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कोलकाता में गूँजी वैश्विक हिन्दी की स्वर-लहरियाँ

“हिन्दी की सुमधुर स्वर संधि: कोलकाता में सजा अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक समारोह”

कोलकाता। महानगर कोलकाता के गरिमामय आशीर्वाद अतिथि भवन, गरिया की पावन धरा उस पुण्य अवसर की साक्षी बनी, जब हिन्दी साहित्य परिषद द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के मंच पर देश-विदेश की विभूतियों ने अपनी सर्जनशील आभा से वातावरण को अभिसिंचित किया।

इस ऐतिहासिक समारोह में, हिन्दी की गरिमा और उसकी विश्वव्यापी महक ने मानो शब्दों के जाल में प्रतिफलित होकर उपस्थित सभी हृदयों को स्वाभिमान और अनुराग से आप्लावित कर दिया।

राष्ट्रीय संरक्षक आदरणीय सूर्या सिन्हा के प्रेरक वक्तव्य में जहाँ संस्कृति की धरा पर साहित्य का नवांकुर पल्लवित होते दिखा वहीं जापान से सौजन्य पूर्वक पधारीं डॉ. रमा शर्मा की संवेदनशील वाणी में ‘हिन्दी की गूँज’ की मधुर झंकार दूर तलक गूँज उठी। उनके शब्दों में देशांतर की दूरी को पाटते हुए हिन्दी ने सीमाओं पर विजय पाई।

उल्लासित मंच पर डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा (आगरा), वंदना नाटेश्वरी (नीमच), शोभा किरण (जमशेदपुर), गीतेश्वर बाबू ‘घायल’ (भोपाल), रोहित कुमार अम्बष्ट (दुमका) सहित विविध नगरों के सृजनधर्मी साहित्यकारों ने अपने मर्मस्पर्शी रचनात्मक पाठ में विचारों का सलिल बहाया।

समारोह के सूत्रधार एवं परिषद के संस्थापक-राष्ट्रीय अध्यक्ष, संजय शुक्ल के शब्दों में “साहित्य वही सरिता है, जो हृदयों की शुष्क भूमि को अपनत्व, करुणा और संस्कृति के जल से सिंचित करती है।” उनके विचारों ने उपस्थित जनमानस को हिन्दी के संरक्षण और संवर्धन का उद्घोष करने का नव-शक्ति यज्ञ रचाया।

कार्यक्रम की विदाई बेला में सम्मान एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सुगंधित छाँव में, समस्त साहित्यप्रेमियों ने माँ हिन्दी के पावन आँगन को विश्व-पटल पर और गौरवान्वित करने का संकल्प लिया।

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