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आज धुरंधर -2 (रिवेंज) आखिरकार देख ही ली!!

नई दिल्ली। किसी भी फिल्म में हर व्यक्ति की रुचि का एक विषय होता है। किसी को मारधाड़ के दृश्य पसंद हैं, किसी को रोमांटिक। किसी को जासूसी पसंद है तो किसी को वीएचएफ तकनीक से दर्शाए गए अविश्वसनीय, अलौकिक शॉट।

भाषा का विद्यार्थी होने के कारण सत्य घटनाओं पर आधारित किसी भी फिल्म में मेरी विशेष रुचि का विषय यह होता है कि कलाकार ने मूल पात्र के हाव-भाव के साथ उसकी भाषा और टोन सही से पकड़ी है या नहीं। बताते चलूं कि हाव-भाव के साथ भाषा और टोन पकड़ना मिमिक्री करने से कुछ आगे की चीज है, मिमिक्री का एडवांस वर्जन है यह।

इस विधा का मास्टर मैं फिलहाल के कलाकारों में कपिल शर्मा शो वाले सुनील ग्रोवर को मानता हूं। गुलजार और कादर खान के अंदाज, भाव भंगिमा, भाषा और टोन को जिस तरह उन्होंने पर्दे पर परोसा, वह निश्चित ही असाधारण है।

धुरंधर-2 मूवी के दो ही पात्र रियल लाइफ के हैं जिन्हें मैं जानता हूँ- पहला अजीत डोभाल जी और दूसरा अतीक अहमद। अजीत डोभाल जी को मैने टीवी पर देखा ज्यादा है लेकिन सुना बहुत कम है। उनके पात्र को आर. माधवन ने काफी बढ़िया से निभाया है।

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कोई सबूत न छूटे इसलिए सिगरेट पीने के बाद बची हुई सिगरेट ऐश ट्रे या कहीं और फेंकने के बजाय जेब में रख लेना, बताता है कि निर्देशक और राइटर ने कितनी बारीकी से चीजों को पकड़ा है। बोलने के अंदाज और भावभंगिमा को मंझे हुए कलाकार आर. माधवन ने काफी अच्छे से पकड़ा है।

लेकिन जिस कलाकार ने भाषा और टोन के मामले में मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया, वह है अतीक अहमद का किरदार निभाने वाले सलीम सिद्दीकी। भारी-भरकम और तोंदू शरीर, सिर पर गमछे को मुरैठा नुमा बांधना, मुंह में पान या गुटखा जैसा कुछ चबाते रहना, ढीला-ढाला सफेद कुर्ता-पैजामा पहनना और घनी काली मूछों का श्रेय तो खैर मेक-अप मैन को जाता है।

लेकिन सलीम सिद्दीकी ने जिस तरह से अतीक अहमद की दबंगई वाली थोड़ी अवधी, कुछ भोजपुरी, कुछ खड़ी और पूरी तरह से प्रयागराज वाली बोली और टोन पकड़ी है, वह सच में काबिले तारीफ है।

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चूंकि मैं बैसवाड़ा का हूँ, प्रयागराज की भाषा को काफ़ी अच्छे से समझता हूं। इसलिए ‘बईठो, पइसा लाये हो, अगले महीने की नउ तारीख को माल आएगा, जाई के लइ लेव, ई कवन है’ जैसे छोटे-छोटे वाक्यों में सलीम सिद्दीकी ने प्रयागराज का जो पुट पकड़ा है, वह मुझे बेहद आकर्षित करता है।

इन महीन बारीकियों से अतीक अहमद जैसा किरदार बिल्कुल जीवंत हो उठता है। ‘%$ट के बाल निकले नहीं, सेना की ट्रेनिंग करेंगे’ जैसे लोकल डायलाग उसके माफिया वाले रील लाइफ किरदार को रियल लाइफ के बिल्कुल नजदीक लाकर खड़ा कर देते हैं।

फ़िल्म की बाकी अच्छाइयों और बुराइयों की चर्चा फिर कभी। फिलहाल हूरगति को प्राप्त अतीक अहमद के किरदार में जान फूंक देने वाले कलाकार सलीम सिद्दीकी को ठाकुर विनय सिंह बैस की तरफ से दस में से पूरे ग्यारह नंबर।

(विनय सिंह बैस)
भाषा और टोन के धुरंधरों के प्रशंसक

Vinay Singh
विनय सिंह बैस, लेखक/अनुवाद अधिकारी

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