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गौड़बंग विश्वविद्यालय में पश्चिम मेदिनीपुर के गांधीवादी आंदोलन पर मौलिक शोध कर तुहिन कांति दास ने प्राप्त की पीएचडी

मालदा। हाल ही में मालदा स्थित गौड़बंग विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में पश्चिम मेदिनीपुर जिले के गांधीवादी संगठनों द्वारा ग्राम पुनर्निर्माण में निभाई गई भूमिका पर आधारित एक महत्वपूर्ण एवं मौलिक शोध कार्य पूर्ण हुआ है। इस शोध के माध्यम से शोधकर्ता तुहिन कांति दास ने सफलता पूर्वक पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।

अपने शोध प्रबंध में तुहिन कांति दास ने महात्मा गांधी के रचनात्मक कार्यक्रमों को आधार बनाते हुए पश्चिम मेदिनीपुर जिले में सक्रिय गांधीवादी संगठनों की ग्राम-आधारित विकास प्रक्रिया में भूमिका का विस्तृत एवं समालोचनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया है।

शोध के अंतर्गत वर्ष 1950 के बाद से जिले में कार्यरत छह प्रमुख गांधीवादी संगठनों की बहुआयामी गतिविधियों का तथ्यनिष्ठ विश्लेषण किया गया है।

शोध में ग्रामीण स्वावलंबन, खादी एवं कुटीर उद्योगों का विकास, शिक्षा का प्रसार, स्वच्छता अभियान, सामाजिक सुधार, अहिंसक आंदोलनों तथा समग्र ग्राम-विकास जैसे क्षेत्रों में इन संगठनों के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है।

यह शोध गांधीवादी विचारधारा के व्यावहारिक अनुप्रयोग और स्वतंत्रता-उत्तर काल में बंगाल के ग्रामीण समाज निर्माण पर उसके प्रभाव को समझने की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है।

शिक्षाविदों एवं शोधकर्ताओं के बीच इस शोध कार्य की सराहना प्रारंभ हो चुकी है। तुहिन कांति दास की इस उपलब्धि से गौड़बंग विश्वविद्यालय के साथ-साथ पश्चिम मेदिनीपुर जिले के बौद्धिक एवं शैक्षणिक जगत में हर्ष और गौरव का वातावरण व्याप्त है।

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