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भ्रष्टाचार पर निर्णायक प्रहार का तात्कालिक समय आया : ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल 2026 की रिपोर्ट में भारत की 182 देशों में 91वीं रैंकिंग, सुशासन की गंभीर नई चुनौती- समग्र व्यापक विश्लेषण

भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं सरकार, न्यायपालिका, प्रशासन मीडिया, उद्योग, नागरिक, समाज और प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी
भारत को 39 अंकों के साथ 182 देशों में से 91वाँ स्थान- मैं रिपोर्ट देखकर हैरान हूं कि इतने बड़े स्तर पर अभी भी भ्रष्टाचार भारत की प्रतिष्ठा पर आघात व विकास में बहुत बड़ी बाधा? – एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी

गोंदिया, महाराष्ट्र। वैश्विक स्तर पर भ्रष्टाचार केवल रिश्वत लेने या देने तक सीमित अपराध नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र, अर्थव्यवस्था न्याय व्यवस्था और नागरिकों के विश्वास को भीतर से खोखला करने वाली ऐसी दीमक है जो धीरे-धीरे पूरे शासन तंत्र को कमजोर कर देती है। यदि कैंसर शरीर को अंदर से नष्ट करता है, तो भ्रष्टाचार राष्ट्र की संस्थाओं, नीतियों और नैतिक मूल्यों को उसी प्रकार क्षीण करता है।

भारत का आम नागरिक जन्म प्रमाण पत्र से लेकर भूमि रिकॉर्ड, पुलिस, स्थानीय निकाय, कराधान, लाइसेंस, निर्माण अनुमति और अनेक सरकारी सेवाओं तक कहीं न कहीं भ्रष्टाचार की पीड़ा का अनुभव करता है। कई लोग इसे “चाय-पानी” कहकर सामान्य मान लेते हैं, जबकि यही छोटी-छोटी रिश्वतें आगे चलकर बड़े भ्रष्टाचार की जड़ बन जाती हैं।

मैं अधिवक्ता होने के नाते जनता के बीच यह जनजागरण करना चाहूंगा कि आज आवश्यकता केवल भ्रष्टाचार की शिकायत करने की नहीं, बल्कि उसे सामाजिक रूप से अस्वीकार्य बनाने की है। अब ऐसे समय में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (सीपीआई) 2026 भारत सहित पूरी दुनियाँ के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। यह रिपोर्ट भारत के लिए बहुत चिंता का विषय है।

रिपोर्ट के अनुसार भारत 39 अंकों के साथ 182 देशों में 91वें स्थान पर है। विशेष बात यह है कि 0 अंक का अर्थ अत्यधिक भ्रष्ट व्यवस्था तथा चुने गए देशों में सर्वोच्च संख्या का अर्थ अत्यंत स्वच्छ और पारदर्शी शासन व्यवस्था है, भारत में बहुत भ्रष्टाचार है लेकिन मैं इस रिपोर्ट को देखकर हैरान हूं कि भारत में अभी भी इतने बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार है, मैंने सोचा भी नहीं था अर्थात् अब सारी जनता समझ रही है कि, यह स्थिति भारत की प्रतिष्ठा पर आघात व विकास में बहुत बड़ी बाधा है?

यह रिपोर्ट केवल किसी देश की रैंकिंग नहीं बताती, बल्कि यह उस देश की प्रशासनिक विश्वसनीयता,निवेश वातावरण, शासन की गुणवत्ता और संस्थागत पारदर्शिता का वैश्विक संकेतक भी मानी जाती है। किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र के लिए यह केवल अंक या स्थान का प्रश्न नहीं, बल्कि उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा, निवेशकों के विश्वास और नागरिकों की उम्मीदों का भी विषय है।

साथियों बात अगर हम भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक को समझने की करें तो, दुनियाँ के सबसे प्रतिष्ठित वैश्विक सूचकांकों में से एक है। इसे हर वर्ष ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल प्रकाशित करती है। यह रिपोर्ट सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार की धारणा को 0 से चुनाव किए गए देशों में सर्वोच्च नंबर के पैमाने पर मापती है। 0 अंक का अर्थ अत्यधिक भ्रष्ट व्यवस्था तथा सर्वोच्च अंक का अर्थ अत्यंत स्वच्छ और पारदर्शी शासन व्यवस्था है।

इस सूचकांक की विशेषता यह है कि यह किसी एक संस्था की राय पर आधारित नहीं होता, बल्कि विश्व बैंक, विश्व आर्थिक मंच (डब्लूईएफ), एशियाई विकास बैंक सहित लगभग 13 स्वतंत्र वैश्विक स्रोतों और विशेषज्ञों के आकलन को समाहित करता है। इसलिए इसकी विश्वसनीयता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार की जाती है।

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साथियों बात कर हम वर्ष 2026 की रिपोर्ट की करें तो इसमें वैश्विक तस्वीर चिंता पैदा करने वाली है। रिपोर्ट के अनुसार दुनियाँ के ज्यादातर देशों का स्कोर कम है, अर्थात अधिकांश देशों में सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार गंभीर चुनौती बना हुआ है। यह स्पष्ट संकेत है कि भ्रष्टाचार केवल विकासशील देशों की समस्या नहीं, बल्कि विकसित देशों के लिए भी सतत चुनौती है।

हालांकि कुछ देशों ने अपने मजबूत संस्थागत ढांचे, पारदर्शी प्रशासन और कठोर जवाबदेही व्यवस्था के कारण उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इस वर्ष भी डेनमार्क 89 अंकों के साथ सबसे स्वच्छ देशों में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। उसके बाद फिनलैंड, न्यूज़ीलैंड और नॉर्वे जैसे देश हैं। इन देशों की सफलता का आधार केवल कठोर कानून नहीं, बल्कि मजबूत संस्थाएं, पारदर्शी सरकारी प्रक्रियाएं, स्वतंत्र न्यायपालिका, प्रभावी मीडिया, नागरिक सहभागिता और राजनीतिक ईमानदारी है।

दूसरी ओर दक्षिण सूडान, सोमालिया और वेनेजुएला सबसे अधिक भ्रष्ट देशों में शामिल हैं, जहां राजनीतिक अस्थिरता, कमजोर संस्थाएं और प्रशासनिक विफलता ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है।

साथियों, भारत की स्थिति इस रिपोर्ट में विशेष चर्चा का विषय बनी है। रिपोर्ट के अनुसार भारत 39 अंकों के साथ 182 देश में से 91वें स्थान पर है। यह स्थिति यह दर्शाती है कि भारत ने डिजिटल प्रशासन, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) आधार आधारित सेवाओं, सरकारी खरीद में डिजिटलीकरण तथा कई प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से कुछ सकारात्मक प्रगति अवश्य की है, किंतु सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार, राजनीतिक वित्तपोषण में पारदर्शिता की कमी, प्रवर्तन एजेंसियों की प्रभावशीलता और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दे अब भी गंभीर चुनौती बने हुए हैं।

भारत आज विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। विदेशी निवेश आकर्षित करने, वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने, डिजिटल अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केवल आर्थिक सुधार पर्याप्त नहीं होंगे। निवेशक केवल बाजार का आकार नहीं देखते, बल्कि वे यह भी देखते हैं कि किसी देश में कानून का शासन कितना मजबूत है, अनुबंधों का पालन कितना प्रभावी है और भ्रष्टाचार का स्तर कितना कम है। इसलिए भ्रष्टाचार का प्रश्न सीधे आर्थिक विकास से जुड़ा हुआ है।

साथियों, भारत में भ्रष्टाचार के अनेक रूप हैं। छोटे स्तर पर सरकारी कार्यालयों में सुविधा शुल्क, भूमि रिकॉर्ड में हेरफेर, पुलिस या स्थानीय प्रशासन में रिश्वत, ठेकों में अनियमितताएं, सरकारी खरीद में पक्षपात, कर चोरी के लिए मिलीभगत, लाइसेंस और परमिट में अवैध भुगतान जैसी समस्याएं आज भी व्यापक रूप से चर्चा में रहती हैं। बड़े स्तर पर राजनीतिक वित्तपोषण, सार्वजनिक परियोजनाओं में लागत वृद्धि, प्रभाव का दुरुपयोग और सत्ता तथा व्यवसाय के बीच अपारदर्शी संबंध भी चिंता का विषय हैं।

एक गंभीर सामाजिक समस्या यह भी है कि भ्रष्टाचार को अनेक लोग व्यवस्था का सामान्य हिस्सा मान चुके हैं। “काम जल्दी हो जाए” या “बिना परेशानी के काम निकल जाए” जैसी मानसिकता भ्रष्टाचार कोबढ़ावा देती है। जब रिश्वत देने वाला और लेने वाला दोनों इसे सामान्य व्यवहार मान लेते हैं, तब कानून भी सीमित प्रभाव छोड़ता है। इसलिए भ्रष्टाचार के विरुद्ध सबसे बड़ा संघर्ष केवल सरकारी नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक भी है।

साथियों, हाल के वर्षों में भारत ने कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। ई-गवर्नेंस, डिजिटल भुगतान, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी), जीईएम (गवर्नमेंट ई-मार्किटप्लेस), ऑनलाइन टेंडर प्रणाली, आधार आधारित सत्यापन, आयकर और जीएसटी का डिजिटलीकरण, ऑनलाइन सेवा वितरण और डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन ने भ्रष्टाचार की अनेक संभावनाओं को कम किया है।

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प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से करोड़ों लाभार्थियों तक बिना बिचौलियों के सरकारी सहायता पहुंचना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।फिर भी केवल तकनीक समाधान नहीं है। यदि संस्थागत जवाबदेही कमजोर रहे, शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई न हो, जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता पर प्रश्न उठें और दोषियों को शीघ्र दंड न मिले, तो तकनीकी सुधार भी सीमित प्रभाव ही छोड़ेंगे। इसलिए तकनीक के साथ मजबूत संस्थागत सुधार अनिवार्य हैं।

साथियों, राजनीतिक वित्तपोषण में पारदर्शिता आज सबसे महत्वपूर्ण सुधारों में से एक है। लोकतंत्र में चुनाव आवश्यक हैं, किंतु चुनावी वित्तपोषण यदि अपारदर्शी रहेगा तो नीति निर्माण पर निजी हितों का प्रभाव बढ़ सकता है। इसलिए राजनीतिक दलों की आय, चुनावी चंदे और व्यय की पारदर्शिता लोकतांत्रिक शासन की विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है। स्वतंत्र संस्थाओं की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

लोकपाल, लोकायुक्त, केंद्रीय सतर्कता आयोग, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, सूचना आयोग, न्यायपालिका, सतर्कता तंत्र और स्वतंत्र मीडिया लोकतंत्र के प्रहरी हैं। यदि ये संस्थाएं निष्पक्ष, स्वतंत्र और संसाधन- संपन्न हों तो भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।सूचना का अधिकार (आऱटीआई) ने भारत में पारदर्शिता बढ़ाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। अनेक घोटाले, अनियमितताएं और प्रशासनिक कमियां इसी कानून के माध्यम से सामने आईं।

इसलिए पारदर्शिता और सूचना तक नागरिकों की पहुंच को और मजबूत करना समय की आवश्यकता है। भ्रष्टाचार के विरुद्ध नागरिकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। यदि कोई नागरिक रिश्वत देने के बजाय शिकायत दर्ज कराए, डिजिटल पोर्टल का उपयोग करे, सबूत सुरक्षित रखे और कानूनी प्रक्रिया का पालन करे, तो व्यवस्था पर सकारात्मक दबाव बनता है। हर शिकायत तत्काल परिणाम नहीं देती, लेकिन सामूहिक नागरिक भागीदारी व्यवस्था में परिवर्तन का आधार बनती है।

साथियों, विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में नैतिक शिक्षा, ईमानदारी, सार्वजनिक जीवन के मूल्यों और संवैधानिक कर्तव्यों पर अधिक बल दिया जाना चाहिए। भविष्य की पीढ़ी यदि ईमानदारी को सफलता का आधार मानेगी, तभी भ्रष्टाचार के विरुद्ध दीर्घकालिक परिवर्तन संभव होगा।कॉर्पोरेट क्षेत्र की भी जिम्मेदारी कम नहीं है। रिश्वत देकर अनुबंध प्राप्त करना, कर चोरी, फर्जी बिलिंग या अनुचित प्रभाव का उपयोग करना भी भ्रष्टाचार का हिस्सा है। इसलिए मजबूत कॉर्पोरेट गवर्नेंस, स्वतंत्र ऑडिट, व्हिसलब्लोअर सुरक्षा और नैतिक व्यावसायिक आचरण आवश्यक हैं।

साथियों, भ्रष्टाचार का सबसे अधिक नुकसान गरीब, मध्यम वर्ग और छोटे उद्यमियों को होता है। जिनके पास संसाधन कम होते हैं, वे रिश्वत देने में अधिक कठिनाई महसूस करते हैं। परिणामस्वरूप सामाजिक असमानता और बढ़ती है। इसलिए भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष वास्तव में सामाजिक न्याय का भी संघर्ष है। भारत यदि विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य प्राप्त करना चाहता है, तो उसे आर्थिक विकास के साथ सुशासन को भी समान प्राथमिकता देनी होगी। विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा केवल उत्पादन, तकनीक और निवेश से नहीं, बल्कि पारदर्शिता, कानून के शासन और संस्थागत विश्वसनीयता से भी तय होती है।

साथियों, ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की 2026 रिपोर्ट भारत के लिए निराशा का नहीं, बल्कि आत्ममंथन और सुधार का अवसर है। 182 देश में से 91वीं रैंक यह संदेश देती है कि अभी लंबी यात्रा शेष है। यदि हम डिजिटल प्रशासन काविस्तार करें, शिकायत निवारण को प्रभावी बनाएं, स्वतंत्र संस्थाओं को मजबूत करें, राजनीतिक वित्तपोषण में पूर्णपारदर्शिता लाएं, न्यायिक प्रक्रियाओं को तेज करें और नागरिकों को भ्रष्टाचार के विरुद्ध सक्रिय भागीदार बनाएं, तो भारत की स्थिति आने वाले वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बेहतर हो सकती है।

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अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। यह सरकार, न्यायपालिका, प्रशासन, मीडिया, उद्योग, नागरिक समाज और प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। जब तक रिश्वत देने वाला यह नहीं कहेगा कि “मैं सुविधा शुल्क नहीं दूंगा”, तब तक रिश्वत लेने वाला भी समाप्त नहीं होगा।

इसलिए समय की मांग है कि भ्रष्टाचार को सुविधा नहीं, अपराध माना जाए; मौन नहीं, शिकायत की जाए; समझौता नहीं, प्रतिरोध किया जाए। तभी भारत वैश्विक मंच पर केवल आर्थिक महाशक्ति ही नहीं, बल्कि सुशासन, पारदर्शिता और नैतिक नेतृत्व का भी उदाहरण बन सकेगा। यही विकसित भारत की वास्तविक पहचान होगी।

(स्पष्टीकरण : उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। यह जरूरी नहीं है कि कोलकाता हिंदी न्यूज डॉट कॉम इससे सहमत हो। इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है।)IMG 20260713

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