निशान्त, Climate कहानी, कोलकाता: दुनिया में जलवायु परिवर्तन पर बातचीत अब सिर्फ़ संयुक्त राष्ट्र के मंचों और COP सम्मेलनों तक सीमित नहीं रह गई है। अब इसकी झलक व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौतों में भी दिखाई देने लगी है।
यानी देश अब सिर्फ़ यह तय नहीं कर रहे कि किन वस्तुओं पर शुल्क कम होगा या व्यापार कैसे बढ़ेगा। वे यह भी तय कर रहे हैं कि स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों, कम-कार्बन उद्योगों और जलवायु सहयोग में साथ कैसे काम किया जाएगा।
Trade & Climate Tracker लॉन्च
इसी बदलते रुझान को समझने के लिए International Institute for Sustainable Development (IISD) ने Trade & Climate Tracker लॉन्च किया है। यह दुनिया का पहला ऐसा ऑनलाइन मंच है, जो मुख्यधारा के व्यापार और आर्थिक सहयोग समझौतों में जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े प्रावधानों का वैश्विक स्तर पर विश्लेषण करता है।
ट्रैकर में 1 जनवरी 2025 के बाद हस्ताक्षर किए गए 71 व्यापार और आर्थिक सहयोग समझौतों को दर्ज किया गया है। इनमें देखा गया है कि कौन-से समझौते एनर्जी ट्रांजिशन, जलवायु सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और भारी उद्योगों के डीकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा दे रहे हैं।
रिपोर्ट के प्रमुख आंकड़े
ट्रैकर में जिन 46 समझौतों का पूरा पाठ सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है, उनके विश्लेषण से कई महत्वपूर्ण रुझान सामने आए हैं:
- 67 प्रतिशत समझौतों में ऊर्जा सहयोग से जुड़े प्रावधान शामिल हैं (स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, बिजली ढांचा आदि)।
- 59 प्रतिशत समझौतों में जलवायु परिवर्तन से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।
- 54 प्रतिशत समझौतों में Critical Raw Materials (महत्वपूर्ण खनिजों) का उल्लेख है।
- 37 प्रतिशत समझौतों में रिन्यूएबल एनर्जी सहयोग को विशेष रूप से शामिल किया गया है।
भारत के लिए महत्व
यह बदलाव सिर्फ़ उन देशों तक सीमित नहीं है जिन्हें पारंपरिक रूप से जलवायु कार्रवाई का समर्थक माना जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों और आर्थिक प्राथमिकताओं वाले देश भी अब व्यापार समझौतों के जरिए ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों और स्वच्छ औद्योगिक विकास को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत के लिए यह रुझान खास महत्व रखता है। भारत एक ओर यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और कई अन्य देशों के साथ व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रहा है। दूसरी ओर देश रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी निर्माण और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने पर भी तेजी से काम कर रहा है।
निष्कर्ष: यह रिपोर्ट एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करती है। जलवायु परिवर्तन और व्यापार को अब अलग-अलग विषय नहीं माना जा रहा। दुनिया की नई आर्थिक साझेदारियों में दोनों एक-दूसरे से तेजी से जुड़ रहे हैं।
भविष्य के व्यापार समझौते सिर्फ़ बाज़ारों तक पहुंच तय नहीं करेंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु सहयोग और हरित उद्योगों की दिशा क्या होगी।
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