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वैशाख पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा का व्रत करने से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता

वाराणसी। वैशाख दिवा एवं रात्रि पूर्णिमा व्रत 23 मई गुरुवार को। वैशाख माह शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 22 मई बुधवार शाम 06 बजकर 48 मिनट पर पर शुरू होगी और 23 मई गुरुवार शाम 07 बजकर 23 मिनट पर समाप्त होगी। वैशाख दिवा एवं रात्रि पूर्णिमा व्रत 23 मई गुरुवार को होगा। इस दिन भगवान विष्णु के स्वरूप श्रीसत्यनारायण जी का पूजन किया जाता है और भगवान श्रीसत्यनारायण जी की कथा पढ़ना अथवा सुनना या पूजा करवाना बेहद शुभ होता है। पूर्णिमा तिथि के दिन भगवान श्रीगणेश जी, माता पार्वती, भगवान शिव और चंद्रमा की पूजा का भी विशेष महत्व है।

शास्त्रों के अनुसार इस दिन किसी भी प्रकार की तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इस दिन शराब आदि नशे से भी दूर रहना चाहिए। इसके शरीर पर ही नहीं, आपके भविष्य पर भी दुष्परिणाम हो सकते हैं। इस दिन सात्विक चीजों का सेवन किया जाता है।

इस दिन तीर्थ स्थलों पर स्नान करने से जन्मों के पाप से मुक्ति मिलती है। इस दिन गंगा स्‍नान का भी विशेष महत्‍व है। यह पूर्णिमा बौध धर्म के अनुयायियों के लिए सबसे बड़ा दिन माना जाता है। बुद्ध पूर्णिमा को बुद्ध जी की जयंती मनाई जाती है। बुद्ध पूर्णिमा हर साल वैशाख महीने की पूर्णिमा को मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु ने अपने 9वां अवतार लिया था। ये अवतार भगवान बुद्ध के नाम से लोकप्रिय है इतना ही नहीं इसी दिन भगवान बुद्ध ने मोक्ष प्राप्त किया था।

इस दिन को लोग सत्य विनायक पूर्णिमा के तौर पर भी मनाते हैं। बताया जाता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत करने से गरीबी दूर होती है और घर में सुख समृद्धि आती है। इस दिन कई धर्मराज गुरु की पूजा भी करते हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से धर्मराज गुरु खुश होते है और लोगों को अकाल मृत्यु का डर नहीं होता। भगवान श्री कृष्ण ने अपने दोस्त सुदामा (ब्राह्मण सुदामा) को भी इसी व्रत का विधान बताया था जिसके पश्चात उनकी गरीबी दूर हुई।

इस दिन व्रती को जल से भरे घड़े सहित पकवान आदि भी किसी जरूरतमंद को दान करने चाहिये। स्वर्णदान का भी इस दिन काफी महत्व माना जाता है।

इस दिन भगवान विष्णु जी की पूजा करनी चाहिये। रात्रि के समय दीप, धूप, पुष्प, अन्न, गुड़ आदि से पूर्ण चंद्रमा की पूजा करनी चाहिये और जल अर्पित करना चाहिये। तत्पश्चात किसी योग्य ब्राह्मण को जल से भरा घड़ा दान करना चाहिये। ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद को भोजन करवाने के पश्चात ही स्वयं अन्न ग्रहण करना चाहिये,इस दिन किए गए अच्छे कार्यों से पुण्य की प्राप्ति होती है। पक्षियों को पिंजरे से मुक्त कर खुले आकाश में छोड़ा जाता है। गरीबों को भोजन व वस्त्र दिए जाते हैं।

‘ॐ मणि पदमे हूम्‌’ बौद्ध धर्म के लोग इस मंत्र को काफी पवित्र और शक्तिशाली मानते हैं। बौद्ध धर्म की महायान शाखा में यह मंत्र विशेष रूप से जाप किया जाता है।
श्रीकूर्म जयंती और श्रीबुद्ध जयंती 23 मई गुरुवार को मनाई जाएगी।

ज्योतिर्विद वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री
मो. 9993874848

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