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उज्जैन : सरस्वती शिशु मंदिर कसारी में धूमधाम से मनाई गई सरस्वती पूजा

हंस वाहिनी एवं ज्ञानदायिनी के आशीर्वाद से मानव से महामानव हो जाता है- डॉ. चौधरी

उज्जैन। विद्या की देवी-ज्ञानदायिनी माँ सरस्वती की सच्ची आराधना पुस्तकों के अध्ययन से ही प्राप्त होती है। विद्यार्थी को माँ हंस वाहिनी का स्मरण करके पढ़ाई करने से सच्चा एवं सद्मार्ग प्राप्त होता है। राष्ट्रहित में छात्रो को माँ सरस्वती का ध्यान करते हुए नियमित आराधना करना चाहिए। जिससे मानव से महामानव बना जा सकता है।

आज ही के दिन ऋतुराज वसंत का आगमन वसुंधरा में सरसों पकती है बसंत का पीला रंग ऊर्जा और आशा का प्रतीक है पीला रंग ज्ञान का प्रकाश एवं त्याग का स्मरण कराता है। बसंत पंचमी को गायत्री परिवार के पूज्य गुरूदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी का आध्यात्मिक जन्म दिवस एवं सुभाषचन्द्र बोस का जन्म दिवस भी है।

उक्त उद्गार ज्ञान की देवी सरस्वती जी के प्रकटोत्सव दिवस वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजन एवं समर्पण दिवस समारोह में मुख्य वक्ता साहित्यकार डॉ. प्रभु चौधरी (शिक्षक) ने सरस्वती शिशु मंदिर कसारी में व्यक्त करते हुए कहा कि मां सरस्वती अज्ञान के अंधकार को हटाकर ज्ञान की आभा से प्रकाश फैलाती है। बसंत पंचमी भारतीय संस्कृति का पर्व है जो ज्ञान विवेक और रचनात्मक चेतना के पुनर्जागरण का प्रतीक माना गया है।

समारोह का शुभारम्भ त्रिदेव पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। स्वागत गीत अश्विनी चौहान ने प्रस्तुत किया। सर्वप्रथम डॉ. चौधरी ने सरस्वती पूजन तथा वनवासी सेवा न्यास एवं माँ शबरी अनुसूचित जनजाति सेवा न्यास के लिए समर्पण धनराशि प्रदान की। तत्पश्चात् आचार्य एवं भैय्या/बहिनों ने सरस्वती पूजन तथा समर्पण किया।

समारोह की अध्यक्षता ईश्वरलाल दांगी प्रधानाचार्य ने की। समारोह का संचालन आचार्य महेश बैरागी ने किया एवं आभार आचार्य रविराज सिंह पंवार ने माना।

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