तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। पश्चिम मेदिनीपुर जिला अंतर्गत मेदिनीपुर के कॉलेज कॉलेजिएट गर्ल्स हाई स्कूल में कानूनी सेवा प्राधिकरण के सान्निध्य में एक दिव्य विधिक जागरूकता शिविर आयोजित हुआ, जहाँ संविधान दिवस एवं राष्ट्रीय कानून दिवस के शुभ अवसर पर न्याय के दीप जलाये गए।
विद्यालय की धरती पर मेहमान न्यायाधीश और अन्य गणमान्य अतिथियों का पुष्पवर्षा से अभिनंदन हुआ। वृक्षों की शाखाओं पर जल की बूँदों ने जैसे प्रकृति के कण्ठ से स्वरों की मधुरता बिखेरी, तभी से विधि और पर्यावरण की सौगंध हुई उद्घाटित।
प्रधान शिक्षिका स्वर्णलता बेरा की प्रेरणादायक पालना में ‘वंदेमातरम्’ के स्तोत्रों ने शताब्दियों पुराना अमृत का स्त्रोत खोल दिया। राष्ट्रीय संविधान की प्रस्तावना का पाठ करने वाली शिक्षिका रीता दास के शब्द मानो न्याय के संगीत में रस घोल रहे हों।

बौद्धिक स्पंदनों से भरपूर इस आयोजन में बाल विवाह के अभिशाप और यौवन के उतार-चढ़ावों की संवेदनशील कहानियाँ गूंजीं। जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण के न्यायाधीश शाहिद परवेज ने संविधान को भारत के हृदय की धड़कन और जीवन की आत्मा बताया।
उनके शब्दों में छिपा था एक प्रबल संदेश – “संविधान केवल पुस्तक नहीं, यह है हमारे सपनों का प्रकाश स्तंभ।” उन्होंने हर बालिका-युवक को अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्य के प्रति भी जागरूक होने की प्रेरणा दी।बाल विवाह, PSKO कानून, बच्चों के अधिकारों की कानूनी परतें उन्होने ऐसे खोलकर रखीं जैसे कोई दिव्य ग्रन्थ।
डॉ. शांतनु पांडा ने बाल विवाह पर सरकारी प्रतिबंधों और राष्ट्रीय कल्याण पर शोध की अमृतराशि बिखेरी। अधिकार मित्र डॉ. बासुदेब चक्रवर्ती ने लगातार सक्रिय भूमिका निभाते हुए विधिक सेवा के मार्गदर्शन में प्रकाश फैंका। विद्यालय की अन्य शिक्षिकाओं एवं कर्मियों ने भी इस विधिक महासंगीत को सुमधुर बनाने में अपना योगदान दिया।
छात्राओं के मन में जागृत हुई विधिक चेतना, किसी पर्वत की चोटी से कम नहीं थी।समापन में भारत के राष्ट्रगीत की सामूहिक गूंज ने जैसे भारत रत्नों के रक्त में न्याय के गीत का संचार किया। शिक्षिका गार्गी भट्टाचार्य के सुरम्य संचालन ने कार्यक्रम को एक अविस्मरणीय कानूनी महोत्सव का स्वरूप दिया।
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