ट्रंप जब से राष्ट्रपति बने हैं, अपनी नीतियों व बयानों से सुर्खियों में रहे हैं
ट्रंप ने अमेरिकी फर्स्ट के लिए कमर कसी- दुनिया के देशों की व्यापार नीति फंसी- ब्रिक्स देशों, यूरोपीय यूनियन, अफ्रीकी देशों, ग्लोबल साउथ, छटनी के लिए घेराबंदी कसी
अधिवक्ता किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया, महाराष्ट्र। वैश्विक स्तर पर पूरी दुनिया जानती है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिकी फर्स्ट, टैरिफ, मेक अमेरिका ग्रेट अगेन, गैरकानूनी अप्रवासियों का मुद्दा सहित अनेको वादे किए थे जिन्हें पूरा करने के लिए व हद से अधिक स्पीड से भिड़ गए हैं, परंतु जल्दबाजी से कोई भी काम करना हानिकारक हो सकता है, इस पर भारत में कई कहावतें हैं, जैसे जल्दबाजी का काम शैतान का काम, धैर्य रखो सहित अनेकों कहावतें हैं। आज हम इस विषय पर चर्चा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि ट्रंप जब से चुनकर आए हैं, अपने चुनावी वादे बहुत जल्दबाज़ी से लागू करने उमड़ पड़े हैं, जबकि मैं मानता हूं कि किसी भी काम, वादों, उम्मीदों को पूरा करने धैर्य से व संकल्प के साथ रणनीतिक रूप से काम करने की जरूरत है, ताकि उसके दूरगामी सकारात्मक परिणाम देखने को मिले।
मेरे विचार में शायद ट्रंप साहब इस जल्दबाजी में ही काम कर रहे हैं, जिसका सटीक उदाहरण यह है कि जिस तरह वह निर्णय लेकर फिर उन्हें खारिज करना, या उन्हें एक्सटेंशन देना एक बारगेनिंग नीति की और बढ़ रहे हैं, अफ्रीकी पांच देशों के साथ सम्मेलन में व्यवहार, अनेक आर्थिक मजबूत देशों से व्यवहार सहित अनेक मुद्दों पर दबाव तंत्र व दादागिरी का आभास हो रहा है, कि पूरी दुनिया से एक तरह से दुश्मनी की ओर पग बढ़ा रहे हैं। क्योंकि वह अपने घरेलू यूरोपीय यूनियन पर भी टैरिफ लगाकर, चीन पर 145 प्रतिशत टैक्स लगाकर फिर पीछे हटना, सभी को टैरिफ का अल्टीमेटम देकर दबाव बनाना उचित नहीं है। इस बात का संयुक्त वक्तव्य ब्रिक्स सम्मेलन में भी दिया गया था। चूँकि ट्रंप जब से राष्ट्रपति बने हैं अपनी नीतियों, बयानों से सुर्खियों में रहे हैं, इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आलेख के माध्यम से चर्चा करेंगे, ट्रंप के टैरिफ वार पर जग हंसाई- दुनिया से दुश्मनी की नौबत आई?- नोबेल शांति पुरस्कार पाने की चांस घटाई?

साथियों बात अगर हम 12 जुलाई 2025 को मेक्सिको व यूरोपीय यूनियन पर 30 प्रतिशत टैरिफ 1 अगस्त 2025 से लागू करने की घोषणा करने की करें तो, उन्होंने इस संबंध में मैक्सिको और यूरोपीय संघ को लिखे पत्रों को अपने सोशल मीडिया हैंडल से शेयर करके जानकारी दी। ट्रंप के इस कदम से ट्रेड वॉर के और तीव्र होने की संभावना बढ़ गई है, खासकर ऐसे समय में जब यूरोपीय संघ अपने सहयोगी अमेरिका के साथ एक व्यापक व्यापार समझौते पर काम कर रहा है। 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ को अब अमेरिकी बाजारों में भारी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, ट्रंप की यह घोषणा इस सप्ताह की शुरुआत में जापान, साउथ कोरिया, कनाडा और ब्राजील से आने वाले सामानों पर टैरिफ में की गई बढ़ोतरी के बाद आई है।
उन्होंने इन देशों से तांबे के आयात पर 50 प्रतिशत का भारी टैरिफ लगाया है।यूरोपियन यूनियन कमीशन की प्रेसिडेंट ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले पर कहा, ‘यूरोपीय संघ के निर्यात पर 30 प्रतिशत टैरिफ अटलांटिक के दोनों ओर के व्यवसायों, उपभोक्ताओं और मरीजों को नुकसान पहुंचाएगा। हम 1 अगस्त तक समझौते की दिशा में काम करना जारी रखेंगे, साथ ही, हम 30 प्रतिशत टैरिफ के इस फैसले पर उचित प्रक्रियात्मक कदम उठाने और यूरोपीय संघ के हितों की रक्षा के लिए तैयार हैं। इस चिट्ठी में कहा गया है कि मजबूत संबंधों के बावजूद, अमेरिका ने मैक्सिको के ‘फेंटेनल संकट’ से निपटने के लिए उस पर टैरिफ लगाया है, इसके बारे में कहा गया कि यह आंशिक तौर पर मैक्सिको की तरफ से कार्टेल्स को रोकने में असफलता के कारण है।
ट्रंप के अनुसार, मेक्सिको मुझे बॉर्डर सुरक्षित करने में मदद कर रहा है, लेकिन इस देश ने जो किया है वह काफी नहीं है। मेक्सिको ने अभी तक उन कार्टेल्स को नहीं रोका है जो पूरे उत्तरी अमेरिका को नार्को-तस्करी के मैदान में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। जाहिर है, मैं ऐसा नहीं होने दूंगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने मैक्सिको और यूरोपियन यूनियन (ईयू) पर 30 फीसदी तक टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है, इन देशों पर टैरिफ एक अगस्त से लागू हो जाएगा। इससे पहले ट्रंप ने अमेरिका के सात छोटे व्यापारिक साझेदारों को टैरिफ की चिट्ठी भेजी है जिसमें फिलीपींस, ब्रुनेई, मोल्दोवा, अल्जीरिया, लीबिया, इराक और श्रीलंका जैसे देश शामिल हैं।
साथियों बात अगर हम ब्राजील में दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के संयुक्त वक्तव्य पर ट्रंप के नाराजगी वाले बयान की करें तो, एक संयुक्त वक्तव्य में पीएम सहित ब्रिक्स नेताओं ने कहा कि हम एक तरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों के बढ़ने पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं, जो व्यापार को विकृत करते हैं और डब्ल्यूटीओ के नियमों के अनुरूप नहीं हैं। बयान में “वैश्विक व्यापार में टैरिफ के बढ़ते उपयोग” का भी उल्लेख किया गया। हालांकि इस दौरान नाम नहीं लिया गया, लेकिन सभी जानते हैं कि बात अमेरिका की हो रही है। इसके अलावा ब्रिक्स के साझा बयान में चेतावनी दी गई कि टैरिफ के निरंतर ‘अंधाधुंध’ उपयोग से वैश्विक व्यापार कम हो सकता है।
इसके अलावा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है, तथा अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक और व्यापारिक गतिविधियों में अनिश्चितता पैदा हो सकती है, जिससे मौजूदा आर्थिक असमानताएं और बढ़ सकती हैं। तेहरान अब इस संगठन का पूर्ण सदस्य है और यह अपरिहार्य था कि संयुक्त वक्तव्य में इजरायल के साथ सैन्य संघर्ष और अमेरिका द्वारा उसके परमाणु प्रतिष्ठानों पर बमबारी का उल्लेख किया गया। अब सवाल ये हैं कि आखिर क्यों ट्रंप ब्रिक्स को निशाना क्यों बना रहा है। इसको लेकर पश्चिम के अर्थशास्त्री और नीति विश्लेषक चाहे जो भी कहें, ऐसा प्रतीत होता है कि यह गुट अपने समर्थक जुटा रहा है और अमेरिका तथा अन्य पारंपरिक शक्तियों के लिए चुनौती के रूप में उभर रहा है।
उदाहरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए पसंदीदा मुद्रा के रूप में डॉलर को हटाने की बात करने को बल दे रहा है। इसके अलावा नव-विकसित, विकासशील और अल्प-विकसित अर्थव्यवस्थाओं पर इसके बढ़ते प्रभाव के कारण अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के लिए सौदे करते समय शर्तें तय करना कठिन हो गया है। ब्रिक्स की स्थापना 2009 में हुई थी, इथियोपिया, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान तथा 2025 में इंडोनेशिया भी इसमें शामिल होंगे। 6 महीने पहले ब्रिक्स करेंसी को लेकर जब समूह के देशों ने बड़ा ऐलान किया था और डॉलर को चुनौती देने की बात कही थी, तो उस दौरान भी ट्रंप ने गुस्सा जाहिर किया था। ट्रंप ने कहा था कि ऐसे देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा। एक तरफ ट्रंप धमकियां दे रहे हैं तो दूसरी ओर उनकी धमकियों से ब्रिक्स देशों के बीच संबंध और ज्यादा मजबूत होते नजर आ रहे हैं।
साथियों बात अगर हम अमेरिकी विदेश विभाग के 1300 से अधिक कर्मचारियों की छटनी की करें तो, अमेरिका में, संघीय कर्मचारियों की संख्या में कटौती करने के ट्रम्प प्रशासन के प्रयासों के तहत, विदेश विभाग के 1,000 से ज़्यादा कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, अनैच्छिक रूप से की गई इस छंटनी में 1,107 सिविल सेवा और 246 विदेश सेवा के कर्मचारी शामिल हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि अमेरिकी शरणार्थी प्रवेश कार्यालय के लगभग सभी सिविल सेवा कर्मचारियों की छंटनी कर दी गई है। संघीय सरकार के व्यापक पुनर्गठन प्रयास के तहत, इस साल की शुरुआत में 1,500 से ज़्यादा विदेश विभाग के कर्मचारियों ने स्वेच्छा से नौकरी छोड़ दी थी।
यह छंटनी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के कुछ ही दिनों बाद हुई है जिसमें कहा गया था कि ट्रम्प प्रशासन की संघीय कर्मचारियों की संख्या में कटौती की योजना आगे बढ़ सकती है। अमेरिका में संघीय सरकार में छंटनी को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी छंटनी जारी रखने के पक्ष में फैसला सुनाया। अमेरिकी विदेश विभाग के उप सचिव ने कहा कि जिन कर्मचारियों की छंटनी की जाएगी, उन्हें जल्द ही सूचित कर दिया जाएगा। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि विदेश मंत्रालय से कितने लोगों को निकाला जाएगा। विदेश मंत्रालय ने मई में कांग्रेस को छंटनी और पुनर्गठन के बारे में सूचित किया था। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि पिछली सरकार द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों में कटौती की जाएगी।
साथियों बात अगर हम अफ्रीकी देशों के तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन में बैठक में ट्रंप द्वारा व्यवहार प्रिंसिपल का रोल अदा करने की करें तो, राष्ट्रपति ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में अफ्रीका के 5 देशों के राष्ट्र-प्रमुखों के साथ तीन दिनों का शिखर सम्मेलन शुरु किया। ये 5 देश हैं, गैबॉन गिनी-बिसाऊ लाइबेरिया, मॉरिटानिया और सेनेगल। 9 जुलाई को इस मीटिंग में राष्ट्रपति ट्रम्प किसी स्कूली बच्चों की क्लास में बैठे प्रिंसिपल की तरह बर्ताव करते रहे। उन्होंने सबसे पहले मॉरिटानिया के प्रेसिडेंट को अपनी बात रखने का मौका दिया। पर उनका बयान शुरु होने के थोड़ी देर बाद ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बेचैन हो गए।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने हाथों से इशारा करके मॉरिटानिया के प्रेसिडेंट को अपनी बात जल्द खत्म करने का संकेत दिया। पर इसके बाद भी मॉरिटानिया के प्रेसिडेंट अपने देश कीसमस्याओं के बारे में बताते रहे। शायद वो अमेरिका से कुछ मदद चाहते होंगे और तब राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपना सिर हिलाते हुए हाथों से दूसरी बार इशारा किया और इस बार उनकी झुंझलाहट देखकर मॉरिटानिया के प्रेसिडेंट अचानक खामोश हो गए। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प किस तरह ग्लोबल साउथ के साथ भेदभाव करते हैं। जबकि हमारे पीएम इन्हीं देशों की मदद के लिए हमेशा खड़े रहते हैं, उनके सुख-दुख का ख्याल करते हैं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ग्लोबल साउथ के उन मुद्दों को भी उठाते हैं, जिसे पश्चिमी देश आजतक अनदेखा करते आए हैं।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन करें इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि ट्रंप के टैरिफ वार पर जग हंसाई- दुनिया से दुश्मनी की नौबत आई?- नोबेल शांति पुरस्कार पाने की चांस घटाई? ट्रंप जब से राष्ट्रपति बने हैं, अपनी नीतियों व बयानों से सुर्खियों में रहे है ट्रंप ने अमेरिकी फर्स्ट के लिए कमर कसी- दुनिया के देशों की व्यापार नीति फंसी-ब्रिक्स देशों, यूरोपीय यूनियन, अफ्रीकी देशों, ग्लोबल साउथ, छटनी के लिए घेराबंदी कसी मेरे विचार से सबसे कठिन स्थिति होगा
(स्पष्टीकरण : उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। यह जरूरी नहीं है कि कोलकाता हिंदी न्यूज डॉट कॉम इससे सहमत हो। इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है।)
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