कोलकाता, 23 अगस्त 2025: प्रधानमंत्री (PM) और मुख्यमंत्री (CM) जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को गंभीर आरोपों में 30 दिन से अधिक जेल में रहने की स्थिति में पद से हटाने संबंधी तीन विधेयकों को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है।
केंद्र सरकार द्वारा इन विधेयकों की समीक्षा के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने आज बयान जारी कर कहा कि पार्टी इस जेपीसी को “तमाशा” मानती है और इसमें कोई सदस्य नामित नहीं करेगी।
उन्होंने कहा, “हम संविधान (130वां संशोधन) विधेयक के प्रारंभिक चरण से ही विरोध कर रहे हैं। यह समिति सिर्फ दिखावा है, इसलिए तृणमूल इससे दूर रहेगी”।
📌 विधेयकों का विवरण:
- संविधान (130वां संशोधन) विधेयक
- केंद्र शासित प्रदेश शासन (संशोधन) विधेयक
- जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक
विधेयक में प्रावधान है कि यदि कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री गंभीर आरोपों में लगातार 30 दिन तक जेल में रहता है, तो उसे पद से हटाया जा सकता है।
दोनों सदनों ने विधेयकों को एक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजने का प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल होंगे।
समिति को संसद के शीतकालीन सत्र में सदन को अपनी रिपोर्ट पेश करनी है। शीतकालीन सत्र नवंबर के तीसरे सप्ताह में आयोजित होने की संभावना है।
📌 विपक्ष का विरोध:
कांग्रेस, माकपा, भाकपा (माले) और अन्य विपक्षी दलों ने इन विधेयकों को लोकतंत्र विरोधी बताया है। ममता बनर्जी ने पहले ही इन विधेयकों को “भारत के लोकतांत्रिक युग का अंत” करार दिया था।
📌 भाजपा का पक्ष:
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह विधेयक “संवैधानिक पदों को कानून के दायरे में लाने” की कोशिश है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे “कुर्सी का मोह नहीं छोड़ना चाहते” और “कानून से ऊपर रहना चाहते हैं”।
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