति और संचालन
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के अध्यक्ष, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं प्रशासनिक अधिकारी तथा शिक्षा कर्मी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
कार्यक्रम का सफल संचालन प्रो. जयजीत घोष और सागरिका घोष ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ. जयंत किशोर नंदी ने दिया।
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