वाराणसी । मित्रों अभी तक आपने ग्रहों के बारे में सिर्फ यही सुना होगा कि कोई भी ग्रह खराब भाव या दुष्ट ग्रह की संगत में होने पर ही अशुभ प्रभाव देता है। लेकिन आज की इस पोस्ट में आपको बतायेगे कि ग्रह अशुभ नक्षत्र में होने पर भी उतना ही खराब फल देता है जितना कि खराब भाव या दुष्ट ग्रह की संगत में होने पर फल देगा। उदाहरण के लिए शुरुआत मूल दोष से करते हैं जो की आपने भी सुना होगा कि बच्चा अगर मूलो में हुआ है तो वह अपने परिवार के लिए कष्टकारी होता है।

चन्द्र दोष : ज्योतिष अनुसार यदि जन्म कुंडली में चंद्रमा की स्थिति बुध के नक्षत्र (अश्लेशा, जेष्ठा, रेवती) या फिर केतु के नक्षत्र (अश्वनी, मघा, मूल) में हो तो ऐसी जन्म कुंडली में मूल दोष कहा जाता है। इस दोष की वजह से जातक की माता को स्वास्थ्य कष्ट, पिता को आर्थिक कष्ट और मामा के परिवार में भी गंभीर कष्ट आते है। ऐसी ग्रह स्थिति को एक तरह से जातक की जन्म कुंडली में खराब चंद्रमा ही कहा जाता है। जिसके अन्य लक्षण भी, जैसे कि जातक के जीवन में धन और वैभव की कमी, पत्नी सुख की कमी, नौकरी, व्यापार में पैसा अटकने की समस्या आती है। इस दोष के लिए शांति उपचार की बात करें तो ऐसे जातक को हर वर्ष जन्म दिन आने पर जन्म दिन के 28 दिन के अंदर जन्म कुंडली में चंद्रमा जिस नक्षत्र में हो वही दिन वार आने पर नक्षत्र दोष शांति पूजा पंडित जी से कह कर करवानी चाहिए।

सूर्य दोष : ज्योतिष अनुसार यदि जन्म कुंडली में सूर्य की स्थिति शनि के नक्षत्र (पुष्य, अनुराधा, उत्तराभाद्रपद) या फिर राहू के नक्षत्र (अद्रा, स्वाति, शतभिषा) में हो तो ऐसी जन्म कुंडली में सूर्य का दोष कहा जाता है। इस दोष की वजह से जातक के पिता को स्वास्थ्य कष्ट, माता को आर्थिक कष्ट और ताऊ के परिवार में भी गंभीर कष्ट आते है। ऐसी ग्रह स्थिति को एक तरह से जातक की जन्म कुंडली में खराब सूर्य ही कहा जाता है। जिसके अन्य लक्ष्ण भी जैसे कि जातक के जीवन में प्रतिष्ठा की कमी, अधिकारी वर्ग के लोगो की नाराज़गी, अचानक से नौकरी, व्यापार बंद होने की समस्या आती है। इस दोष के लिए शांति उपचार की बात करें तो ऐसे जातक को हर वर्ष जन्म दिन आने पर जन्म दिन के 28 दिन के अंदर जन्म कुंडली में सूर्य जिस नक्षत्र में हो वही दिन वार आने पर नक्षत्र दोष शांति पूजा पंडित जी से कह कर करवानी चाहिए।

अंगारक दोष : ज्योतिष अनुसार यदि जन्म कुंडली में मंगल की स्थिति शनि के नक्षत्र (पुष्य, अनुराधा, उत्तराभाद्रपद) या फिर राहू के नक्षत्र (अद्रा, स्वाति, शतभिषा) में हो तो ऐसी जन्म कुंडली में अंगारक का दोष कहा जाता है। इस दोष की वजह से पिता पुत्र में विवाद, जातक को खुद को पुत्र प्राप्ति में बाधा, भाई को आर्थिक कष्ट और चाचा को गंभीर कष्ट आते है। ऐसी ग्रह स्थिति को एक तरह से जातक की जन्म कुंडली में खराब मंगल ही कहा जाता है। जिसके अन्य लक्ष्ण भी जैसे कि जातक के जीवन में कर्ज़, रोग और शत्रु बाधा जीवन में चोट, चोरी और दुर्घटना का भय, पत्नी से विवाद की समस्या आती है। इस दोष के लिए शांति उपचार की बात करें तो ऐसे जातक को हर वर्ष जन्म दिन आने पर जन्म दिन के 28 दिन के अंदर जन्म कुंडली में मंगल जिस नक्षत्र में हो वही दिन वार आने पर नक्षत्र दोष शांति पूजा पंडित जी से कह कर करवानी चाहिए।

स्त्री दोष : ज्योतिष अनुसार यदि जन्म कुंडली में शुक्र की स्थिति बुध के नक्षत्र (अश्लेशा, जेष्ठा, रेवती) या फिर केतु के नक्षत्र (अश्वनी, मघा, मूल) में हो तो ऐसी जन्म कुंडली में स्त्री दोष कहा जाता है। इस दोष की वजह से जातक की पत्नी को स्वास्थ्य कष्ट, जातक को आर्थिक कष्ट और जातक की बहन के परिवार में भी गंभीर कष्ट आते है। ऐसी ग्रह स्थिति को एक तरह से जातक की जन्म कुंडली में खराब शुक्र ही कहा जाता है। जिसके अन्य लक्ष्ण भी जैसे कि जातक के जीवन में धन और वैभव की कमी, पत्नी सुख की कमी, नौकरी, व्यापार में पैसा अटकने की समस्या आती है। इस दोष के लिए शांति उपचार की बात करें तो ऐसे जातक को हर वर्ष जन्म दिन आने पर जन्म दिन के 28 दिन के अंदर जन्म कुंडली में शुक्र जिस नक्षत्र में हो वही दिन वार आने पर नक्षत्र दोष शांति पूजा पंडित जी से कह कर करवानी चाहिए।

ज्योतिर्विद वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री
मो. 9993874848

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