IMG 20251106 WA0016

ग्वालतोड़ में सजी भक्ति की रंगोली, डेढ़ सदी पुराना रास उत्सव धूमधाम से शुरू

तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। पश्चिम मेदिनीपुर के ग्वालतोड़ में श्रद्धा और परंपरा का संगम एक बार फिर जीवंत हो उठा। डेढ़ सौ वर्षों की विरासत से संपृक्त यह ऐतिहासिक रास उत्सव ढोल-नगाड़ों, झांकियों और भव्य शोभायात्रा के साथ प्रारंभ हुआ।

पूरा क्षेत्र हरिनाम संकीर्तन, ढाक-ढोल और मृदंग की ध्वनियों से गूंज उठा। कभी यह महकती मिट्टी का सबसे बड़ा उत्सव हुआ करता था, दुर्गा पूजा नहीं, बल्कि रास उत्सव, जब घर-घर में रिश्तेदारों का मेला लगता था।

बेटियाँ अपने बच्चों समेत दूर-दराज़ से मायके लौटती थीं और गाँव में जैसे चारों ओर उल्लास का सावन उतर आता था। आज भी वही परंपरा उतनी ही आत्मीयता से जीवित है।

उत्सव की शुरुआत के साथ ही पाला कीर्तन, दो दिनों की जात्रा नाटिका, एक दिन का ऑर्केस्ट्रा और विविध सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं। आयोजन का दायित्व “ग्वालतोड़ रास तोला एवरग्रीन सोसाइटी” ने संभाला है।

आयोजकों गोपीनाथ चक्रवर्ती, मैनाक चक्रवर्ती (क्लब सचिव), पल्लव चक्रवर्ती और विकास मंडल ने बताया कि महिलाएँ कृष्ण-गोपाल की मूर्तियाँ लेकर संकीर्तन में सम्मिलित होती हैं।

महिलाओं के समूह, नर्तन और हरिनाम की लहरियों से ग्वालतोड़ की गलियाँ मानो ब्रजधाम में बदल गईं। समाजसेवी एवं विद्वान शिशिर कुमार हाजरा ने कहा कि पहले ही दिन से लोगों में हर्ष और भक्ति का वातावरण बना हुआ है।

क्लब सचिव मैनाक चक्रवर्ती के अनुसार चार दिनों तक यह रास उत्सव चलेगा, जिसमें हर दिन भिन्न-भिन्न कार्यक्रम गाँव की संस्कृति को नव रूप में सजाएँगे। गाँव के आँगन से लेकर हर गली तक अब बस एक ही स्वर सुनाई देता है। भक्ति, उल्लास और परंपरा का अद्भुत संगम।

ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च करफॉलो करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

14 + 1 =