कोलकाता हिन्दी न्यूज | 11 अगस्त 2026: तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न ‘जोड़ाफूल’ को लेकर बंगाल की राजनीति में अटकलों का दौर तेज हो गया है। सवाल उठ रहा है कि यदि चुनाव आयोग तृणमूल कांग्रेस का नाम और चुनाव चिह्न ममता बनर्जी के विरोधी धड़े के पक्ष में कर देता है, तो क्या ममता बनर्जी के हाथ से पार्टी की पहचान भी निकल जाएगी?
सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि स्वतंत्रता दिवस से पहले ही इस मामले में आयोग कोई बड़ा फैसला ले सकता है। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से अभी तक इस संबंध में आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।
मामला तृणमूल कांग्रेस के दो धड़ों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावे से जुड़ा है। दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दावेदारी के समर्थन में चुनाव आयोग के समक्ष दस्तावेज और संख्या से जुड़े आंकड़े पेश किए हैं। अब निगाहें आयोग के फैसले पर टिकी हैं।
दोनों धड़ों ने सौंपे दस्तावेज
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले धड़े ने पार्टी के गठन से जुड़े पुराने दस्तावेजों, आंदोलनों और संगठनात्मक गतिविधियों से संबंधित रिकॉर्ड आयोग के समक्ष पेश किए हैं। वहीं, विरोधी धड़े की ओर से भी विधायकों की संख्या समेत अपनी बहुमत की दावेदारी के समर्थन में दस्तावेज जमा किए गए हैं।
बताया जा रहा है कि चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को अपनी दावेदारी साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज जमा करने का अवसर दिया था।
इसी क्रम में दोनों ओर से कागजात आयोग तक पहुंच चुके हैं। ममता बनर्जी के धड़े ने विरोधी पक्ष को अतिरिक्त समय नहीं दिए जाने की मांग करते हुए आयोग को पत्र भी लिखा है।
65 विधायकों के समर्थन का दावा
विरोधी धड़े की ओर से दावा किया जा रहा है कि उनके साथ विधानसभा के 65 विधायक हैं। इसके आधार पर वे खुद को संगठन में बहुमत वाला पक्ष बता रहे हैं।
दूसरी ओर, ममता बनर्जी के खेमे का सवाल है कि केवल विधायकों की संख्या के आधार पर किसी धड़े को ‘असली तृणमूल कांग्रेस’ कैसे माना जा सकता है।
पार्टी के चुनाव चिह्न और नाम पर फैसला करते समय संगठनात्मक समर्थन और अन्य संबंधित दस्तावेज भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। ऐसे में दोनों पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों की जांच के बाद ही तस्वीर साफ होगी।
‘जोड़ाफूल’ गया तो क्या होगा ममता का अगला कदम?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि चुनाव आयोग का फैसला ममता बनर्जी के खिलाफ जाता है और ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न उनके हाथ से निकल जाता है, तो उनका अगला राजनीतिक कदम क्या होगा?
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि ममता बनर्जी का खेमा वैकल्पिक चुनाव चिह्न को लेकर तैयारी कर सकता है।
हालांकि, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि नया चुनाव चिह्न मिलने की स्थिति में भी फूल से जुड़े प्रतीक को प्राथमिकता दी जा सकती है।
सांसदों की भूमिका पर भी निगाह
इस पूरे विवाद में संसद में तृणमूल से अलग हुए सांसदों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों धड़ों के बीच संगठनात्मक बहुमत को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। ऐसे में विधानसभा के साथ-साथ सांसदों की स्थिति को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं।
फिलहाल चुनाव आयोग के निर्णय का इंतजार है। फैसला सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि तृणमूल कांग्रेस का नाम और ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न किस धड़े के पास रहेगा। तब तक दोनों खेमों में सियासी हलचल और दावों-प्रतिदावों का दौर जारी रहने की संभावना है।
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