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वर्दी बन सकती है जीवनरक्षक कवच : खड़गपुर पुलिस के लिए सीपीआर प्रशिक्षण का प्रेरक आयोजन

तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। आपातकाल की घड़ी में एक क्षण की तत्परता ही जीवन की डोर को टूटने से बचा सकती है। जब किसी का हृदय अचानक मौन हो जाए, श्वास की गति थमने लगे और समय मानो ठहर जाए, तब प्रशिक्षित हाथ ही मृत्यु के अंधकार में जीवन का दीप जला सकते हैं।

इसी मानवीय उद्देश्य को साकार करने के लिए सेंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड, खड़गपुर डिवीजन के तत्वावधान में खड़गपुर टाउन थाना परिसर में एक विशेष सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।

यह प्रशिक्षण खड़गपुर टाउन पुलिस, महिला पुलिस तथा ट्रैफिक पुलिस के कर्मियों के लिए आयोजित किया गया, जहां अनुशासन की वर्दी को जीवनरक्षा के संकल्प से सजाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस बल को न केवल कानून का रक्षक, बल्कि संकट की घड़ी में जीवन का प्रहरी बनाना था।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि पुलिस कर्मियों की तत्परता और संवेदनशीलता ही आपदा के क्षणों में किसी की आख़िरी उम्मीद बन सकती है। खड़गपुर महिला थाना प्रभारी प्रतिभा हालदार के विशेष अनुरोध पर सेंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड ने यह प्रशिक्षण सत्र संचालित किया, जिसने कार्यक्रम को व्यावहारिकता और प्रभावशीलता का नया आयाम दिया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सीपीआर की बारीकियों से रू-ब-रू कराया गया। छाती पर सही दबाव की लय, कृत्रिम श्वास की विधि, आपातकालीन उपकरणों का समुचित प्रयोग और संकटपूर्ण परिस्थितियों में टीम वर्क की भूमिका पर विशेष बल दिया गया।

अभ्यास सत्रों के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट किया गया कि घबराहट नहीं, बल्कि सूझबूझ ही जीवन बचाने की सबसे बड़ी कुंजी है। आयोजकों ने आशा व्यक्त की कि यह प्रशिक्षण पुलिस कर्मियों के आत्मविश्वास को नई ऊँचाई देगा और वे वास्तविक जीवन की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में निडर होकर प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।

विशेषज्ञों का मत है कि इस प्रकार की पहल केवल पुलिस बल को ही नहीं, बल्कि पूरे समाज को अधिक सुरक्षित और सजग बनाती है। जहां हर प्रशिक्षित हाथ, संकट के समय किसी के लिए जीवन का सहारा बन सके।

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