नयी दिल्ली। नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया कुछ हवाई अड्डों को ‘बेचने या उनका विनिवेश करने’ के विपक्षी दलों के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए बुधवार को लोकसभा में कहा कि देश में छह हवाई अड्डों को लीज़ पर देने की व्यवस्था के आधार पर निजी क्षेत्र को दिया गया है जिससे सरकार को 64 प्रतिशत अधिक राशि प्राप्त होगी। सिंधिया ने ‘वर्ष 2022-23 के लिए नागर विमानन मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर कल हुई लम्बी चर्चा’ का जवाब देते हुए कहा कि कुछ सदस्यों ने चर्चा के दौरान हवाई अड्डों को बेचने और विनिवेश किये जाने का उल्लेख किया था जो सही नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारी नीति विनिवेश की नहीं है।

जिन छह हवाई अड्डों की बात हो रही है, वह विनिवेश या निजीकरण के आधार पर निजी कंपनियों को नहीं दिये गये हैं। इन्हें लीज़ के आधार पर दिया गया है।उन्होंने कहा कि विनिवेश और लीज़ की व्यवस्था में काफी अंतर है और लीज़ की व्यवस्था में परिसम्पत्ति कुछ नियत वर्ष के लिये दी जाती है और इस पर मूल स्वामी का स्वामित्व बना रहता है। इन छह हवाई अड्डों से भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) को प्रति वर्ष 550 करोड़ रुपये की कमाई होती, लेकिन इन्हें लीज़ पर देने के बाद एएआई को प्रति वर्ष 904 करोड़ रूपये मिलते हैं।

इस प्रकार से इन छह हवाई अड्डों से एएआई को अतिरिक्त 354 करोड़ रुपये या 64 प्रतिशत अतिरिक्त राशि मिलेगी। सिंधिया ने कहा कि लीज़ पर देने से जो राशि मिलेगी, उसका उपयोग राज्यों में ही हवाई अड्डों के विकास के लिये खर्च में किया जायेगा। एयरलाइन और हवाई अड्डों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू अंतिम छोर तक सम्पर्क स्थापित करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने पिछले सात वर्षों में इस क्षेत्र का लोकतांत्रिकरण किया है। इससे हवाई यात्रा जो पहले कुछ चुने हुए लोगों तक सीमित थी, उसके दरवाजे अब सभी के लिये खोल दिये गए हैं।

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