कोलकाता | 13 नवंबर 2025 : भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने चुनाव आयोग को एक महत्वपूर्ण डेटा सेट सौंपा है, जिसमें बताया गया है कि पश्चिम बंगाल में 47 लाख नागरिकों की मृत्यु हो चुकी है, जिनमें से:
- 34 लाख आधार कार्ड धारक
- 13 लाख ऐसे लोग जिनके पास कभी आधार नहीं था
यह जानकारी SIR (Special Intensive Revision) अभियान के बीच राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और UIDAI अधिकारियों की बैठक में साझा की गई।
🔍 क्यों ज़रूरी है यह डेटा?
- फर्जी, मृत और दोहराए गए वोटर्स को हटाने के लिए
- बैंकों से मिले KYC डेटा ने भी मृत नागरिकों की पहचान में मदद की
- वोटर लिस्ट की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए आधार डेटा का उपयोग
UIDAI के अधिकारियों ने चुनाव आयोग को ये भी जानकारी दी है कि पश्चिम बंगाल में करीब 13 लाख लोग ऐसे थे जिनके पास कभी आधार कार्ड नहीं था, लेकिन अब उनकी मौत हो चुकी है।

ये जानकारी बुधवार को UIDAI के अधिकारियों और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के बीच हुई बैठक में शेयर की गई है।
📋 SIR अभियान की प्रगति
| चरण | विवरण |
|---|---|
| गणना फॉर्म वितरण | 6.98 करोड़ फॉर्म बांटे गए (91.19%) |
| BLO की भूमिका | घर-घर जाकर फॉर्म वितरण और सत्यापन |
| डेटा मिलान | 2025 की वोटर लिस्ट को 2002 की सूची से मिलाया जा रहा है |
| कार्रवाई | फर्जी या मृत प्रविष्टियों पर BLO के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई संभव |
दरअसल, UIDAI के अधिकारियों और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के बीच ये बैठक पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत चल रहे अभियान के बीच हुई है।
चुनाव आयोग की ओर से सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि वे आधार प्राधिकरण के साथ समन्वय बनाए ताकि वोटर्स के आंकड़ों का सत्यापन किया जा सके और किसी भी तरह की विसंगतियों की पहचान की जा सके।
🧾 चुनाव आयोग को मिली शिकायतें
- फर्जी वोटर्स
- मृत वोटर्स
- अनुपस्थित वोटर्स
- दोहराए गए नाम
अधिकारी बोले:
“UIDAI का डेटा वोटर लिस्ट को साफ करने में बेहद मददगार साबित होगा।”
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के ऑफिस के एक अधिकारी ने जानकारी देते हुए कहा- “चुनाव आयोग को फर्जी वोटर्स, मृत वोटर्स, अनुपस्थित वोटर्सऔर मतदाता सूची में दोहराए गए नामों को लेकर कई शिकायतें मिली हैं। मृत नागरिकों से जुड़ा UIDAI का आंकड़ा ऐसी प्रविष्टियों की पहचान कर के उन्हें वोटर लिस्ट से हटाने में मदद करेगा।”
अधिकारी ने आगे बताया- “बैंकों ने उन खातों का विवरण साझा किया है जिनमें वर्षों से KYC अपडेट नहीं किया गया, जिससे उन मृत व्यक्तियों की पहचान में मदद मिल रही है जिनके नाम अब भी वोटर लिस्ट में दर्ज हैं।”
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