श्याम कुमार राई, खड़गपुर । दार्जिलिंग की सैर…..आज 29 मई के ही दिन मानव ने पहली बार दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी माउंट एवरेस्ट पर कदम रखा था। तेनजिंग नोर्गे ने जिस तारीख को एवरेस्ट विजय किया, उसी तारीख को अपना जन्म दिन मनाने लगे। देश के पहले पर्वतारोहण संस्थान की स्थापना दार्जिलिंग में हुई….यदि आप पर्वतों की रानी दार्जिलिंग की सैर के लिए निकल रहे हैं तो आपको दार्जिलिंग अवस्थित हिमालयन पर्वतारोहण संस्थान (Himalayan Mountaineering Institute) को देखने का कार्यक्रम अवश्य रखना चाहिए। यह एक संस्थान तो है साथ ही मानव के ऐतिहासिक जीत का यादगार प्रतीक है। सन् 1953 को आज ही वह तारीख थी, दिन शुक्रवार था, जब सुबह 11 बजकर 30 मिनट पर भारत के तेनजिंग नोर्गे और न्यूजीलैंड के एडमंड हिलेरी ने संसार की सबसे ऊंची चोटी पर कदम रखा और संयुक्त रूप से ऐसा करने वाले दुनिया के पहले व्यक्ति बने। यही विजय इस संस्थान के स्थापना की वजह बनी।

देश के तात्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने दिलचस्पी दिखाते हुए देश में पर्वतारोहण जैसे साहसिक खेल को बढ़ावा देने के लिए इस संस्थान की स्थापना की योजना बनाई और 4 नवंबर, 1954 को संस्थान बन कर तैयार हो गया। यह संस्थान अब तक सैकड़ों, हजारों नहीं लाखों लोगों को पर्वतारोहण का प्रशिक्षण दे चुका है और दे रहा है। यहां एक दिलचस्प बात बताता चलूं कि तेनजिंग नोर्गे को अपने जन्मदिन की तारीख ठीक-ठीक मालूम न होने की वजह से उन्होंने अपना जन्मदिन एवरेस्ट फतह की तारीख 29 मई को मनाना शुरू किया। जैसा कि ऊपर उल्लेख कर चुका हूं कि यही वह दिन था जिस दिन उन्होंने एडमंड हिलेरी के साथ संयुक्त रूप से संसार की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट (8848 मीटर) को फतह किया था।

यह संस्थान चौरस्ता से बमुश्किल डेढ़-दो किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है। जहां आप पैदल ही आराम से पहुंच सकते हैं। सन् 1976 में मैं अपने अभिन्न मित्र गोपाल नेवार के साथ संस्थान देख चुका हूं। हम दार्जिलिंग स्थित राज्यपाल भवन की ड्यूटी में तैनात थे। भवन के बगल से ही होकर रास्ता जाता है जो आपको संस्थान पहुंचा देगा। भवन में प्रवेश के ठीक पहले दीवार पर शिल्पकार की आकर्षक कृति आपको दिखाई देगी। जिसमें पर्वत-चोटी की चढ़ाई करते दो पर्वतारोही दिखाई दे रहे हैं। एक पर्वतारोही अपने साथी पर्वतारोही की ओर हाथ बढ़ाते हुए दिख रहा है।

इस संस्थान में देश-विदेश से रोजाना काफी लोगों का आना होता है। संस्थान के संग्रहालय में पर्वतारोहण से संबंधित उपकरणों से लेकर उन सारी चीजों को प्रदर्शित किया गया जो पर्वतारोहण के दौरान आवश्यक होता है। साथ ही ऊंचाईयों पर दिखने और मिलने वाले वनस्पति, पशु-पक्षी की तस्वीरें उनके पूरे विवरण के साथ भी रखी गई हैं। उन औजारों, पोशाकों को भी रखा गया है जिनका उपयोग तेनजिंग नोर्गे ने किया था। कुल मिलाकर भारतीय पर्वतारोही संस्थान का यह संग्रहालय आपको एक अलग ही दुनिया की सैर कराती है। जहां आप अनूठे अहसास को महसूस करेंगे, आप खो-से जाएंगे, यह तय है…..।

हां, चलते-चलते यह भी बताता चलूं कि हिमालयन पर्वतारोहण संस्थान से ही सटा हुआ एक और आकर्षण का केंद्र पद्मजा नायडू हिमालयन जूलोजिकल पार्क है और मजे की बात है कि इस पार्क और हिमालयन पर्वतारोहण संस्थान का एक ही प्रवेशद्वार है (आप तस्वीर में देख सकते हैं)। यहां भी आप अपने परिवार एवं आत्मीय जनों के साथ खुशियों के खूबसूरत ढेरों पल बिता सकते हैं। अब यही रूकता हूं। आप हमेशा स्वस्थ रहें, मस्त रहें और व्यस्त रहें।IMG-20220529-WA0001

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