कोलकाता। उत्तर 24 परगना जिले के दत्तपुकुर कदमबागछी पंचायत क्षेत्र स्थित उला कलसारा कदरिया हाई मदरसा में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें तीन बाघों को स्कूल की बालकनी में दौड़ते हुए देखा गया।
वीडियो ने छात्रों, अभिभावकों और पूरे गाँव में दहशत का माहौल खड़ा कर दिया। जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, अभिभावक स्कूल पहुंचे और प्रधानाध्यापक मोनिरुल मलिक से मिलकर बाघ की तलाश की मांग करने लगे।
स्कूल प्रशासन ने तत्काल स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि वीडियो असली नहीं, बल्कि पूरी तरह से एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तकनीक से बनाया गया है।
प्रधानाध्यापक मोनिरुल मलिक ने बताया कि वीडियो स्कूल के भूगोल विषय के सहायक शिक्षक मोहम्मद यामीन मलिक द्वारा बनाया गया था। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वीडियो किस उद्देश्य से बनाया गया, यह पहले से संस्थान को जानकारी नहीं थी।
बाद में शिक्षक मोहम्मद यामीन मलिक ने सामने आकर अपनी मंशा स्पष्ट की और माफ़ी मांगी।
उन्होंने कहा, “मेरे द्वारा बनाया गया वीडियो पूरी तरह से एआई तकनीक से निर्मित था। इसका मकसद छात्रों को यह समझाना था कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली हर चीज़ सच नहीं होती। मैं उन्हें डिजिटल दुनिया और उसकी वास्तविकता के फर्क को समझाना चाहता था, लेकिन मेरा तरीका डरावना बन गया, जिसके लिए मैं क्षमा चाहता हूँ।”
शिक्षक ने यह भी अनुरोध किया कि अभिभावक बच्चों को दोबारा स्कूल भेजें ताकि वे डर के बजाय सीखने की ओर प्रेरित हो सकें।
हालाँकि यह वीडियो किसी शरारत या अफवाह का हिस्सा नहीं था, लेकिन इसके असर ने साफ़ कर दिया कि डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल शिक्षण में किस हद तक प्रभावी और साथ ही संवेदनशील भी हो सकता है।
स्थानीय प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं हुई है, लेकिन घटना ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि तकनीक का प्रयोग शिक्षा में रचनात्मक हो या भय फैलाने वाला — सीमाएं तय करना ज़रूरी है।
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