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ट्रंप ने पहले पीएम मोदी की तारीफ़ की, फिर भारत पर टैरिफ़ बढ़ाने की दी चेतावनी

  • रूस से तेल ख़रीद घटाने के दावे के साथ अमेरिका-भारत व्यापार संबंधों पर दबाव

वॉशिंगटन | 5 जनवरी 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत को लेकर दोहरा रुख अपनाया है। एक ओर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ़ की, वहीं दूसरी ओर भारत पर टैरिफ़ बढ़ाने की चेतावनी भी दे डाली।

ट्रंप ने दावा किया कि भारत ने रूस से तेल की ख़रीद में “काफ़ी कमी” की है और यह कदम प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें “ख़ुश करने” के लिए उठाया।

एयर फ़ोर्स वन विमान में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, “वे मुझे ख़ुश करना चाहते थे। मूल रूप से मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं। उन्हें पता था कि मैं ख़ुश नहीं था और मुझे ख़ुश करना ज़रूरी था।”

तारीफ़ के साथ चेतावनी

हालांकि, ट्रंप की यह नरमी ज़्यादा देर तक नहीं टिक पाई। बातचीत के दौरान उन्होंने साफ़ कहा कि अगर भारत ने अमेरिका की बात नहीं मानी तो उस पर “बहुत जल्दी टैरिफ़ बढ़ाए जा सकते हैं।”

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक रिश्ते हैं, लेकिन यह रिश्ता अमेरिकी हितों के अनुरूप होना चाहिए।

टैरिफ़ वार्ता के बीच आया बयान

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ़ को लेकर बातचीत चल रही है। इससे पहले भी ट्रंप कई बार सार्वजनिक रूप से यह दावा कर चुके हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि भारत रूस से तेल की ख़रीद सीमित करेगा।

पहले ही भारी टैरिफ़ झेल रहा है भारत

गौरतलब है कि अमेरिका पहले ही भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ़ लगा चुका है। इसमें से 25 प्रतिशत टैरिफ़ रूस से तेल ख़रीदने की “सज़ा” के तौर पर लगाया गया बताया जाता है।

  • अमेरिका ने भारत पर कुल 50% टैरिफ लगा रखा है, जिसमें से 25% टैरिफ को रूस से तेल खरीदने की “सजा” के तौर पर लगाया गया है।
  • ट्रंप प्रशासन का कहना है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर अमेरिका के हितों के खिलाफ काम कर रहा है।
  • भारत ने पहले ही रूस से तेल आयात में कमी की बात कही है, लेकिन ट्रंप इसे “पर्याप्त” नहीं मान रहे।

ट्रंप प्रशासन का तर्क रहा है कि रूस से ऊर्जा आयात जारी रखना अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद करने जैसा है, जबकि भारत ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि उसकी ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हितों और सस्ती आपूर्ति पर आधारित है।

भारत की प्रतिक्रिया

  • विदेश मंत्रालय ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार भारत “संबंधित पक्षों से बातचीत जारी रखेगा”।
  • रूस से तेल खरीद भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों से जुड़ा मुद्दा है, और भारत ने बार-बार कहा है कि वह किसी भी देश पर निर्भर नहीं रहेगा।

भारत-अमेरिका संबंधों पर असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के ताज़ा बयान से भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में अनिश्चितता बढ़ सकती है। एक ओर व्यक्तिगत स्तर पर पीएम मोदी की तारीफ़, तो दूसरी ओर आर्थिक दबाव की चेतावनी—यह रणनीति ट्रंप की पुरानी शैली का हिस्सा मानी जा रही है।

फिलहाल भारत सरकार की ओर से ट्रंप के इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन आने वाले दिनों में टैरिफ़ और ऊर्जा आयात को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत और तेज़ होने की संभावना है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

  • कांग्रेस: राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा: “ट्रंप मोदी जी को ‘अच्छे इंसान’ कह रहे हैं, लेकिन टैरिफ बढ़ाने की धमकी दे रहे हैं। यह सरकार की विदेश नीति की नाकामी है।”
  • BJP: प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा: “ट्रंप का बयान दोस्ताना है। भारत अपनी नीति पर अडिग है।”

यह बयान भारत-अमेरिका संबंधों में नया तनाव पैदा कर सकता है, खासकर जब 2026 में बंगाल और अन्य राज्यों में चुनाव होने हैं।

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