कोलकाता हिन्दी न्यूज | 12 सितम्बर 2026: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के चुनावी चिह्न ‘जोड़ाफूल’ को लेकर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट और ऋतब्रत बनर्जी के विद्रोही गुट के बीच जारी विवाद अब निर्णायक दौर में पहुंचता दिख रहा है।
राज्य की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग शनिवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगा।
चुनाव चिह्न पर दोनों गुटों के दावे को लेकर दिल्ली में चुनाव आयोग के सामने अलग-अलग समय पर सुनवाई होगी।
ऐसे में राजनीतिक हलकों की नजर इस बात पर है कि आयोग किसे वास्तविक तृणमूल कांग्रेस के रूप में मान्यता देता है और ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न पर अधिकार किस पक्ष को मिलता है।
पहले ऋतब्रत गुट की होगी सुनवाई
चुनाव आयोग में शनिवार को सुबह 11 बजे ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की सुनवाई होगी। इसके ठीक एक घंटे बाद दोपहर 12 बजे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले ‘कालीघाट तृणमूल’ के प्रतिनिधियों के साथ सुनवाई प्रस्तावित है।
दोनों पक्षों की ओर से अधिकतम पांच-पांच प्रतिनिधि सुनवाई में शामिल हो सकेंगे।
ममता गुट की ओर से कौन-कौन होंगे शामिल?
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से बैठक में पार्टी के राज्यसभा नेता डेरेक ओ’ब्रायन, लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी, राज्यसभा की उपनेता सागरिका घोष और पूर्व सांसद साकेत गोखले के साथ एक वकील के शामिल होने की बात कही गई है।
यह गुट चुनाव आयोग के सामने पार्टी और उसके चुनाव चिह्न पर अपने दावे के पक्ष में अपनी दलीलें रखेगा।
ऋतब्रत गुट भी दिल्ली पहुंचा
दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला विद्रोही गुट भी सुनवाई के लिए दिल्ली पहुंच चुका है। इस गुट की ओर से ऋतब्रत बनर्जी, अरूप राय, चंद्रिमा भट्टाचार्य और अखरुज्जमान समेत एक अन्य प्रतिनिधि के शामिल होने की बात कही गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ऋतब्रत गुट के नेता और प्रतिनिधि शुक्रवार को ही दिल्ली पहुंच गए थे।
‘जोड़ाफूल’ पर किसका अधिकार?
पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल यही है कि चुनाव आयोग की नजर में वास्तविक तृणमूल कांग्रेस कौन है और ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न पर अधिकार किस पक्ष का होगा।
दोनों गुटों की ओर से चुनाव चिह्न पर दावा किए जाने के बाद आयोग के सामने यह सुनवाई महत्वपूर्ण हो गई है। सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष अपने-अपने दावे और संबंधित दस्तावेज पेश कर सकते हैं।
उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग की सुनवाई क्यों अहम?
इस पूरे घटनाक्रम का समय भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर बताई गई है।
नामांकन की अंतिम तारीख से महज कुछ दिन पहले चुनाव चिह्न को लेकर आयोग की सुनवाई होने से राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गई हैं।
सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या आयोग उपचुनाव से पहले ही ‘जोड़ाफूल’ को लेकर कोई निर्णायक फैसला सुना देगा।
फिलहाल, शनिवार की सुनवाई के बाद तस्वीर कितनी साफ होती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
‘जोड़ाफूल’ आखिर किसके हाथ में रहेगा—ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के पास या ऋतब्रत बनर्जी के विद्रोही गुट के पास? चुनाव आयोग की आगे की कार्रवाई से इस विवाद की दिशा तय हो सकती है।
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