कोलकाता हिन्दी न्यूज | 29 सितम्बर 2026: दुर्गापूजा के पंडाल में प्रवेश करते ही अगर आपको लगे कि आप किसी नाट्य समारोह का हिस्सा बन गए हैं, तो हैरान मत होइएगा। चारों ओर नाटकों के पोस्टर, मुखौटे, गुब्बारे और झंडे होंगे।
मंच भी सजा होगा, लेकिन वहां कोई अभिनेता या अभिनेत्री नजर नहीं आएगा। इस बार दर्शक खुद उस नाटकीय अनुभव के सहभागी बनेंगे।
कोलकाता के प्रतापादित्य रोड स्थित त्रिकोण पार्क बारोवारी दुर्गापूजा कमेटी अपनी 97वीं वर्षगांठ पर ‘शारद नाट्योत्सव 2026’ की थीम लेकर आ रही है।
पंडाल को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि दर्शकों को लगेगा, वे किसी नाट्यमंच में प्रवेश कर रहे हैं। मंच के एक विंग से होकर वे मुख्य मंच तक पहुंचेंगे, जहां मां दुर्गा अपने परिवार के साथ विराजमान होंगी।
मंच पर नाटक का माहौल, लेकिन कलाकार गायब
पिछले वर्ष इस पूजा को ‘संवाद प्रतिदिन’ के ‘पूजो परफेक्ट’ सहित कई पुरस्कार मिले थे। इस बार कमेटी में बदलाव के कारण तैयारियां देर से शुरू हुईं, लेकिन अब काम तेजी से चल रहा है।
पंडाल का निर्माण विमल सामंत के निर्देशन में हो रहा है। रोशनी की जिम्मेदारी प्रेमेन्दु विकास चाकी और माहौल तैयार करने की जिम्मेदारी अंशु चक्रवर्ती की है। प्रतिमा का निर्माण अमल पाल कर रहे हैं।
विमल सामंत के मुताबिक, पंडाल में प्रवेश करते ही दर्शकों को नाट्य समारोह जैसा वातावरण महसूस होगा। वहां दस नाटकों के पोस्टर लगाए जाएंगे।
मुखौटे, गुब्बारे, झंडे और चरखा जैसे सजावटी तत्व भी होंगे। हालांकि, किसी नाटक के अभिनेता या अभिनेत्री दिखाई नहीं देंगे। दर्शक मंच के एक विंग से होकर सीधे मुख्य मंच तक पहुंचेंगे।
खुला नल, जलती बत्ती और खाली मेज—कहानी कहेंगे दृश्य
पंडाल में कई ऐसे दृश्य तैयार किए जा रहे हैं, जो किसी नाटक के बीच ठहर गए क्षणों जैसे लगेंगे। कहीं नल खुला होगा और पानी गिरने के बावजूद बाल्टी खाली रहेगी। किसी कमरे में पंखा घूम रहा होगा, रोशनी जल रही होगी और हवा से कैलेंडर के पन्ने उड़ रहे होंगे—लेकिन कमरे में कोई मौजूद नहीं होगा।
एक मेज पर खुली किताब, चश्मा और चाय का कप रखा होगा, मगर कुर्सी खाली रहेगी। वहीं, एक पोडियम पर लिखा होगा—‘जो कहूंगा, सच कहूंगा; सच के सिवा कुछ नहीं सुनूंगा।’ लेकिन वहां भी कोई वक्ता नहीं होगा।
इन दृश्यों के जरिए पंडाल में एक ऐसी नाटकीय दुनिया रची जा रही है, जहां वस्तुएं और खाली जगहें अपने आप में कहानी कहेंगी।
दुर्गापूजा और रंगमंच का अनूठा मेल
त्रिकोण पार्क की इस वर्ष की प्रस्तुति में नाट्य मंच की कल्पना और दुर्गापूजा का उत्सव एक साथ दिखाई देंगे। दर्शक केवल सजावट देखने वाले नहीं, बल्कि पंडाल की रचना के भीतर से गुजरते हुए अनुभव का हिस्सा बनेंगे।
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