पटना। बिहार की पावन भूमि पर ही बहुत से महान लोगो ने जन्म लिया इसी पावन भूमि पर दुनियां के बहुत से हिस्सों में लोग जब पढना लिखना भी नहीं जानते थे, उस समय शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र, नालंदा विश्वविद्यालय बिहार की राजधानी पाटलिपुत्र वर्तमान में पटना में था। बिहार की ही पावन भूमि पर अशोक, अजातशत्रु, बिम्बिसार, चंद्रगुप्त मौर्य, बुद्ध के साथ ही अन्य महान लोगो का धरा रहा।
आज़ाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म भी बिहार में ही हुआ था, वहीं सिक्खों के दसवे गुरु गोविद सिंह का जन्म भी बिहार की राजधानी पटना में हुआ। आज भी भारत के सबसे ज्यादा भारतीय प्रशासनिक अधिकारी बिहार से ही निकलते हैं, लेकिन लगातार विदेशियों के आक्रमण और नेताओं के घटिया राजनीति के कारण बिहार भारत के सबसे गरीब और पिछड़े राज्यों में से एक आज हो गया है।
विश्व में शिक्षा के केंद्र का गौरव प्राप्त करने वाले इस राज्य में साक्षरता दर अन्य राज्यों से कम हो गई है और रोजगार न मिलने के कारण पलायन एक बहुत बड़ी समस्या बन चुका है, जिसका भुक्तभोगी मैं खुद हूं। मेरे जैसे बिहार के हर वर्ग के लोग पलायन करने पर मजबूर हैं लेकिन अब और ज्यादा नहीं, अब बिहार को देश का सबसे विकसित राज्य बनाना ही हम सभी का लक्ष्य होना चाहिए।
राज्य में वर्षों से विकास की बातें होते आ रही काम भी हुआ, लेकिन इसके बावजूद अब भी हमारा राज्य पिछड़ा है। विकास के मायने में हमें बिहार को देश का नंबर एक होना चाहिए। सोचिए न अपना बिहार चन्द्रगुप्त मौर्य, बुद्ध, सम्राट अशोक व चाणक्य की धरती है, जब-जब किसी दुश्मन ने भारत को चुनौती दी है, बिहार ही ढाल बनकर खड़ा हुआ। बिहार की धरती पर लिया हुआ हर एक संकल्प पूरा हुआ है।
मेरे विचार से विकसित भारत का रास्ता विकसित बिहार से होकर ही जाएगा, विकसित भारत का निर्माण केवल बेंगलुरु, मुंबई व दिल्ली में ही नहीं, बल्कि पटना, भागलपुर व रोहतास में भी होना चाहिए। ध्यान रहे 2047 का रास्ता हर गाँव और ज़िले से होकर गुजरता है और इसमें बिहार शायद सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है और होना भी चाहिए।
सच्चाई तो ये है कि बिहार स्वतंत्रता के समय औद्योगिक रूप से अन्य राज्यों की तुलना में काफी आगे था, लेकिन बिहार के विभाजन के बाद सभी प्रमुख उद्योग झारखंड में चले गए और बिहार औद्योगिक दृष्टि से भी पिछड़ा राज्य बन गया।
अब हमें संकल्प लेने की जरूरत है कि बिहार को पुनः वही गौरव दिलाने के लिए सभी नागरिक अपने-अपने सामर्थ्य अनुसार दिन रात मेहनत करते हुए राज्य को और खुद को आगे बढ़ाते रहे।
चिंतक/आईएएस मेंटर/सोशल एक्टिविस्ट/दिल्ली विश्वविद्यालय

