कोलकाता हिन्दी न्यूज | 23 जुलाई 2026: लंबे कानूनी विवाद के बाद पश्चिम बंगाल में अपर प्राइमरी शिक्षक भर्ती की काउंसलिंग आखिरकार शुरू हो गई है। हालांकि, भर्ती प्रक्रिया शुरू होते ही एक नया संकट सामने आ गया है।
बड़ी संख्या में अभ्यर्थी काउंसलिंग में शामिल ही नहीं हुए, जबकि कई उम्मीदवारों ने सिफारिश (Recommendation) पत्र मिलने के बावजूद नौकरी जॉइन करने से इनकार कर दिया।
शिक्षा विभाग के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि वर्षों के इंतजार के बाद भी कई पद खाली रहने की आशंका पैदा हो गई है।
बड़ी संख्या में अभ्यर्थी रहे अनुपस्थित
शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार,
- मंगलवार को अंग्रेजी विषय की काउंसलिंग में 88 अभ्यर्थियों को बुलाया गया था, जिनमें से 28 उम्मीदवार अनुपस्थित रहे।
- बुधवार को विज्ञान (बायोलॉजी और प्योर साइंस) विषय के 149 अभ्यर्थियों में से 46 उम्मीदवार काउंसलिंग में नहीं पहुंचे, जो कुल अभ्यर्थियों का लगभग 31 प्रतिशत है।
इतना ही नहीं, कई उम्मीदवारों ने नियुक्ति पत्र लेने के बाद भी स्पष्ट कर दिया कि वे नौकरी जॉइन नहीं करेंगे।
क्यों नहीं कर रहे अभ्यर्थी जॉइनिंग?
शिक्षा जगत से जुड़े जानकारों का मानना है कि भर्ती प्रक्रिया वर्षों तक कानूनी विवाद में फंसी रहने के कारण कई उम्मीदवार इस दौरान अन्य सरकारी नौकरियों या प्राथमिक शिक्षक के पद पर नियुक्त हो चुके हैं।
इसके अलावा बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को घर से काफी दूर स्थित स्कूलों में पोस्टिंग मिली है। ऐसे में कई उम्मीदवार दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर कार्यभार संभालने के इच्छुक नहीं हैं।
यही कारण है कि मेरिट सूची में चयनित होने के बावजूद काफी संख्या में उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया से पीछे हट रहे हैं।
हाई कोर्ट के निर्देश पर चल रही है भर्ती प्रक्रिया
गौरतलब है कि कोलकाता हाई कोर्ट के निर्देश के बाद 1,177 अभ्यर्थियों की काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू की गई है।
शिक्षा विभाग के कार्यक्रम के अनुसार—
- 23 जुलाई: संस्कृत, अरबी, हिंदी और उर्दू
- 24 जुलाई: इतिहास
- 27 और 28 जुलाई: बंगाली
- 29 और 30 जुलाई: भूगोल
विभाग के अनुसार अभी भी 64 पदों पर नियुक्ति शेष है। अब सभी की नजर आगामी काउंसलिंग पर टिकी है कि शेष अभ्यर्थी नियुक्ति स्वीकार करते हैं या नहीं।
भर्ती प्रक्रिया पर फिर उठे सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि चयनित उम्मीदवार लगातार नियुक्ति लेने से इनकार करते रहे, तो शिक्षा विभाग को प्रतीक्षा सूची (Waiting List) या अन्य वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करना पड़ सकता है, ताकि रिक्त पदों को जल्द भरा जा सके और विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर हो।
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