Climate कहानी, कोलकाता, 7 नवंबर 2025 | वैश्विक रिपोर्टिंग डेस्क — UNFCCC की नई Synthesis Report 2025 ने पहली बार संकेत दिया है कि दुनिया का ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन वक्र अब नीचे की ओर झुकने लगा है। यह एक ऐतिहासिक मोड़ है, लेकिन रिपोर्ट साफ़ करती है कि 1.5°C लक्ष्य तक पहुंचने के लिए रफ्तार और न्यायसंगत सहयोग दोनों की ज़रूरत है।
📉 उत्सर्जन घटा, लेकिन लक्ष्य अब भी दूर
- 2035 तक उत्सर्जन में 10% तक की गिरावट संभव, अगर मौजूदा NDCs पूरी तरह लागू हों
- 88% देशों ने COP28 के Global Stocktake से प्रेरित होकर योजनाएं अपडेट कीं
- 73% NDCs में Adaptation, और 1/3 में Loss & Damage के प्रावधान शामिल
- लेकिन 1.5°C लक्ष्य के अनुरूप रफ्तार अभी नहीं है
रिपोर्ट में शामिल देशों की नई और अपडेटेड राष्ट्रीय जलवायु योजनाएं (NDCs) वैश्विक उत्सर्जन का करीब एक-तिहाई हिस्सा कवर करती हैं। इनमें से 88% देशों ने अपनी योजना COP28 के Global Stocktake के नतीजों से प्रभावित होकर बनाई है,
जबकि 89% देशों ने पूरे अर्थव्यवस्था स्तर पर लक्ष्य तय किए हैं। लगभग 73% NDCs में जलवायु अनुकूलन (Adaptation) के तत्व हैं, और एक-तिहाई देशों ने Loss and Damage यानी जलवायु आपदाओं से हुए नुकसान को अपनी योजनाओं में शामिल किया है।

🇮🇳 भारत की भूमिका: नीति से ज़मीन तक
- भारत उन 89% देशों में शामिल है जिनके NDCs में ऊर्जा, परिवहन, कृषि, भवन, जंगल और उद्योग शामिल हैं
- सेमी-फेडरल मॉडल के तहत राज्य सरकारें अब राष्ट्रीय डिकार्बोनाइजेशन की सह-निर्माता बन रही हैं
- तमिलनाडु की Green Climate Company और गुजरात का सौर मिशन इसके उदाहरण हैं
रिपोर्ट कहती है कि अगर मौजूदा लक्ष्यों को पूरी तरह लागू किया जाए, तो 2035 तक वैश्विक उत्सर्जन करीब 10% घट सकता है।
NFCCC के Executive Secretary Simon Stiell ने कहा, “मानवता अब उत्सर्जन को नीचे की ओर मोड़ रही है, लेकिन रफ्तार बहुत कम है। हमें अब और तेज़ चलना होगा, और उन देशों की मदद करनी होगी जो इस संकट के लिए सबसे कम जिम्मेदार हैं।”
💼 जलवायु और अर्थव्यवस्था: अब एक ही दिशा
- हर NDC अब सिर्फ वादा नहीं, बल्कि निवेश का संकेत है
- Renewables अब कोयले से आगे निकलकर दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा स्रोत बन चुके हैं
- We Mean Business Coalition और Global Renewables Alliance ने नीति और बाज़ार के तालमेल पर ज़ोर दिया
Climate Trends की Aarti Khosla कहती हैं, “भारत उन 89% देशों में है जिनके NDCs में ऊर्जा, उद्योग, परिवहन, कृषि, जंगल और भवन क्षेत्र सब शामिल हैं। भारत का सेमी-फेडरल मॉडल, जहां केंद्र नीति बनाता है और राज्य उसे लागू करते हैं, अब जलवायु शासन का नया चेहरा बन रहा है।”
🚀 आगे की राह: COP30 को बनाना होगा “Implementation COP”
- 2030 तक उत्सर्जन स्थिर हो सकता है, लेकिन 1.5°C लक्ष्य के लिए और तेज़ी ज़रूरी
- फाइनेंस, टेक्नोलॉजी और कैपेसिटी बिल्डिंग में समान पहुंच की मांग
- UN Climate Change ने COP30 को क्रियान्वयन-केंद्रित सम्मेलन बनाने का आह्वान किया
🧭 निष्कर्ष: दिशा सही है, अब रफ्तार की बारी
“हम रेस में हैं, लेकिन जीतने के लिए अब तेज़ दौड़ना होगा।” — UNFCCC Synthesis Report 2025
दुनिया अब जलवायु आपदाओं और आर्थिक अवसरों के दो मोर्चों पर एक साथ लड़ रही है। यह रिपोर्ट बताती है कि Paris Agreement ने दिशा दी, लेकिन अब निर्णायक कदमों की ज़रूरत है — ताकि यह कहानी चेतावनी नहीं, जीत में बदले।
रिपोर्ट बताती है कि पेरिस समझौते के दस साल बाद, दुनिया ने दिशा सही पकड़ ली है। अब बस ज़रूरत है तेज़ कदमों की। क्योंकि जलवायु की इस दौड़ में हम अभी भी रेस में हैं, बस अब रफ्तार तय करेगी कि यह कहानी जीत में बदलती है या चेतावनी में।
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