निशान्त, Climate कहानी, कोलकाता: जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण को अक्सर दो अलग-अलग समस्याओं की तरह देखा जाता है। एक का संबंध तापमान बढ़ने से और दूसरे का सांस की बीमारियों से जोड़ा जाता है।
लेकिन संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट कहती है कि दोनों को साथ लेकर काम करने से देशों को पर्यावरणीय फायदे के साथ बड़ा आर्थिक लाभ भी मिल सकता है।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) और क्लाइमेट एंड क्लीन एयर कोएलिशन (सीसीएसी) की रिपोर्ट के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण से एक साथ निपटने पर हर एक अमेरिकी डॉलर के निवेश से करीब 15 डॉलर का आर्थिक लाभ मिल सकता है।
इसमें बाजार से मिलने वाले आर्थिक फायदे के साथ उन लाभों को भी शामिल किया गया है जिन्हें सीधे पैसे में मापना मुश्किल होता है, जैसे समय से पहले होने वाली मौतों में कमी और बेहतर स्वास्थ्य।
रिपोर्ट का नाम ‘हिडन एसेट्स: द इकोनॉमिक एंड हेल्थ केस फॉर क्लाइमेट एंड क्लीन एयर एक्शन’ है। इसे अंतरराष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस के मौके पर जारी किया गया है। यह जलवायु और साफ हवा पर एक साथ कार्रवाई के आर्थिक असर का पहला व्यापक वैश्विक आकलन बताया गया है।
25 उपायों से दोहरे फायदे
रिपोर्ट ने ऐसे 25 उपायों की पहचान की है, जिनसे एक साथ ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और वायु प्रदूषण दोनों को कम किया जा सकता है। इनमें शामिल हैं:
- रिन्यूएबल पावर बढ़ाना
- ऊर्जा दक्षता सुधारना
- स्वच्छ खाना पकाने और हीटिंग के साधनों का विस्तार
- वाहनों के उत्सर्जन और ईंधन दक्षता के मानकों को सख्त करना
- इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना
- जहाजों में कम सल्फर वाले ईंधन का इस्तेमाल
ये उपाय सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। उद्योग, परिवहन, कृषि और खाद्य व्यवस्था, घरों में खाना पकाने-हीटिंग तथा कचरा प्रबंधन को भी शामिल किया गया है।
मीथेन, ब्लैक कार्बन और हाइड्रोफ्लोरोकार्बन जैसे कम समय तक वातावरण में रहने वाले लेकिन शक्तिशाली प्रदूषकों को कम करना भी इस पैकेज का हिस्सा है।
आर्थिक लाभ के आंकड़े
इन 25 उपायों को लागू करने से मिलने वाला सालाना आर्थिक लाभ:
- 2035 में वैश्विक जीडीपी के 2.8 प्रतिशत
- 2050 में 4.5 प्रतिशत
- 2100 में 11.4 प्रतिशत के बराबर हो सकता है।
तुलना के लिए, 2022 में दुनिया ने फॉसिल फ्यूल सब्सिडी पर वैश्विक जीडीपी का 2.18 प्रतिशत खर्च किया था। 2023 में स्वास्थ्य सेवाओं पर वैश्विक खर्च जीडीपी के 9.3 प्रतिशत के बराबर था।
कार्रवाई में हर एक साल की देरी से हर साल 1.5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के संयुक्त आर्थिक लाभ का नुकसान हो सकता है (वैश्विक जीडीपी के करीब 0.5 प्रतिशत)।
केवल बाजार में मापे जा सकने वाले लाभों के आधार पर भी हर 1 डॉलर के निवेश पर करीब 4 डॉलर का रिटर्न मिल सकता है।
स्वास्थ्य पर भारी कीमत
रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में मानव गतिविधियों से पैदा बाहरी वायु प्रदूषण (खासकर पीएम2.5 और ओजोन) से दुनिया भर में अनुमानित 64 लाख समय से पहले मौतें जुड़ी थीं। घरों के भीतर होने वाले वायु प्रदूषण से करीब 20 लाख समय से पहले मौतें हुईं, जिनमें लगभग 3 लाख बच्चे शामिल थे।
इसी प्रदूषण ने 2025 में बच्चों में करीब 55 लाख नए अस्थमा मामलों और करीब 20 लाख नए डिमेंशिया मामलों में योगदान दिया।
अगर 25 उपायों को पूरी तरह लागू किया जाए, तो 2050 तक वायु प्रदूषण से जुड़ी करीब 14.4 करोड़ समय से पहले होने वाली मौतों को रोका जा सकता है।
जलवायु पर असर
2050 तक वैश्विक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में करीब 50 प्रतिशत, मीथेन उत्सर्जन में 60 प्रतिशत और प्रमुख वायु प्रदूषकों में करीब 70 प्रतिशत कमी आ सकती है। इससे 2050 तक वैश्विक तापमान वृद्धि करीब 0.34°C और 2100 तक करीब 1.4°C तक कम हो सकती है।
विशेषज्ञों की बात
रिपोर्ट के सह-अध्यक्ष और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर साइमन डाइट्ज ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण को अलग-अलग देखने से कार्रवाई के फायदे कम आंके जाते हैं। जब दोनों को एक साथ मॉडल किया गया, तो आर्थिक लाभ ज्यादा निकला, क्योंकि दोनों के स्रोत और नीतियां अक्सर एक ही हैं।
यूएनईपी की कार्यकारी निदेशक इंगर एंडरसन ने कहा कि लंबे समय से जलवायु कार्रवाई को एक लागत और वायु प्रदूषण को विकास का दुर्भाग्यपूर्ण नतीजा माना जाता रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक साफ हवा विकास, स्वास्थ्य, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा तथा जलवायु स्थिरता के लिए एक आर्थिक संपत्ति है।
भारत जैसे देशों के लिए यह रिपोर्ट खास तौर पर प्रासंगिक है, जहां वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन दोनों का असर एक साथ दिखता है। हालांकि रिपोर्ट में भारत के लिए अलग से आंकड़े नहीं दिए गए हैं।
रिपोर्ट का संदेश साफ है—हवा साफ करने के कई काम वही हैं जो जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी मदद करते हैं। देरी की कीमत बहुत बड़ी हो सकती है।
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