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डॉ. मीरा सिन्हा और डॉ. प्रीति सिंह को मिला ‘प्रथम उर्मिला देवी स्मृति सम्मान-2026’

कोलकाता/आसनसोल, 17 मार्च 2026: आसनसोल के दयानंद उच्चतर विद्यालय के सभागार में 15 मार्च 2026 (रविवार) को प्रथम उर्मिला देवी स्मृति सम्मान–2026 का भव्य आयोजन हुआ। इस अवसर पर साहित्यिक पत्रिका ‘मुक्तांचल’ का लोकार्पण भी किया गया तथा ‘भारतीय ज्ञान परंपरा और हमारा समय’ विषय पर विचारगोष्ठी आयोजित हुई।

कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन मंचासीन अतिथियों डॉ. दामोदर मिश्र (हिंदी विश्वविद्यालय, हावड़ा के प्रथम कुलपति), कथाकार सृंजय, डॉ. मीरा सिन्हा, मनोहर पटेल, डॉ. विजय नारायण और डॉ. अरुण पाण्डेय को उत्तरीय भेंट कर किया गया। इसके पश्चात उर्मिला देवी के तैलचित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। आकांक्षा बारी के गायन ने वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।

दो विदुषी महिलाओं को सम्मान

इस वर्ष का प्रथम उर्मिला देवी स्मृति सम्मान दो विदुषी महिलाओं को प्रदान किया गया:

  • डॉ. मीरा सिन्हा (पूर्व प्राध्यापिका व संपादक)
  • डॉ. प्रीति सिंह (खान्द्रा कॉलेज की हिंदी प्राध्यापिका)

उन्हें स्मृति-चिह्न, शॉल और सम्मान राशि का चेक देकर सम्मानित किया गया।

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उर्मिला देवी को श्रद्धांजलि

आयोजक अशोक आशीष ने अपनी माता उर्मिला देवी के संघर्षपूर्ण जीवन और प्रेरणादायी व्यक्तित्व का स्मरण करते हुए उनके आदर्शों को रेखांकित किया।

‘मुक्तांचल’ का लोकार्पण

कार्यक्रम के प्रथम सत्र के अंत में मंचासीन अतिथियों ने ‘मुक्तांचल’ पत्रिका का लोकार्पण किया। डॉ. मीरा सिन्हा ने पत्रिका की विकास यात्रा और उसके साहित्यिक महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।

विचारगोष्ठी: ‘भारतीय ज्ञान परंपरा और हमारा समय’

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा और हमारा समय’ विषय पर व्याख्यान सत्र आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता डॉ. दामोदर मिश्र ने की। मुख्य वक्ता:

  • सुशील कुमार पाण्डेय – भारतीय ज्ञान परंपरा में स्त्रियों की भूमिका पर प्रकाश
  • डॉ. विजय नारायण सिंह – लोकमंगल से जोड़ते हुए सामाजिक उपयोगिता
  • सृंजय – विभिन्न कालखंडों में ज्ञान की बहुलता और सांस्कृतिक आयाम
  • डॉ. मीरा सिन्हा – परंपरा के पारंपरिक ढांचे की समकालीन पुनर्व्याख्या की आवश्यकता

अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ. दामोदर मिश्र ने भारतीय ज्ञान परंपरा को समग्रता में समझने और वर्तमान चुनौतियों से जोड़ने की जरूरत पर बल दिया।

सम्मानित कलाकार और संचालन

आकांक्षा बारी को डॉ. प्रीति सिंह ने शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया, जबकि कार्यक्रम का प्रभावी संचालन करने वाले नवीन चन्द्र सिंह को हिमाचली टोपी पहनाकर सम्मान दिया गया। अंत में अशोक आशीष ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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