कोलकाता हिन्दी न्यूज | 17 सितम्बर 2026: पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद और गहरा गया है। निर्वाचन आयोग ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि पारंपरिक ‘जोड़ाफूल’ यानी दो फूल और घास वाला चुनाव चिन्ह किस गुट को मिलेगा।
इसके चलते दोनों तृणमूल गुटों के उम्मीदवारों की चुनावी स्थिति भी अनिश्चित बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, गुरुवार को नंदीग्राम में तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों के उम्मीदवारों के नामांकन की जांच के दौरान कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। रिटर्निंग ऑफिसर शुक्रवार सुबह 11 बजे तक इस संबंध में फैसला ले सकते हैं।
सांचीता प्रधान दे या मोहम्मद एहतशामुल हक?
मुख्य सवाल यह है कि नंदीग्राम सीट पर घासफूल चुनाव चिन्ह के साथ कौन चुनाव लड़ेगा। ममता बनर्जी समर्थित कालीघाट तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार सांचीता प्रधान दे और ऋतब्रत बनर्जी गुट के उम्मीदवार मोहम्मद एहतशामुल हक दोनों ही इस चुनाव चिन्ह पर अपना दावा जता रहे हैं।
दोनों पक्षों का कहना है कि वास्तविक तृणमूल कांग्रेस वही हैं और जोड़ाफूल चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ने का अधिकार उन्हें ही मिलना चाहिए।
हालांकि, कानूनी और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या निर्वाचन आयोग के अंतिम निर्णय से पहले रिटर्निंग ऑफिसर किसी उम्मीदवार को पार्टी के आधिकारिक चुनाव चिन्ह के साथ चुनाव लड़ने की अनुमति दे सकते हैं।
कई महीनों से चल रहा है तृणमूल का प्रतीक विवाद
तृणमूल कांग्रेस के नाम, संगठनात्मक नियंत्रण, संपत्तियों और चुनाव चिन्ह को लेकर दोनों गुटों के बीच कई महीनों से विवाद चल रहा है। दोनों पक्षों ने निर्वाचन आयोग के समक्ष अपनी-अपनी दावेदारी पेश की है।
आयोग ने चरणबद्ध तरीके से दोनों गुटों से दस्तावेज और अन्य विवरण मांगे हैं। ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी समर्थक प्रतिनिधिमंडल आयोग के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रख चुके हैं। हालिया सुनवाई में भी दोनों पक्षों से अतिरिक्त दस्तावेज और अंतिम प्रस्तुतियां मांगी गई थीं।
गुरुवार को भी दोनों गुटों के प्रतिनिधियों को आयोग ने चर्चा के लिए बुलाया था। हालांकि, बैठक के बाद भी प्रतीक को लेकर कोई अंतिम आदेश सार्वजनिक नहीं किया गया।
19 सितंबर तक निर्णय की उम्मीद
उपचुनाव कार्यक्रम के अनुसार नामांकन वापसी की अंतिम तिथि 19 सितंबर है। राजनीतिक और चुनावी हलकों में यह उम्मीद जताई जा रही है कि निर्वाचन आयोग इससे पहले दोनों गुटों में से किसी एक को तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक नाम और चुनाव चिन्ह के उपयोग का अधिकार दे सकता है।
यदि निर्धारित समय तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं आता है, तो दोनों गुटों के उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह से संबंधित व्यावहारिक और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
ऐसी स्थिति में ऋतब्रत समर्थक उम्मीदवारों के निर्दलीय या किसी अन्य मान्य विकल्प के तहत चुनाव लड़ने की संभावना पर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, अंतिम स्थिति निर्वाचन आयोग के आदेश पर निर्भर करेगी।
ऋतब्रत बनर्जी का दावा—हमें ही मिलेगा प्रतीक
निर्वाचन आयोग के कार्यालय से बाहर निकलने के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि आयोग ने जितने भी दस्तावेज मांगे थे, उनकी ओर से सभी उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि उपचुनाव से पहले प्रतीक विवाद का समाधान हो जाएगा।
ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस का आधिकारिक चुनाव चिन्ह उनके गुट को ही मिलेगा। उनके गुट ने नंदीग्राम और रेजिनगर दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है।
कल्याण बनर्जी ने उठाया सवाल
दूसरी ओर, ममता बनर्जी समर्थित तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने ऋतब्रत गुट के दावे पर सवाल उठाया है।
उन्होंने कहा कि यदि दूसरे गुट का दावा है कि चुनाव चिन्ह से संबंधित उसका अधिकार वर्ष 2025 में ही समाप्त हो गया था, तो फिर वह उसी घासफूल चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ने का दावा कैसे कर सकता है।
कल्याण बनर्जी ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं सुनाया है, लेकिन उनका गुट घासफूल चुनाव चिन्ह पर अपना अधिकार बरकरार रहने को लेकर आश्वस्त है।
दोनों गुटों ने दाखिल किए नामांकन
ममता बनर्जी समर्थित गुट ने नंदीग्राम से सांचीता प्रधान दे और रेजिनगर से रबिउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी समर्थित गुट ने नंदीग्राम से मोहम्मद एहतशामुल हक को मैदान में उतारा है। रेजिनगर सीट पर ऋतब्रत गुट की ओर से सफीउद्दीन शेख का नाम सामने आया है।
इस प्रकार दोनों सीटों पर चुनावी मुकाबला केवल उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के नाम और संगठनात्मक पहचान को लेकर भी हो गया है।
नंदीग्राम और रेजिनगर उपचुनाव पर सबकी नजर
नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होना है। नंदीग्राम सीट शुभेंदु अधिकारी के दो विधानसभा क्षेत्रों में जीत दर्ज करने के बाद एक सीट छोड़ने से रिक्त हुई थी। रेजिनगर सीट आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर के दो सीटों से जीतने और एक सीट छोड़ने के बाद खाली हुई।
दोनों सीटों पर तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के आमने-सामने होने से चुनाव चिन्ह विवाद और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। अब राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की नजर निर्वाचन आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी है।
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