नेशनल न्यूज डेस्क | 29 जुलाई 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान वॉशिंगटन के साथ समझौता करने का “बेहद इच्छुक” है और उसने मूल रूप से यह मान लिया है कि वह परमाणु हथियार नहीं रख सकता।
हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बातचीत विफल रही तो अमेरिकी सेनाएं फिर से हमले शुरू कर सकती हैं। ट्रंप ने ये बातें रिपब्लिकन कांग्रेसमैन एंडी ओगल्स के लिए एक वर्चुअल कैंपेन रैली और फॉक्स न्यूज को दिए एक अलग इंटरव्यू में कहीं।
- ट्रंप का प्रमुख बयान
ट्रंप ने टेनेसी में वोटर्स से कहा:
“उनके (ईरान) पास कभी न्यूक्लियर हथियार नहीं होंगे और वे यह बात समझते हैं। हमने उन पर बहुत जोरदार प्रहार किया है और वे किसी भी तरह डील करना चाहते हैं।”
फॉक्स न्यूज के साथ इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच कुछ बहुत अच्छी बातचीत हुई है। उन्होंने ईरान के उन बयानों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि न्यूक्लियर मामलों पर कोई चर्चा नहीं हो रही है।
उन्होंने कहा:
“कभी-कभी ऐसा होता है कि हम किसी बहुत अच्छी चर्चा के बीच में होते हैं और वे बाहर आकर कहते हैं कि हम बात नहीं कर रहे हैं या हमने न्यूक्लियर पर चर्चा नहीं की, जबकि हमने सिर्फ उसी पर चर्चा की क्योंकि उनके पास कभी न्यूक्लियर हथियार नहीं होंगे, वे यह समझते हैं।”
- समझौते की प्राथमिकता और चेतावनी
ट्रंप ने कहा कि ईरान असल में अमेरिका की मांग मान गया है, लेकिन उसने अभी तक अपनी इस बात को आधिकारिक रूप से पक्का नहीं किया है।
उन्होंने कहा:
“मैं बस इतना चाहता हूं, उनके पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए, बस इतनी सी बात है। वे असल में इस बात के लिए मान गए हैं, हमें बस उनसे इसे आधिकारिक करवाना है।”
राष्ट्रपति ने कहा कि वे और ज्यादा सैन्य कार्रवाई के बजाय किसी समझौते को प्राथमिकता देंगे। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तेहरान ने समझौता करने से इनकार किया, तो वे ईरान के पुलों, बिजलीघरों और दूसरे बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर हमले करेंगे।
ट्रंप ने कहा:
“अगर वे समझौता नहीं करते हैं, तो मैं वापस जाऊंगा और अपना काम पूरा करूंगा।”
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अमेरिका ‘पिकएक्स माउंटेन’ पर हमला कर सकता है, जहां खबर है कि ईरान निर्माण और किलेबंदी का काम कर रहा है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण
ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से आने-जाने पर अमेरिकी सेना का कंट्रोल है और वह सिर्फ चुनिंदा जहाजों को ही गुजरने दे रही है। एक समझौते की रूपरेखा बनने के बाद वॉशिंगटन ने अपनी नाकेबंदी में ढील दी थी, लेकिन ईरान के समझौते को तोड़ने के बाद इसे फिर से लागू कर दिया।
उन्होंने कहा:
“सिर्फ वही जहाज गुज़र पाते हैं जिन्हें हम गुजरने देना चाहते हैं। हमारी नाकेबंदी इतनी मजबूत है कि कोई भी इससे गुजर नहीं सकता।”
निष्कर्ष: ट्रंप के बयान से साफ है कि अमेरिका ईरान के साथ परमाणु समझौते को प्राथमिकता दे रहा है, लेकिन बातचीत विफल होने पर सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी खुला रखा गया है। 2015 के परमाणु समझौते से अमेरिका के अलग होने के बाद से दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं।
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