कोलकाता। स्वतन्त्रता दिवस के उपलक्ष्य में अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था हिंदी साहित्य भारती, पश्चिम बंगाल प्रांत ने कोलकाता के सुपरिचित साहित्यिक स्थल बड़ा बाजार लाइब्रेरी के प्रांगण में भव्य साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गोष्ठी आयोजित की जिसकी अध्यक्षता की झांसी से पधारे संस्था के संस्थापक एवं अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रवींद्र शुक्ल ने कार्यक्रम का संयोजन किया।
पश्चिम बंगाल की प्रांतीय अध्यक्ष हिमाद्री मिश्रा ने एवं संचालन का भार वहन किया रंजना झा ने। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नारायण दास सोनी एवं विशिष्ट अतिथियों के रूप में रमेश शिलेदार एवं डॉ. आनंद पांडेय ने उपस्थित होकर कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए।
कार्यक्रम की शुरुआत की आलोक चौधरी ने संस्था के ध्येय गीत के साथ एवं सरस्वती वन्दना की। कार्यक्रम में पधारे सभी सुधीजनों का स्वागत किया संस्था की अंतर्राष्ट्रीय पदाधिकारी डॉ. सुनीता मंडल ने।

तत्पश्चात डॉ. रवींद्र शुक्ल ने अपने वक्तव्य में भारत की आज़ादी को कैसे अक्षुण्य बनाया जा सके इस पर प्रकाश डाला एवं सभी श्रोताओं को समझाया कि कैसे हमें अपने धर्म और अपनी संस्कृति के रक्षण हेतु बढ़ चढ़कर प्रयास करना चाहिए।
बिना धर्म एवं संस्कृति के हमारा अस्तित्व कायम नहीं रह सकता इसलिए हमें अपने अमर शहीदों की तरह प्राण देकर अपने धर्म की, अपनी संस्कृति की, अपनी भाषा की रक्षा करनी होगी तभी आने वाले समय में हमारा अस्तित्व बच सकता है, तभी हम विश्व गुरु बन सकते हैं। यह बात शुक्ल जी ने बहुत ही प्रभावशाली शब्दों में सभी के सामने रखी।
इस कार्यक्रम के सफल संयोजन में प्रतिभा सिंह, कृष्णानंद मिश्रा, अश्विनी कुमार झा, विकाश ठाकुर एवं रुद्रकांत झा का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
कार्यक्रम में श्रोताओं के रूप में विशेष रूप से जीतेन्द्र जीतान्शु, मीनाक्षी सान्गानेरिया, ऊषा जैन, रुद्रकांत झा, सत्यप्रकाश तिवारी, भारती मिश्रा, डॉ. मनोज मिश्र, विनोद यादव, काली प्रसाद दुबेला, संजय विन्नानी, विजय शर्मा विद्रोही, जीवन सिंह आदि ने उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हिमाद्री मिश्रा ने अंत में सभी का धन्यवाद ज्ञापन कर कार्यक्रम सुसंपन्न किया।
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