खड़गपुर। आज 15 नवंबर, शनिवार को आदिवासी आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक वीर बिरसा मुंडा की जयंती है। बिरसा मुंडा की जन्मजयंती के उपलक्ष्य में मेदिनीपुर शहर के रांगामाटी क्षेत्र में आईटीआई कॉलेज के बाहर स्थापित बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर मेदिनीपुर नगर पालिका के अध्यक्ष सौमेन खां ने माल्यार्पण किया।
इस अवसर पर उपस्थित नेताओं ने कहा कि भारत की सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि में देश के आदिवासी समुदाय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। इतिहास के पन्ने पलटने पर पता चलता है कि आदिवासी नेताओं ने औपनिवेशिक शोषण और अन्याय के विरुद्ध सशक्त आंदोलन चलाए।
इन आंदोलनों का मुख्य उद्देश्य था अपनी भूमि, संस्कृति और सम्मान की रक्षा करना।अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध से लेकर बीसवीं शताब्दी की शुरुआत तक ब्रिटिश औपनिवेशिक शासकों, स्थानीय जमींदारों और महाजनों के खिलाफ आदिवासी समुदाय ने समय-समय पर आंदोलन किए।

जब भी उनके पारंपरिक जीवन-तंत्र पर आघात हुआ, उन्होंने प्रतिरोध की आवाज बुलंद की। बिरसा मुंडा के नेतृत्व में हुए उलगुलान आंदोलन, या अल्लूरी सीताराम राजू, तात्या भील, वीर गुंडाधुर, रानी गैदिनलियू, रामजी गोंड, शहीद वीर नारायण सिंह, सिधू-कान्हू और अन्य कई नेताओं के संघर्षों से यह साबित होता है कि
भारत के आदिवासी समाज का यह विद्रोह बिखरे हुए रूप में नहीं था। बल्कि औपनिवेशिक अत्याचार के खिलाफ उन्होंने पूरे देश में एक सशक्त जन आंदोलन खड़ा किया था।
उनके इन आंदोलनों ने केवल आदिवासियों की रक्षा ही नहीं की बल्कि कहा जा सकता है कि उन्होंने देश की स्वतंत्रता और समानता सुनिश्चित करने वाले व्यापक आंदोलन को भी मजबूती प्रदान की। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर विधायक अजीत माईती ने भी उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
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