कोलकाता, 8 सितंबर : पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय उबाल आ गया जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के छात्र संगठन ने सोमवार को कोलकाता विश्वविद्यालय के समीप एक विरोध प्रदर्शन के दौरान रवींद्रनाथ टैगोर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तस्वीरें सार्वजनिक रूप से जलाईं।
छात्र संगठन का आरोप है कि केंद्र सरकार राज्य की शिक्षा व्यवस्था और सांस्कृतिक संस्थानों में “हस्तक्षेप” कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने टैगोर की तस्वीर जलाने को “प्रतीकात्मक विरोध” बताया, जिसे उन्होंने केंद्र द्वारा टैगोर की विचारधारा के “राजनीतिक उपयोग” के खिलाफ एक संदेश कहा।
📍 भाजपा ने जताया आक्रोश
भारतीय जनता पार्टी ने इस घटना को बंगाल की संस्कृति पर “सीधा हमला” बताया। भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “रवींद्रनाथ टैगोर केवल बंगाल ही नहीं, पूरे भारत की आत्मा हैं। उनकी तस्वीर जलाना असहनीय है।”

भाजपा कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को विश्वविद्यालय परिसर के बाहर प्रदर्शन कर टीएमसी से सार्वजनिक माफी की मांग की। कई नेताओं ने टीएमसी पर “राष्ट्रविरोधी मानसिकता” फैलाने का आरोप भी लगाया।
🎓 शिक्षाविदों और समाज का मिला-जुला रुख
घटना के बाद सोशल मीडिया पर #TagoreRespect और #TMCProtest जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कई बुद्धिजीवियों ने टैगोर की तस्वीर जलाने को “अतिरेक और असंवेदनशीलता” बताया, जबकि कुछ टीएमसी समर्थकों ने इसे “राजनीतिक प्रतीकवाद” कहकर उचित ठहराया।
📌 क्या चल रहा है?
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब केंद्र और राज्य सरकार के बीच विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, नियुक्तियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। हाल ही में अमित शाह की विश्वभारती विश्वविद्यालय यात्रा को लेकर भी टीएमसी ने सवाल उठाए थे।
ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च कर, फॉलो करें।



